शनि जयंती पर नवगृह शनि मंदिर पर मिनी सिंहस्थ का नजारा बना, त्रिवेणी संगम में संयोग का स्नान,शनि देव के साथ नवग्रह दर्शन
उज्जैन, 16 मई (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। शनि जयंती के साथ शनिश्चरी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम स्थित नवगृह शनि मंदिर पर श्रद्धा एवं आस्था का मिनी सिंहस्थ का नजारा देखा गया है। जमकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने संगम में नर्मदा के जल से फव्वारा स्नान किया और उसके उपरांत पुराने वस्त्रों एवं जूतों का त्याग करते हुए नये वस्त्र धारण कर भगवान शनि देव के साथ नवगृहों का दर्शन पूजन किया है। श्रद्धालुओं ने जमकर शनि देव को तेल एवं काले तिल अर्पित किए हैं।
त्रिवेणी संगम पर 13 साल बाद शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या के दुर्लभ महासंयोग में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। तडके से ही शिप्रा घाटों पर स्नान के बाद भक्तों ने यहां स्नान ,दान किया और न्याय के देवता शनिदेव के दर्शन के साथ जयकारा लगाया।संयोग के तहत मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए थे। देर शाम को यहां महाआरती एवं भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
पंचामृत अभिषेक किया गया
मंदिर के पट खुलते ही तड़के विशेष पूजन, पंचामृत अभिषेक और दर्शन का क्रम शुरू हुआ। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने पहले शिप्रा नदी में स्नान किया और फिर कतारों में लगकर भगवान शनिदेव के दर्शन किए। स्नान के बाद मान्यता अनुसार छोडे गए पुराने वस्त्रों को नगर निगम ने तत्काल सफाई करते हुए उठवाया है।
साजसज्जा की विशेष छटा देखी गई
दुर्लभ संयोग को देखते हुए मंदिर परिसर में आकर्षक पुषप और विद्युत सज्जा की गई थी। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं जुटाई गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करते हुए पुलिस जवानों एवं अधिकारियों को तैनात किया गया था।
नर्मदा जल से फव्वारा स्नान की व्यवस्था
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के चलते शिप्रा नदी पर घाट निर्माण किये जा रहे हैं। इसके कारण से यहां जलस्तर में कमी के कारण प्रशासन ने नर्मदा जल से फव्वारा स्नान की विशेष व्यवस्था की। श्रद्धालु फव्वारों के नीचे स्नान कर भगवान शनिदेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।
इस विशेष दिन पर 24 घंटे तक तेल अर्पण का क्रम जारी रहेगा। मंदिर के महंत राकेश बैरागी ने बताया कि मान्यता है कि इस दिन शनिदेव को तेल, काला तिल, नारियल और काले वस्त्र अर्पित करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमडा सैलाब
विशेष संयोग के साथ ही अवकाश की स्थितियों के चलते शनिवार को भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में जमकर श्रद्धालु उमडे थे। मंदिर के बेरिकेडस पूरी तरह से भरे रहे। सुबह से लेकर देर शाम तक करीब ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंचे थे। त्रिवेणी संगम नवग्रह शनि मंदिर के दर्शन पूजन के उपरांत भी बडी संख्या में श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और यहां भगवान का दर्शन किया।

