इटली-स्पेन और इंग्लैंड के 3 विदेशी जोड़ों का वैदिक विवाह ,हिंदू रीति-रिवाज से लिए 7 फेरे
उज्जैन,23 अगस्त(इ खबर टुडे) । शनिवार को शहर से 12 किलोमीटर दूर इंदौर रोड स्थित निनोरा के आनंद वैलनेस रिट्रीट पार्क में योग गुरु डॉ. ओमानंद महाराज के पावन सानिध्य में इटली, स्पेन और इंग्लैंड के 3 विदेशी जोड़ों ने सनातन परंपरा अपनाकर अग्नि के सामने फेरे लेते हुए वैदिक रीति-रिवाज से शादी रचाई है। शादी से पूर्व तीनों ही जोडों का नामकरण संस्कार भी किया गया है। देर रात तक विवाह आयोजन संपन्न हुआ।
धार्मिक नगरी उज्जैन में अनोखा विवाह समारोह काफी सुर्खियों में बना हुआ है। यहां सात समंदर पार से आए तीन विदेशी जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और विवाह के पवित्र बंधन में बंधे। शादी समारोह की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार हुई पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी और मेहंदी लगाई गई, फिर धूमधाम से बारात निकाली गई और अंत में वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ।विवाह समारोह के दौरान विदेशी दूल्हा-दुल्हन और उनके साथ आए बारात के अन्य मेहमान भारतीय परिधानों में नजर आए। हल्दी और मेहंदी की रस्मों के दौरान सभी विदेशी मेहमान भारतीय भजनों और गानों की धुन पर जमकर झूमते दिखे।

डॉ. ओमानंद गुरु ने बताया कि योग और अध्यात्म के कारण विदेशों में भी उनके कई शिष्य हैं। वे समय-समय पर अपने शिष्यों को भारतीय संस्कृति और अटूट विवाह बंधन के महत्व के बारे में बताते रहते हैं। उनकी इसी सीख से प्रभावित होकर इटली, स्पेन और इंग्लैंड के तीन विदेशी जोड़ों ने सनातन धर्म अपनाकर परिणय सूत्र में बंधने की इच्छा जताई थी। वैदिक विवाह से पूर्व सभी तीन जोड़ों का नामकरण कर उन्हें भारतीय सनातन नाम दिए गए। पहला जोड़ा इटली के ईवा को ‘दर्पण आनंद’ और मास्सिमिलियानो को ‘बलराम आनंद’ नाम दिया गया। दूसरा जोड़े में इटली के जेसिका को ‘मां सीता आनंद’ और लुका को ‘राम आनंद’ नाम दिया गया। तीसरा जोड़ा स्पेन व इंग्लैंड का था जिसमें स्पेन की इन्मा को ‘मां शांति आनंद’ और इंग्लैंड के मार्क को ‘प्रकाशानंद’ नाम दिया गया। इससे पूर्व वर्ष 2024 में भी डॉ. ओमानंद महाराज के परमानंद योग आश्रम में इटली, अमेरिका और पेरू के तीन जोड़ों ने सनातन परंपरा से विवाह रचाया था।
डॉ. ओमानंद गुरु ने बताया कि पश्चिमी देशों में शादी को महज एक ‘लीगल कॉन्ट्रैक्ट’ (कानूनी अनुबंध) माना जाता है, जिसे लोग आसानी से तोड़ देते हैं। इसके विपरीत भारत में विवाह केवल दो शरीरों का नहीं, बल्कि आत्मा का संबंध माना जाता है, जिसे जीवन भर निभाया जाता है। भारतीय संस्कृति की इसी विशेषता ने विदेशियों को गहराई से प्रभावित किया।

