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बेनामी ऐक्ट लागू होने के बाद 900 संपत्तियां जब्त, कीमत 3,500 करोड़ से ज्यादा

नई दिल्ली,12 जनवरी (इ खबरटुडे)। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने कहा है कि इनकम टैक्स अथॉरिटीज ने फ्लैट्स, शॉप्स, ज्वैलरी और गाड़ियों समेत 900 बेनामी प्रॉपर्टीज को अटैच किया है। इन प्रॉपर्टीज की कीमत 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। बोर्ड ने एक बयान में कहा है कि उसने प्रोहिबिशन ऑफ बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शंस ऐक्ट के तहत ऐसी संपत्तियों को कब्जे में लेने के कदम तेज कर दिए हैं। यह ऐक्ट 1 नवंबर 2016 से प्रभावी हुआ है।

यह ऐक्ट चल या अचल संपत्तियों के प्रविजनल अटैचमेंट और बाद में जब्ती का रास्ता खोलता है। इस ऐक्ट के जरिए ऐसी संपत्ति के मालिक, बेनामीदार और बेनामी ट्रांजैक्शंस के लिए उकसाने वालों पर मुकदमे की इजाजत देता है। आरोप साबित होने पर 7 साल तक की कैद और प्रॉपर्टी की फेयर मार्केट वैल्यू का 25 पर्सेंट तक हिस्सा वसूलने का प्रावधान है।

डिपार्टमेंट ने मई 2017 में पूरे देश में अपने इन्वेस्टिगेशन डायरेक्टरेट्स के तहत 24 डेडिकेटेड बेनामी प्रोहिबिशन यूनिट्स (बीपीयू) तैयार किए थे, ताकि बेनामी संपत्तियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा सके। बयान में कहा गया है, ‘डिपार्टमेंट की कोशिशों के चलते 900 से ज्यादा मामलों में इस ऐक्ट के तहत प्रविजनल अटैचमेंट किए गए हैं। इनमें प्लॉट, फ्लैट, शॉप, जूलरी, वीइकल, बैंक अकाउंट्स में डिपॉजिट्स, फिक्स्ड डिपॉजिट्स आदि शामिल हैं।’ अटैच की गई इन प्रॉपर्टी की वैल्यू 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इनमें 2,900 करोड़ रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति है।

बेनामी का शाब्दिक अर्थ है बिना नाम वाला। ऐसी कोई भी संपत्ति जिसका कोई वैध मालिक न हो या जिसपर संदिग्ध मालिकाना हक हो, उसे बेनामी कहा जाता है। मूल बेनामी ऐक्ट को 1988 में पेश किया गया था ताकि ब्लैक मनी को रोका जा सके। इसे 2016 में संशोधित किया गया। इसमें बेनामी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार दिया गया।

एक मामले में यह स्थापित हो गया है कि एक रियल इस्टेट कंपनी ने करीब 50 एकड़ जमीन खरीदी, इसकी वैल्यू 110 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस खरीदारी को बेनामीदारों के तौर पर कुछ लोगों के नाम पर किया गया जिनके पास इसे खरीदने की हैसियत नहीं थी। बयान में इस रियल्टी कंपनी का नाम नहीं बताया गया है। इस बात की पुष्टि सेलर्स और सौदे में शामिल ब्रोकरों ने भी की थी।

एक अन्य मामले में नोटबंदी के बाद दो असेसी ने बंद हो चुकी करंसी कई बैंक खातों में जमा की थी। इस रकम को इन लोगों ने अपने कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम से जमा किया और बाद में यह पैसा उनके खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस जरिए से लाभार्थी ओनर्स के खातों में करीब 39 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की कोशिश हुई। एक अन्य मामले में 1.11 करोड़ रुपये की कैश रकम को एक गाड़ी से पकड़ा गया।

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