दिल्ली-अंबाला रेलवे मार्ग होगा फोरलेन, रेलगाड़ियों की बढ़ जाएगी संख्या

दिल्ली से अंबाला के बीच जो 193.6 किलोमीटर का रेलवे मार्ग है, उसको फोरलेन किया जाएगा। इससे रेलगाड़ियों की संख्या बढ़ेगी और समय की बचत होगी। इस रेलमार्ग पर काफी मात्रा में गाड़ियां चलती हैं, गाड़ियों के दबाव के कारण बीच में ही कई बार रेलगाड़ियां रोकनी पड़ती हैं, जिससे समय लग जाता है। कई बार तो यात्री गाड़ी को बीच में रोकने से वह देरी से चलती है और यात्रियों को परेशानी है। इस 193.6 किलोमीटर लंबर रेलमार्ग पर सात हजार 74 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसको मंजूरी मिल गई है।
दिल्ली से अंबाला रेलमार्ग द्वारा पूरे पंजाब और जम्मू की तरफ ट्रेन जाती हैं। इस रेलवे ट्रेक पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्री गाड़ियां और माल ढुलाई वाली रेलगाड़ियां चलती हैं। पंजाब में चल रहे उद्योगों के लिए कच्चा माल ढुलाई का कार्य रेलवे द्वारा किया जाता है। ऐसे में इस रेलवे मार्ग पर काफी दबाव बढ़ गया है। माल ढुलाई के लिए चलने वाली रेलगाड़ियों को कई बार दूसरी गाड़ियों आने-जाने के कारण बीच में रोकना पड़ता है। ऐसे में उद्योगों के लिए जा रहे सामान में देरी हो जाती है। इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा समेत देश के अन्य हिस्सों से काफी लोग पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर जाते रहते हैं। इसलिए इस मार्ग पर यात्रियों का दबाव भी ज्यादा रहता है। यहां पर यात्री गाड़ियों की संख्या भी बहुत अधिक है। गाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण इस रेलवे मार्ग पर दबाव बढ़ गया है। अब सिंगल ट्रेक से काम नहीं चल रहा। इसी कारण रेलवे ने इस मार्ग को फोरलेन बनाने का निर्णय लिया है ताकि रेलगाड़ियों को समय पर अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
रेलवे नेटवर्क का होगा विस्तार, यात्रियों को भी फायदा
इस रेलवे रुट को दिल्ली से अंबाला तक 193.6 किलोमीटर तक चार लाइन वाले कोरिडोर में अपग्रेड करने के निर्णय से यात्रियों को भी काफी लाभ होगा। इससे रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा और यात्री अपने निर्धारित स्थान पर समय पर पहुंच जाएंगे। इस परियोजना पर केंद्र सरकार सात हजार 74 करोड़ रुपये खर्च करेगी। फिलहाल यह केवल अनुमानित खर्च है, बाकी टेंडर छोड़ने के बाद ही सही राशि का पता चलेगा। फोरलेन ट्रेक बनने से ट्रेनों की स्पीड में बढ़ोतरी होगी तथा संचालन में भी सुधार होगा।