रतलाम: सुराना के मेधावी छात्र राघव चौधरी ने बढ़ाया जिले का मान, INSPIRE-MANAK के तहत जापान तक तय किया सफर
रतलाम,8 अगस्त(इ खबर टुडे)। जिले के छोटे से गांव सुराना में रहने वाले कक्षा बारहवीं के प्रतिभावान छात्र राघव चौधरी ने अपनी वैज्ञानिक सोच और प्रतिभा के दम पर पूरे जिले और प्रदेश का नाम पुरे विश्व में रोशन किया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की प्रतिष्ठित INSPIRE-MANAK प्रतियोगिता के माध्यम से राघव ने न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनके बनाए हुए मॉडल को भारत के साथ साथ जापान में भी सराहा गया है।
अस्थमा मरीजों के लिए तैयार किया खास प्रोजेक्ट
स्कूल में अध्ययन के दौरान राघव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार करते हुए 'अडवांस इनहेलर ट्रैकिंग सिस्टम' (Advance Inhaler Tracking System) तैयार किया। अस्थमा पीड़ितों को आपातकालीन स्थिति में समय पर इनहेलर उपलब्ध कराने और उसकी लोकेशन ट्रैक करने की समस्या को हल करने के उद्देश्य से यह प्रोजेक्ट बनाया गया, जिसे विशेषज्ञों द्वारा काफी सराहा गया।

स्कूल से लेकर टोक्यो (जापान) तक का सफर
राघव की यह सफलता कई चरणों से होकर गुजरी। यह चयन प्रक्रिया बेहद कठिन थी। इस प्रतियोगिता में सबसे पहले स्कूल स्तर से सफर शुरू हुआ, जिसके बाद जिला और राज्य स्तर से होते हुए उनके प्रोजेक्ट का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ।
दिल्ली में राष्ट्रीय प्रदर्शन: नई दिल्ली में आयोजित 11वीं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता (NLEPC) 2024 में राघव ने अपने मॉडल का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
जापान यात्रा का गौरव: उनके प्रोजेक्ट की उत्कृष्टता को देखते हुए भारत और जापान सरकार के संयुक्त सकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम (SAKURA Science Exchange Program) के तहत उनका चयन जापान के टोक्यो शहर के लिए हुआ। उन्होंने वहां वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों से मिलने का अवसर प्राप्त किया। इस प्रोग्राम में पुरे देश के मात्र पचास छात्रों का चयन किया गया था जिनमे एक राघव थे।

वाणिज्य की पृष्ठभूमि और विज्ञानं की उपलब्धि
इ खबर टुडे से चर्चा के दौरान कक्षा बारहवीं के छात्र राघव ने बताया कि वे स्कुल में वाणिज्य संकाय से बारहवीं की परीक्षा देने वाले है और उनका लक्ष्य चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का है। वाणिज्य संकाय में अध्ययन की रूचि होने के बावजूद उन्हें विज्ञानं में भी भरी रूचि है। राघव ने बताया कि वे बचपन से ही रिमोट और सेंसर इत्यादि का अलग अलग ढंग से उपयोग करते रहे है और इसी रूचि के चलते उन्हें इनहेलर ट्रैकिंग सिस्टम बनाने का आइडिया आया था। उन्होंने बचपन में देखा था कि अस्थमा के मरीज इनहेलर के लिए किस तरह परेशान होते है। तभी उन्हें लगा था कि इसके बारे में कुछ करना चाहिए। राघव ने बताया कि वाणिज्य संकाय की पढाई के साथ साथ वे विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग भी करते रहना चाहते है।
पेटेंट भी कराएगी सरकार
राघव ने बताया कि उनके मॉडल को जापान में सराहे जाने के बाद भारत सरकार भी इस मॉडल को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाली है। विज्ञानं मंत्रालय के द्वारा इस मॉडल का पेटेंट कराने में भी सहयोग दिया जायेगा ताकि भविष्य में इस मॉडल का व्यावसायिक उत्पादन हो सके और यह अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगो तक पहुंच सके।
शिक्षकों और परिजनों का मिला सहयोग

राघव इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और अपने स्कूल के भौतिकी (Physics) शिक्षक शैलेंद्र पुरोहित के मार्गदर्शन को देते हैं, जिन्होंने प्रोजेक्ट निर्माण से लेकर हर कदम पर उनका भरपूर सहयोग किया।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहुंच बनाने वाले राघव चौधरी आज रतलाम जिले के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।

