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 राजसी ठाठ-बाट से निकाली गई माता उमा की सवारी,नगर भ्रमण के साथ पहुंची रामघाट

 पालकी में सवार आगे माता उमा, पीछे बैल पर सवार भगवान श्री महेश
 
 *** शिप्रा तट रामघाट पर उमा- सांझी महोत्सव
 *** संजा विसर्जन और  पूजन भी हुआ 

 

उज्जैन,12 अक्टूबर(इ खबर टुडे)। सोमवार को उमा –सांझी महोत्सव के अंतर्गत साल में एक बार निकलने वाली माता उमा की सवारी राजसी ठाठ-बाट से निकाली गई। रजत पालकी में सवार होकर माता उमा आगे –आगे चली और उनके पीछे बैल पर सवार होकर भगवान श्री महाकाल महेश स्वरूप में चले। नगर भ्रमण के उपरांत सवारी परंपरागत मार्ग से रामघाट पहुंची। यहां महोत्सव अंतर्गत जवारे व संजा विसर्जन एवं पूजन किया गया। यहां से माता की सवारी पुरातन परंपरा मार्ग से वापस मंदिर पहुंची।

मंदिर समिति के सहायक प्रशासक एवं जनसंपर्क अधिकारी आशीष फलवाडिया के अनुसार  श्री महाकालेश्वर मंदिर में 06 से 12 अक्‍टूबर  तक चले उमा सॉझी महोत्सव में वर्ष में एक बार निकलने वाली श्री उमा माता जी की सवारी अपरांह् 04:00 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से राजसी थाठ-बाट से निकाली गयी।

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पांच दिवसीय महोत्सव

पंच दिवसीय उमा साँझी महोत्सव के पश्चात अश्विन शुक्ल द्वितीया (चन्द्र दर्शन) को परम्परानुसार उमामाता जी की सवारी सोमवार को नगर भ्रमण पर निकली। सवारी के पूर्व सभा मण्डप में पूजन पश्चात श्री उमा माता की पालकी को नगर भ्रमण की ओर रवाना किया।

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सशस्‍त्र जवानों ने दी सलामी

 पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा श्री उमा माता को सलामी देने के बाद पालकी ने नगर भ्रमण की ओर प्रस्‍थान किया। पालकी में विराजित भगवान श्री उमा माता के दशर्न लाभ सवारी मार्ग के दोनों ओर खडे श्रद्धालुओं ने लिया। पालकी में श्री उमा माता की रजत की प्रतिमा, व डोल रथ पर गरूड पर माताजी (पीतल की प्रतिमा) तथा भगवान श्री महेश विराजित होकर निकले।

ये रहा परंपरागत मार्ग

सवारी श्री महाकालेश्‍वर मंदिर से प्रारंभ होकर श्री महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नईसड़क, कंठाल, सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार, कार्तिक चौक एवं मोढ़ की धर्मशाला, रामानुज कोट होते हुए क्षिप्रा तट पर पहुची । यहाँ जवारे व संजा विसर्जन एवं पूजन के पश्चात् सवारी कहारवाड़ी, बक्षी बाजार एवं महाकाल रोड़ होते हुए श्री श्री महाकालेश्वर मन्दिर वापस आयी ।