सांदीपनि अलंकरण समारोह में 580 करोड रुपए अधिक के विभिन्न विकास कार्यों की मुख्यमंत्री ने दी सौगात
उज्जैन,29 जुलाई (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि गुरु की महिमा का भारतीय सनातन संस्कृति में काफी महत्व है। माता–पिता एवं गुरु के ऋण से कभी कोई उऋण नहीं हो सकता। भगवान श्री कृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा ग्रहण की। महर्षि सांदीपनि के आश्रम से शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने 18 अध्याय में जीवन का सार निकालकर देश-दुनिया को गीता का महान ज्ञान दिया है। इससे हमारा जीवन धन्य हो रहा है। उज्जयिनी ज्ञान, विज्ञान और इतिहास की धरती है। यह बात गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन के लगभग 34 करोड़ रुपए की लागत से बने नव निर्मित पहले गीता भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव, महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व एवं सांदीपनि अलंकरण समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्ज्ति लगभग 5.1 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्मित गीता भवन में 1250 लोगों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, ग्रीन रूम, मल्टीपरपज़ हॉल, प्रशासनिक कक्ष तथा चार अतिरिक्त कक्ष निर्मित किए गए हैं। यह भवन धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उपयोगी होगा।
580 करोड की सौगात
34 करोड के नव निर्मित गीता भवन के शुभारंभ के साथ उन्होंने 78.75 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के मुख्य परिसर निर्माण कार्य , 12.70 करोड़ रुपये की लागत से शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय परिसर तथा उज्जैन शहर के वार्ड क्रमांक 40 एवं 48 में तीन नवीन पुस्तकालय भवनों के निर्माण कार्य, 453.40 करोड़ रुपये की लागत से श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर एवं महर्षि सांदीपनि आश्रम के विकास एवं विस्तार परियोजना का भूमिपूजन एवं 7.53 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन के नवीन प्रयोगशाला भवन एवं बैरियर-फ्री अधोसंरचना का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर नवनिर्मित गीता भवन में श्री कृष्ण की 64 कलाओं पर आधारित आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक प्रदशर्ननी भी लगाई गई जिसका बड़ी संख्या में उपस्थितजनों ने अवलोकन किया ।
कक्षा 9-12 तक एआई शिक्षा का शुभारंभ
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वांग एवं श्री कृष्ण विद्यांजली पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने प्रदेश के 08 जिलों के कक्षा 9वीं से 12 तक के 500 शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को एआई आधारित अध्यापन प्रदान करने की योजना बुनियाद मिशन का शुभारंभ रिमोट के माध्यम से किया। मुख्यमंत्री ने लगातार 03 वर्षों तक बोर्ड परीक्षा शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले प्राचार्यों, प्राध्यापकगणों और शिक्षकगणों तथा मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा प्रतीक स्वरूप 10 नव नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए।
संतों का सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंचासीन संत सर्वश्री रामेश्वर दास जी, दिग्विजय दास जी, विद्या भारती जी, नरेन्द्र दास जी, राकेश दास जी, अनुपम दास जी एवं अन्य संतगणों का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान भी किया।
शत प्रतिशत परिणाम पर मिलेगा ईनाम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा के गुणात्मक सुधार एवं शिक्षा सुविधाओं के विकास एवं विस्तार के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। वहीं स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती की गई है। जिसमें से 1 हजार शिक्षकों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि लगातार 03 साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाली संस्थाओं के प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों को 01 लाख रुपए का व्यक्तिगत और संबंधित शाला/संस्था को विकास के लिए 05 लाख रुपए की राशि का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर प्रदेश में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिल रही है। प्रदेश में 25 हजार करोड़ से अधिक की राशि से सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण हो रहा है।
मिशन बुनियाद का शुभारंभ
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "मिशन बुनियाद" का शुभारंभ किया। साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग में चयनित 7,500 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत प्रतीकात्मक रूप से 10 नवनियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
मंदसौर के कार्यक्रम को वीसी से संबोधित किया
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री मंदसौर के कृषि उपज मंडी में आयोजित कार्यक्रम में वीसी के माध्यम से सम्मिलित हुए । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव उच्च स्थान दिया गया है, गुरु की महिमा अपार है गुरुओं के प्रति हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे। भारत में गुरुओं की गौरवशाली परंपरा रही है आदि शंकराचार्य जी, वेदव्यास जी जैसे गुरुओं के माध्यम से हमारी संस्कृति में शिक्षा के साथ-साथ प्रेम भक्ति दया करुणा अनुशासन आदि संस्कार पुष्पित पल्लवित हुए हैं गुरु की गादी से ही चरित्र निर्माण होता है। अपने उद्बोधन में मंदसौर कार्यक्रम में उपस्थित गुरु पंडित श्री भीमाशंकर शास्त्री जी के गौ संरक्षण कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए उनके संकल्प हेतु बधाई दी।
महर्षि चरणों में पुस्तक अर्पित की
इससे पूर्व गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने उज्जैन के गुरू सांदिपनी आश्रम में पूजन अर्चन किया और अपनी स्वरचित पुस्तक महर्षि सांदिपनी के श्री चरणों में अर्पित की । मुख्य मंत्री ने इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम अत्यंत गौरवशाली और अद्वितीय अतीत समेटे हुए है। लगभग 5100 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसी पावन स्थल पर महर्षि सांदीपनि से विद्या ग्रहण की थी और यहीं से शिक्षा प्राप्त कर वे जगद्गुरु की उपाधि से विभूषित हुए। उन्होंने कहा कि आज गुरुपुर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरुओं का सम्मान कर अपने जीवन को धन्य करें।
पूजा-अर्चना पंडित कीर्ति रूपम व्यास एवं राहुल व्यास ने संपन्न कराई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक 'महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी' की प्रति महर्षि सांदीपनि जी की प्रतिमा के समक्ष अर्पित की पूजा के उपरांत उन्होंने आश्रम परिसर में स्थित अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव और श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। आश्रम के मुख्य पुजारी परिवार द्वारा मुख्यमंत्री का दुपट्टा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत-सम्मान किया गया। महर्षि सांदीपनि व्यास के वंशज एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पं. कीर्ति रुपम व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में प्रतिवर्षानुसार विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रात:काल भगवान श्री कृष्ण, भगवान श्री बलराम और गुरु सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। परंपरा अनुसार, प्रथम बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले छोटे बच्चों द्वारा 'स्लेट पूजन' का आयोजन भी इस दिन हुआ।
मुख्यमंत्री उज्जैन स्थित वृंदावन पूरा में संत शिरोमणि रविदास महाराज की चरण पादुका और गुरु गादी स्थल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया एवं श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई। राज्य के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास जी महाराज के इस चरण पादुका एवं गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही आवश्यक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।

