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 कांग्रेस  नेत्री यास्मीन शेरानी पर जानलेवा हमला करने के मामले में दो मुख्य आरोपियों को दस-दस  वर्ष का कठोर कारावास,दो आरोपी बरी

 दस वर्ष चली सुनवाई के बाद आया फैसला,तीसरे आरोपी को तीन वर्ष की सजा 
 

रतलाम,31 जुलाई (इ खबरटुडे)। करीब चौदह वर्ष पूर्व कांग्र्रेस नेत्री यास्मीन शैरानी पर फायर कर उनकी हत्या का प्रयास करने के बहुचर्चित मामले में आज जिला न्यायालय में प्रकरण के दो मुख्य आरोपियों को दस दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई,जबकि एक आरोपी को तीन वर्ष की सजा दी गई। मामले के दो अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।

अभियोजन से मिली जानकारी के मुताबिक तत्कालीन कांग्र्रेस पार्षद यास्मीन शैरानी पर विगत 27 सितम्बर 2014 पर नगर निगम से निकलते समय अज्ञात व्यक्ति ने पिस्टल से फायर करके उनकी हत्या का प्रयास किया था। इस मामले में पुलिस ने लम्बी जांच के बाद कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने श्रीमती शैरानी पर फायर करने वाले वैभव बैरागी,फायर के बाद वैभव को मोटर साइकिल से लेकर जाने वाले चन्दन शर्मा और हत्या के इस षडयंत्र में सहभागी रहे तरुण सांकला, अनुराग लोखण्डे और हरिओम मारु को गिरफ्तार कर इनके विरुद्ध जिला न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।

जिला न्यायालय के सप्तम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश राजेश नामदेव ने प्रकरण के विचारण के पश्चात हत्या के प्रयास के आरोपी वैभव बैरागी को दोषसिद्ध करार देते हुए उसे भादवि की धारा 307 में 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रु. के अर्थदण्ड और आर्म्स  एक्ट की धारा 27(1) में 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रु. के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर क्रमश: 6 माह और 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जबकि इस अपराध में सहयोगी रहे चन्दन शर्मा को भादवि की धारा 307 सहपठित 34 में 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10 हजार रु. अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसी प्रकार एक अन्य आरोपी तरुण सांकला को आर्म्स  एक्ट की धारा 25 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रु. अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई। अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मामले के अन्य दो आरोपियों अनुराग लोखण्डे और हरिओम मारु को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक सौरभ सक्सेना ने की थी। 

यह था मामला 

कांग्रेस नेत्री यास्मीन शैरानी पर 27 सितम्बर 2014 को दोपहर करीब 12.45 पर जब वे नगर निगम से बाहर निकल रही थी,तब मुंह पर कपडा बान्धे एक अज्ञात व्यक्ति ने पिस्टल से फायर किया था,जिससे श्रीमती शैरानी गंभीर रुप से घायल हो गई थी। श्रीमती शैरानी पर फायर करने के बाद आरोपी भाग कर निगम से बाहर निकला,जहां उसका दूसरा साथी मोटर साइकिल स्टार्ट करके उसका इंतजार कर रहा था। दोनो आरोपी मोटर साइकिल पर सवार होकर मौके से भाग गए।

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच प्रारंभ की। करीब ग्यारह माह तक चली लम्बी जांच के बाद पुलिस ने इस काण्ड का खुलासा करते हुए प्रकरण के चार आरोपियों को धर दबोचा था। पुलिस जांच में सामने आई कहानी के मुताबिक श्रीमती शैरानी पर वैभव बैरागी ने फायर किया था और उसका साथी चन्दन शर्मा उसे मोटर साइकिल पर लेकर मौके से भागा था।

घटनास्थल से भागने के बाद आरोपियों ने घटना में प्रयुक्त रिवाल्वर कस्तूरबा नगर रहवासी अनुराग लोखण्डे के पास छुपा दिया था,जिसे बाद में तरुण सांखला वहां से ले गया था। पुलिस ने इन चारो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था,जबकि घटना में सहयोग करने वाला पांचवा आरोपी हरिओम मारू बाद में पकडा गया था। पुलिस ने इन पांचों आरोपियों के विरुद्ध चालान पेश किया था। जिस पर आज इन आरोपियों को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।

प्रतिक्रिया में हुई हत्या,दस दिन रहा कर्फ्यू 

श्रीमती शैरानी पर हुए हमले की प्रतिक्रिया में शहर में जमकर उपद्रव हुआ था और इस घटना के कुछ ही देर बाद उपद्रवियों ने बस स्टैण्ड पर बजरंग दल के तत्कालीन जिला सहसंयोजक कपिल राठौड व उनके नौकर पुखराज की हत्या कर दी थी। इसके चलते शहर में दस दिनों तक कर्फ्यू  लगा रहा था।