सिंहस्थ -28 में शिप्रा होगी प्रवाहमान,होगा जल में स्नान,सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी
उज्जैन,22 अक्टूबर(इ खबर टुडे) । 1992 के सिंहस्थ से बिगडी स्थिति सिंहस्थ 2028 में सुधरने जा रही है। इस बार शिप्रा नदी के जल से ही सिंहस्थ के स्नान होंगे। प्रत्येक 12 वर्षों में आयोजित होने वाले हर सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं की कामना रहती थी कि वे शिप्रा के जल से ही स्नान करें। वर्ष 2016 तक आयोजित हुए सभी सिंहस्थ में गर्मी के कारण पानी की कमी को देखते हुए कभी गंभीर नदी का, तो कभी नर्मदा नदी का पानी शिप्रा नदी में छोड़कर स्नान करवाया जाता रहा है।
सिंहस्थ-2028 में साधु-संतों और श्रद्धालुओं को शिप्रा के ही पवित्र जल से स्नान करवाने का प्रदेश सरकार का संकल्प साकार होने वाला है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने 600 करोड़ रुपये की लागत से सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट बनाया है। इस प्रोजेक्ट का 84 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। पंपिंग स्टेशन एवं बैलेंसिंग रिजर्वायर का कार्य तेजी से हो रहा है।
सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी योजना एक नई सोच है, जिसे इंजीनियरों ने जमीन पर उतारा है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि इस योजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी ग्राम में एक बैराज का निर्माण किया गया है। इस बैराज की क्षमता 1.45 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। बारिश के दौरान इसके गेट बंद कर इस बैराज को भरा जाएगा। इसमें एकत्रित पानी को 1,350 किलोवाट की चार मोटरों के माध्यम से 6.5 किलोमीटर तक पंप करके सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा।
सिलारखेड़ी तालाब का स्वरूप बड़ा कर दिया गया है। इस तालाब के आसपास की शासकीय जमीन का उपयोग करते हुए मात्र 35 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया है। यहां 250 हेक्टेयर क्षेत्र में बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाया जा रहा है। इस रिजर्वायर में 51 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी एकत्रित होगा।
गंभीर डेम की 2,200 एमसीएफटी क्षमता की तुलना में इस रिजर्वायर में लगभग 1,800 एमसीएफटी पानी एकत्रित किया जा सकेगा। तालाब के चारों ओर 6.5 किलोमीटर लंबा मिट्टी का बंड (पाल) बनाया गया है। पाल की ऊंचाई सतह से 20 मीटर है। बारिश के दौरान शिप्रा का 1.45 एमसीएम पानी प्रतिदिन पंप करके यहां लाया जाएगा और रिजर्वायर को उसकी पूरी क्षमता यानी 51 एमसीएम तक भर लिया जाएगा।
सिलारखेड़ी रिजर्वायर में एकत्रित 51 एमसीएम (लगभग 1,800 एमसीएफटी) पानी को बिना किसी पंपिंग के, ग्रेविटी के माध्यम से 5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए कुंवारिया गांव के पास शिप्रा नदी में छोड़ दिया जाएगा। कुंवारिया गांव, किठोदा बैराज के ठीक ऊपर स्थित है।यहां से आने वाला पानी शनि मंदिर, गऊघाट होते हुए रामघाट, मंगलनाथ और सिद्धनाथ तक पहुंचेगा। इस तरह सिलारखेड़ी रिजर्वायर में एकत्रित पानी को नौ महीने तक शिप्रा नदी में धीरे-धीरे प्रवाहित किया जा सकेगा।

