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खदानों को निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का खनिज विभाग के बाहर धरना-प्रदर्शन
 

 खदान मालिकों और खनिज विभाग पर सांठगांठ तथा लेन-देन के गंभीर आरोप
 
 खनन व ब्लास्टिंग से 50 लाख के पौधे नष्ट, तालाब व कंटूर-ट्रेंच संरक्षण तकनीक बर्बाद

 

रतलाम, 18 अगस्त (इ खबर टुडे)। रतलाम स्थित खनिज विभाग कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब नौगांवा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने खनिज कार्यालय का घेराव कर दिया। ग्रामीण गांव में संचालित वैध व अवैध खदानों को तत्काल निरस्त करने और नई खदानों को अनुमति न देने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान संचालक शासन की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र में मियावाकी योजना के तहत 50 लाख रुपये की लागत से किया गया पौधरोपण खनन गतिविधियों के कारण पूरी तरह नष्ट हो गया है। इसके अलावा, भारी ब्लास्टिंग से तालाब संरक्षण की 50 लाख रुपये की कंटूर-ट्रेंच तकनीक बर्बाद हो चुकी है। खनन के कारण पशुओं की जान जा रही है और स्थानीय मंदिर को भी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर खदान मालिकों और खनिज विभाग अधिकारियों के बीच सांठगांठ व लेन-देन के गंभीर आरोप लगाए।

इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व में कलेक्टर व तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद वे खनिज विभाग पहुंचे। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत स्तर पर खदानों को बंद करने के पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए खनिज अधिकारी रीना पाठक से स्थल निरीक्षण कर खदानों को निरस्त करने की मांग की।

मामले पर खनिज अधिकारी रीना पाठक ने बताया कि खदानों की अनुमति पंचायत की स्वीकृति के बाद ही दी जाती है। उन्होंने पौधरोपण व अन्य नुकसान की जांच का आश्वासन देते हुए कहा कि दो दिनों के भीतर खनिज विभाग की टीम नौगांवा क्षेत्र का दौरा कर जांच करेगी। यदि ग्रामीणों के आरोप और तथ्य सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।