स्पन्दन मंच की साहित्यिक संध्या में कविताओं के जरिए गूँजी 'माँ' की महिमा
रतलाम/उज्जैन, 11 मई (इ खबर टुडे)। मातृ दिवस के पावन अवसर पर रविवार, 10 मई को 'स्पन्दन मंच' द्वारा एक विशेष साहित्यिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों ने अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं के माध्यम से माँ के प्रति श्रद्धा और स्नेह व्यक्त किया।
कार्यक्रम का विधिवत आरंभ गुरुग्राम की प्रसिद्ध रचनाकार प्रीति अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत मधुर 'सरस्वती वंदना' से हुआ। इसके पश्चात साहित्यिक चर्चा और काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने देर शाम तक श्रोताओं को बांधे रखा।
रचनाओं में झलका माँ का वात्सल्य और सामाजिक सरोकार
साहित्यिक संध्या के दौरान विविध विधाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। नई दिल्ली की निशि अरोड़ा की रचना 'खट्टी मीठी स्मृतियों की यात्रा' ने सभी को पुरानी यादों में ले जाकर भावुक कर दिया। गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल की एक और रचना 'मुखर मौन' अपनी गहराई के कारण चर्चा का केंद्र बनी रही।
रतलाम की वैदेही कोठारी ने अपनी लघुकथा 'चिंतित माँ' के माध्यम से समाज में बेटियों पर बढ़ते अत्याचारों पर कड़ा प्रहार किया। कानपुर की मधु प्रधान के माँ पर केंद्रित दोहे बेहद प्रभावी रहे, वहीं इंदौर की शीला बड़ोदिया की रचना 'धरा सी माँ' की श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहना की।
विद्वानों का वैचारिक संगम
लखनऊ से डॉ. मधु पाठक मांझी, रायबरेली से कु. गरिमा सिंह और अलीगढ़ से डॉ. आभा माहेश्वरी ने अपनी विशिष्ट रचनाओं द्वारा मानव जीवन में माँ की अपरिहार्य महत्ता और उसके त्याग को रेखांकित किया।
कुशल संचालन और आभार
कार्यक्रम का सफल और ऊर्जावान संचालन उज्जैन के प्रशांत माहेश्वरी द्वारा किया गया। उन्होंने अपनी प्रभावी शैली से प्रत्येक रचनाकार की प्रस्तुति में चार चाँद लगा दिए। संध्या के समापन पर सभी अतिथियों और रचनाकारों का आभार व्यक्त किया गया और धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह गौरवपूर्ण साहित्यिक आयोजन आनंदपूर्वक संपन्न हुआ।

