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 रतलाम के साडी व्यवसाय को अतीत का गौरव लौटाने में जुटे है युवा उद्यमी यशराज सिंह

 
 

रतलाम,13  जनवरी (इ खबरटुडे)। रियासतकाल में रतलाम के साडी व्यवसाय को देशभर में प्रतिष्ठा प्राप्त थी,जो धीरे धीरे समय के साथ कम होती जा रही थी। रतलाम के युुवा उद्यमी यशराज सिंह राठौड साडी व्यवसाय की उसी पुरानी प्रतिष्ठा को वापस लाने में जुटे है। रतलाम में अपना फैशन ब्रान्ड स्थापित कर भारत के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तकला से निर्मित साडियों का निर्माण कर रहे यशराज को विगत दिनों भोपाल में आयोजित एमपी स्टार्ट अप समिट 2026 में भाग लेने का मौका मिला,जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने उनके काम की जमकर सराहना की।
 

एमपी स्टार्टअप समिट 11–12 जनवरी 2026 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित की गई थी। यह समिट किसी एक उद्योग तक सीमित न होकर सभी सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज़ को एक साझा मंच प्रदान करती है, जहाँ उद्यमिता, नवाचार और नीति पर सार्थक संवाद होता है। एक उद्यमी के रूप में ऐसे मंच पर उपस्थित होना केवल नेटवर्किंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह समझने का अवसर भी देता है कि राज्य और देश में उद्यमिता किस दिशा में आगे बढ़ रही है। समिट के दौरान विभिन्न सेशन्स, प्रदर्शनी और संवादों के माध्यम से उन्हें  यह स्पष्ट महसूस हुआ कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए एक मजबूत और सहयोगी इकोसिस्टम की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

यशराज सिंह ने एमपी स्टार्टअप समिट के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि  Startup MP Summit 2026 ने उन्हें  यह एहसास दिलाया कि उद्यमिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सोच, धैर्य और सतत प्रयास की प्रक्रिया है। यह समिट मेरे लिए सीख, संवाद और आत्ममंथन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही, जो आगे की यात्रा के लिए नई ऊर्जा और दिशा देती है। यशराज सिंह राठौर ने बताया कि वे  अपने शहर रतलाम में पारंपरिक हथकरघा और साड़ी ट्रेडिंग की संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए समर्पित है । उनकी यह  यात्रा साधारण नहीं रही है, बल्कि एक रोमांचक सफर रहा है जो कई मोड़ों से गुज़रा है।

यशराजसिंह  ने बताया उन्होंने  अपना फैशन टेक्नोलॉजी का बैचलर्स निफ्ट चेन्नई से किया, जहाँ  उन्होंने कपड़े बनाने की तकनीक और फैशन उद्योग का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद  उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्पेन के IE बिज़नेस स्कूल, मैड्रिड से एमबीए किया, जहाँ उन्हें बड़े-बड़े ब्रांड्स के साथ काम करने का और प्रोजेक्ट्स लीड करने का मौक़ा मिला। इसी दौरान उन्हें मैड्रिड फैशन वीक में भाग लेने का अवसर मिला और साथ ही मिलान फैशन वीक को अटेंड करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। इस अनुभव ने उन्हें  सिर्फ व्यवसाय की बारीकियाँ ही नहीं सिखाईं, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण दिया कि कैसे फैशन के दुनिया में कुछ अलग किया जा सकता है।

 यशराज ने  बताया कि मैड्रिड और मिलान जैसे अंतर्राष्ट्रीय फैशन प्लेटफॉर्म्स पर मैंने यह भी देखा कि किस तरह वैश्विक ब्रांड्स भारत की कला, हथकरघा और परंपरागत डिज़ाइनों से प्रेरणा लेकर अपने उत्पाद बनाते और उन्हें दुनिया भर में प्रस्तुत करते हैं। यही अनुभव मेरे लिए अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक बड़ा कारण बना।

विदेश में अनुभव लेने के बाद मैंने निर्णय लिया कि मुझे अपने जड़ों की ओर लौटना है। रतलाम लौटने का मेरा कारण यही था कि मैं अपने शहर की पारंपरिक साड़ी ट्रेडिंग की खोई हुई विरासत को फिर से ज़िंदा करूँ। रतलाम जो सोना और साड़ियों के लिए कभी मशहूर था, आज वहाँ की ट्रेडिंग संस्कृति कहीं खो गई थी। मैंने सोचा कि क्यों न इस शहर को दुबारा उस पहचान से जोड़ा जाए और एक ऐसा क्लस्टर बनाया जाए जहाँ भारत की हर तरह की बुनाई और साड़ियों को एक छत के नीचे लाया जाए।

इसी उद्देश्य के साथ मैंने ‘जस्ट अनदर डिजाइन हाउस’ की स्थापना की, जो न केवल रतलाम की पहचान को नए आयाम देता है, बल्कि हथकरघा उद्योग और परंपरागत कारिगरों को भी एक मंच प्रदान करता है। इसी क्रम में, पहले रिसर्च के काम को करने और डिजाइन कलेक्शन बनाने में लगभग 6 महीने का समय लगा, उसके बाद मैन्युफैक्चरिंग की प्रक्रिया पूरी कर अगले 6 महीनों में ब्रांड को स्थापित किया गया। इसी क्रम में, वर्तमान में हमने महेश्वर की रेहवा सोसाइटी और Women Weave के साथ टाई-अप कर के अपनी साड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग करवाई है। मेरा सपना है कि रतलाम दुबारा से साड़ियों के अपने खोए हुए गौरव को पाए और दुनिया भर में हमारे पारंपरिक बुनकरों का हुनर पहचाना जाए।

और इसी के साथ मैंने रतलाम के महलवाड़ा गेट के ऊपर ‘JADH’ का एक रिटेल स्टोर भी खोला है, ताकि ये ब्रांड अपने शहर की धरोहर से गहराई से जुड़ा रहे और हम अपने “जड़ों” की ओर वासप लौटकर इसे एक नया जीवन दे सकें।