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भाजपा नेता के बेटे की दादागिरी ,निगम द्वारा पकड़े गए आवारा पशुओ को  गाड़ी से उतारा ,सड़को पर फिर बना जान का खतरा 

 
 

रतलाम ,19 फरवरी (इ खबर टुडे )  शहर के कई क्षेत्रों में आवारा पशुओ  के झुंड एक बड़ी समस्या बनते जा रहे है। जिस पर निगम द्वारा समय समय पर कार्यवाही भी की जाती है लेकिन कई बार नेतागिरी और दादागिरी के चलते निगमकर्मी परेशान हो जाते है और अपना काम नहीं कर पाते है। 


जानकारी के अनुसार बुधवार को निगम को सुचना मिली थी कि गोशाला रोड पर आवारा पशुओ की सख्या ज्यादा हो गयी है जिसके चलते दुर्घटनाएं और वाहनों को नुकसान भी होता है जिसके बाद निगम कर्मी गुरुवार सुबह पशु वाहन लेकर आवारा पशुओ को पकड़ने निकले इस दौरान उन्होंने जान पर खेल कर कई लड़ाकू सांडो को पकड़ा तो भाजपा नेता मधु पटेल के बेटे गब्बू पटेल ने निगमकर्मी और दरोगा से दादागिरी कर सांडो को जबरन गाडी से निकाल दिया। वही अब सवाल उठता है कि इन छोड़े गये सांडो से यदि कोई घायल होता है तो इसकी जिम्मेदारी भाजपा नेता के बेटे की होगी ? पूर्व में आवारा पशुओ  में क्षेत्र के कई रहवासियों के वाहनों को भारी नुकसान हो चूका है। 


वही क्षेत्र में कई छोटे बच्चे गलियों में खेलते है जिन पर हर पल इन आवारा पशुओ से खतरा बना रहता है। निगम द्वारा कई बार पशुपालको को चेतावनी दी गई है की तबेले रहवासी क्षेत्रों से दूर रखे बावजूद पटेल कॉलोनी और गवली मोह्हले में कई तबेले आज भी अवैध रूप से मौजूद है। जहा गायो का दूध निकालने के बाद उन्हें सड़को पर खुला छोड़ दिया जाता है।  पूर्व में कार्यवाही के दौरान निगम कर्मचारियों की मुखबरि से पशु पालक अपने पशु को छुपा देते है निगम की गाड़ी जाने के बाद फिर खुला छोड़ देते है। 

जहा निगम की आय होती है वही कार्यवाही होती है 
कुछ माह पूर्व हाट रोड पर एक बड़े गोदाम में आग लगने की घटना के बाद निगम को आग बुझाने में काफी मेहनत करने पड़ी थी ,जिसके बाद निगम ने  फायर लारी के हिसाब से गोदाम संचालक को लाखो का बिल भेज दिया था जो निगम का खर्चा आग बुझाने में हुआ था ,तो क्या इन आवारा पशुओ से आमजनता के नुकसान का पैसा  "नगर निगम या भाजपा नेता " के लोग देंगे ? 

पुलिस के सहयोग का अभाव 
इस मामले में निगम आयुक्त अनिल भाना ने बताया कि निगम अपना काम करने को तैयार है लेकिन कार्यवाही दौरान गुंडे प्रवृति के लोगो से  निपटने के लिए पुलिस सहयोग काफी जरुरी है जो निगम को नहीं मिलता है जिसके चलते नेता नगरी और दादागिरी के चलते निगम को खाली हाथ लौटना पड़ता है।