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सिंहस्थ-2028 की तैयारियां संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप, उज्जैन में मेला भूमि विकसित की जाए : महंत रवींद्रपुरी

 

रतलाम, 17  जून(इ खबर टुडे)। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी जी महाराज ने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियां संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ रही हैं। क्षिप्रा नदी के शुद्धीकरण, घाट निर्माण तथा संतों की सुविधाओं को लेकर मध्यप्रदेश सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत आंनदगिरीजी महाराज ने महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह में भाग लेने के बाद होटल श्रीजी पेलेस में मीडिया से चर्चा में ये बाम कही।


प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि पिछले सिंहस्थ के दौरान क्षिप्रा शुद्धीकरण संत समाज का प्रमुख विषय था। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को हरिद्वार आमंत्रित कर संत समाज के साथ चर्चा की गई थी। मुख्यमंत्री ने तब जानकारी दी थी कि क्षिप्रा शुद्धीकरण के साथ नदी तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे शाही स्नान के दौरान श्रद्धालुओं और संतों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।


महंत रवींद्रपुरी ने कहा कि जहां भी कुंभ या सिंहस्थ आयोजित होता है, वहां की पवित्र नदी का विशेष महत्व रहता है। प्रयागराज में गंगा-संगम, हरिद्वार में गंगा तथा उज्जैन में क्षिप्रा नदी आस्था का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ में क्षिप्रा में नर्मदा का पानी लाकर शाही स्नान कराया गया था, जिस पर संत समाज ने अपनी नाराजगी भी व्यक्त की थी।

उन्होंने बताया कि संत समाज ने आगामी सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं तथा क्षिप्रा तट पर निर्मित नवीन घाटों का अवलोकन किया है। लगभग 30 किलोमीटर लंबी घाट श्रृंखला श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर अनेक विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां मोहन यादव जैसे मुख्यमंत्री हों, वहां असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।


महंत रवींद्रपुरी ने कहा कि प्रयागराज और हरिद्वार में स्थायी मेला भूमि विकसित की गई है, जबकि उज्जैन में भी ऐसी मेला भूमि की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे भविष्य के सिंहस्थ आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।


उन्होंने कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

राम मंदिर प्रकरण पर बोले
राम मंदिर में कथित चोरी के मामले से जुड़े प्रश्न पर महंत रवींद्रपुरी ने कहा कि मंदिर परिसर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन संतों का नाम इस मामले में लिया जा रहा है, वे लंबे समय से मंदिर से जुड़े हुए सम्मानित संत हैं और अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं।

उन्होंने कहा कि मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है तथा केवल किसी स्थान से धनराशि मिलने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह मंदिर से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।

लव जिहाद पर जताई चिंता
लव जिहाद से जुड़े प्रश्न पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने इसे गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार और नैतिक शिक्षा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में संगठित रूप से इस प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के आरोप सामने आते रहे हैं, जिनके प्रति विभिन्न सामाजिक और हिंदू संगठन जागरूकता का कार्य कर रहे हैं।

अवैध मजारों पर कार्रवाई की मांग
महंत रवींद्रपुरी ने कहा कि उत्तराखंड में प्रशासन द्वारा कई अवैध मजारों को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन सहित अन्य क्षेत्रों में भी यदि धार्मिक स्थलों के आसपास या मंदिर परिसरों में अवैध निर्माण पाए जाते हैं, तो नियमानुसार उनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप अवैध निमार्णों को हटाना आवश्यक है। अंत में उन्होंने कहा कि संत जन्म से नहीं बनते, बल्कि तप, त्याग, साधना और संस्कारों से संतत्व प्राप्त होता है। अनेक साधकों में से कुछ ही ऐसे होते हैं जो समाज के लिए आदर्श संत के रूप में प्रतिष्ठित हो पाते हैं।