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 रतलाम का चर्चित तिहरा हत्याकांड: तीन आरोपियों को 'तिहरा आजीवन कारावास', मुख्य आरोपी दिलीप देवल पहले ही पुलिस मुठभेड़ में ढेर

 

​रतलाम, 20जून (इ खबर टुडे)। थाना औद्योगिक क्षेत्र के राजीव नगर में वर्ष 2020 में छोटी दीपावली की रात हुए दिल दहला देने वाले तिहरे हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने मामले के तीन जीवित आरोपियों को दोषी करार देते हुए 'तिहरा आजीवन कारावास' और अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, घटना का मुख्य सूत्रधार और कुख्यात अपराधी दिलीप देवल पहले ही पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मारा जा चुका है। पुलिस ने इस मामले को 'जघन्य एवं सनसनीखेज' अपराध की श्रेणी में रखा था।

​अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 25 नवंबर 2020 (छोटी दीपावली) की रात राजीव नगर निवासी गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और पुत्री दिव्या की अज्ञात बदमाशों ने सिर में गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। मुख्य आरोपी दिलीप देवल ने जानबूझकर छोटी दीपावली का दिन चुना था ताकि पटाखों की आवाज में गोलियों की गूंज दब जाए और किसी को शक न हो। वारदात का मकसद केवल रुपयों और सोने-चांदी के जेवरातों की लूट था।

​किरायेदार नर्स ने खोला था राज
​घटना का खुलासा अगली सुबह (26 नवंबर) तब हुआ, जब मकान के नीचे रहने वाली किरायेदार नर्स ज्वेलिका को अपनी एक्टिवा स्कूटी गायब मिली। जब वह पूछने के लिए ऊपर मकान मालिक के कमरे में गई, तो वहां तीनों के खून से लथपथ शव पड़े थे। ज्वेलिका की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

​इन तीन दोषियों को मिली सजा
​अदालत ने तीन आरोपी अनुराग उर्फ बॉबी 33 वर्ष निवासी- विनोबा नगर रतलाम, ​गोलू उर्फ गौरव 29 वर्ष निवासी- रेलवे कॉलोनी रतलाम, ​लाला भाबोर 27 वर्ष निवासी- जिला दाहोद गुजरात को तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, वे 2 दिसंबर 2020 से ही जेल में बंद हैं। 

​मुख्य आरोपी एनकाउंटर में हुआ था ढेर
​जांच के दौरान जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी दिलीप देवल (निवासी दाहोद, गुजरात) को गिरफ्तार करने पहुंची, तो उसने पुलिस दल पर देसी पिस्तौल से फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दिलीप देवल मारा गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस एनकाउंटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि "ऐसे नरपिशाच को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं।"

​वैज्ञानिक और अकाट्य साक्ष्यों ने दिलाई सजा
​अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज और 33 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोषियों को सजा दिलाने में वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे बड़ा आधार ​डीएनए रिपोर्ट बने। आरोपियों के कपड़ों, चप्पलों और रुमाल पर तीनों मृतकों का डीएनए पाया गया। वहीं, लूटी गई स्कूटी के हैंडल पर आरोपी लाला का डीएनए मिला। फॉरेंसिक जांच में साबित हुआ कि मृतकों के शरीर और घटना स्थल से मिले कारतूस के खोखे उसी देसी पिस्तौल से चले थे, जो मुठभेड़ के बाद दिलीप देवल के पास और उसके घर से बरामद हुई थी। आरोपी वारदात के बाद मृतका की स्कूटी लेकर भागते हुए और उससे पहले नूरी गेस्ट हाउस जाते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए थे, जिससे उनकी पहचान पुख्ता हुई।

​पहले भी कर चुका था हत्या
पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि गुजरात के दाहोद में हत्या के मामले में जमानत पर छूटा दिलीप देवल रतलाम में फर्जी दस्तावेज बनाकर रह रहा था। उसने आरोपी अनुराग, हिम्मतसिंह और सुमितसिंह के साथ मिलकर इस घटना से पहले 18 मई 2020 को कस्तूरबा नगर में प्रेमकुवर सिसोदिया की भी लूट के इरादे से हत्या की थी।