
ITR-2 filing:ऐसे व्यावसायिक जिनकी आय या सेलरी 50 लाख रुपये से सालाना से ज्यादा होती है, वह लोग आईटीआर-दो फाइल करते हैं। इनके लिए भी सरकार ने नए बजट में बदलाव किया है, जो पहली अप्रैल से ही लागू हो गया है। इसको लेकर सरकार ने एक्सेल यूटिलिटी में इनकम टैक्स के तहत कुछ बदलाव किए हैं। इससे विशेष रूप से बिजनेसमैन के लिए बनाया गया है। इन बदलाव से बिजनेसमैन को भी लाभ हागा।
एक अप्रैल से नया वित्तवर्ष 2025-26 शुरू हो गया है। अब लोग अपनी आईटीआर फाइल करने की शुरुआत करने वाले हैं। आईटीआर फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। इसलिए इससे पहले ही लोगों को अपनी आईटीआर फाइल करनी होगी। जिन लाेगों की आय सालाना 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उनको आईटीआर-दो फाइल करनी होती है। इसके लिए एक्सेल यूटिलिटी होता है, जिसमें सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। समय पर टैक्स फाइल करने के कई लाभ हैं। वहीं आईटीआर-दो फाइल करने आयकरदाताओं को भी इससे कई लाभ हैं।
डेटा एंट्री में मिलेगी मदद
सरकार ने एक्सेल यूटिलिटी में जो बदलाव किए हैं, उससे आयकरदाताओं को मैनुअल केलकुलेशन और डेटा एंट्री में काफी मदद मिलेगी। इससे टैक्स फाइल में गलत कम होने की संभावना होती है। ऐसे लोग अपना टैक्स फाइल करते समय गलत कर देते हैं लेकिन नए बदलाव से गलतियां नहीं के बराबर होंगी। 25 मार्च को आयकर विभाग ने यूटिलिटी एक्सेल बेस्ड वर्जन 1.11 जारी कर दिया है। यह नया वर्जन इसलिए जारी किया गया ताकि आयकरदाताओं को आईटीआर फाइलिंग में आसानी हो। अगर किसी कंपनी, बिजनेसमैन की सेलरी लिमिट से ज्यादा है तो उसे आईटीआर-दो फाइल करनी होगी। इसका प्रावधान इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत दिया गया है।
आईटीआर-दो दाखिल करने से लाभ
आईटीआर-दो दाखिल करने पर टीडीएस में कटने वाला पैसा रिफंड हो सकता है। इसके लिए आपको अपना खर्च दिखाना होगा। साधारण तौर पर ब्याज, कमीशन, सेलरी या फीस पर टीडीएस काटा जाता है। यदि आपको शेयर बाजार में पैसा डूबना, बिजनेस या प्रोपर्टी में घाटा हो तो आप आईटीआर जमा करवा करके टीडीएस रिफंड करवा सकते हैं। इस घाटे को आईटीआर दाखिल करके कम किया जा सकता है। इसके अलावा इस साल के नुकसान को दिखाकर अपने साल के मुनाफे में टैक्स कम करवा सकते हैं। आईटीआर एक तरह से आय के प्रूफ के रुप में काम करती है। जब आप किसी चीज के लिए ऋण लेते हैं तो आपकी आईटीआर एक आय का प्रूफ होती है, जिसकी बदौलत आपको ऋण मिल जाता है।