डेढ़ करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में अन्य लोगो के साथ तत्कालीन उपपंजीयक भी बने आरोपी
रतलाम,20 फरवरी(इ खबर टुडे)। शहर के प्रतिष्ठित रेलवे एच एंड टी कांट्रेक्टर सुभाष जैन के साथ उन्ही के भतीजे और पार्टनर संजय जैन द्वारा की गई डेढ़ करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में जंहा पुलिस ने आरोपी संजय जैन के माता पिता को भी आरोपी बनाया है वही तत्कालीन उप पंजीयक प्रदीप निगम को भी सह आरोपी बनाया गया है। मामले की जाँच अभी जारी है और इस जालसाजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक वकील,सर्विस प्रोवाइडर और महाराष्ट्र बैंक के तत्कालीन मैनेजर पुलिस के रेडार पर है। जाँच में तथ्य आने पर पुलिस इन लोगो को भी सह अभियुक्त बनाएगी।
उल्लेखनीय है कि स्वस्तिक इंटरप्राइजेस और श्री इंटरप्राइजेस नामक फर्मो में पार्टनर रहे संजय जैन के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर स्टेशन रोड पुलिस ने विगत 14 अगस्त 2024 को दर्ज की गई थी। इस मामले की जाँच बेहद धीमी गति से चली और एफआईआर होने के करीब डेढ़ वर्ष बाद गुरुवार को पुलिस ने इस प्रकरण में संजय जैन की माता मनोरमा जैन और पिता मणिलाल जैन के साथ तत्कालीन उप पंजीयक प्रदीप निगम को सह अभियुक्त बनाया।
यह है पूरा मामला
एफआईआर कर्ता सुभाष जैन ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी संजय जैन ने उनकी फार्म में भागीदार रहते हुए उनके साथ करीब तीन करोड़ की धोखाधड़ी वर्ष 2012 में की थी। जिस पर से संजय जैन के खिलाफ उस वक्त भी धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच माननीय उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ के समक्ष एक समझौता हुआ था।
समझौते की शर्तों के अनुसार: संजय जैन को 1.90 करोड़ रुपये के भुगतान की सुरक्षा (Surety) के तौर पर अपनी माता मनोरमा जैन के नाम दर्ज मकान नंबर 40, जैन कॉलोनी का 'एग्रीमेंट टू सेल' सुभाष जैन के पक्ष में निष्पादित करना था। अनुबंध की शर्त थी कि जब तक भुगतान पूरा नहीं हो जाता, इस संपत्ति पर कोई नया चार्ज क्रिएट नहीं किया जाएगा और न ही इसे कहीं गिरवी रखा जाएगा।
सांठगाठ कर लोन लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बैंक अधिकारियों और उप-पंजीयक के साथ मिलीभगत की। आरोप है कि:
आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज:दिखाकर उक्त मकान को गिरवी रखकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र से अपनी फर्मों (स्वास्तिक इंटरप्राइजेज और श्री इंटरप्राइजेज) के लिए कुल 1.10 करोड़ रुपये का व्यावसायिक ऋण प्राप्त कर लिया।
इतना ही नहीं आरोपियों ने पंजीयक कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिली भगत कर प्रापर्टी इंडेक्स से उनकी जानकारी के बिना फर्जी तरीके से मकान को 'भारमुक्त' (Free from encumbrance) करवा लिया। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 1,68,12,774 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
जाँच जारी, कई आरोपी पुलिस के रेडार पर
धोखाधड़ी और जालसाजी के इस हाई प्रोफाइल मामले में अभी कई आरोपी पुलिस के रेडार पर है। आरोपी की फर्मो को लोन देने वाले महाराष्ट्र बैंक के तत्कालीन मैनेजर वसंत गागरे,रजिस्टर्ड अनुबंध को एक पक्षीय रूप से निरस्त करने की कार्यवाही करने में साथ देने वाले सर्चकर्ता वकील और सर्विस प्रोवाइडर के साथ महाराष्ट्र बैंक के लोन को ट्रांसफर करने वाले ए यू स्माल फाइनेंस बैंक के मैनेजर के सम्बन्ध में जाँच की जा रही है।
इनका कहना है
स्टेशन रोड पुलिस थाने के टीआई जीतेन्द्र पल सिंह जादोन का कहना है कि मामले की जाँच जारी है और इस जालसाजी में जिस जिस की भी हिस्सेदारी होने के तथ्य सामने आएंगे उन सभी को प्रकरण में आरोपी के रूप में जोड़ा जायेगा।

