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 स्पंदन मंच की आभासी साहित्यिक संध्या में देशभर के रचनाकारों ने बिखेरा साहित्यिक रंग

 
 

रतलाम, 11 जून(इ खबर टुडे)। साहित्यिक संस्था स्पंदन मंच के तत्वावधान में गत दिवस  एक भव्य आभासी साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से जुड़े साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुंबई की युवा साहित्यकार प्रियंका चौहान द्वारा सरस्वती वंदना की सुमधुर प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात रतलाम की लेखिका वैदेही कोठारी ने अपनी लघुकथा ‘रिश्तों की हरियाली’ प्रस्तुत कर पारिवारिक संबंधों की संवेदनशीलता को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। रतलाम की ही रश्मि पंडित ने अपनी कविता ‘आज फिर’ के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया।

दिल्ली की अलका गुप्ता की रचना ‘आप कितने दुरुस्त हो’ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। वहीं प्रियंका चौहान ने अपनी मार्मिक रचना ‘एक अधूरी स्त्री’ के जरिए समाज में अपनी पहचान के लिए संघर्षरत किन्नर समुदाय की पीड़ा और अंतर्व्यथा को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया।

स्पंदन मंच के संस्थापक एवं उज्जैन के साहित्यकार प्रशांत महेश्वरी ने अपनी रचना ‘बचपन के दिन’ के माध्यम से बचपन की मधुर स्मृतियों और बालमन की निर्मलता का सुंदर चित्रण किया। जालंधर की सीमा सिंह ने ‘शहीद’ रचना प्रस्तुत कर सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के त्याग और योगदान को रेखांकित किया।

दिल्ली की मनीला रोहतगी ने अपनी रचना ‘मैं कौन हूँ’ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेरठ की नीलमणि की लघुकथा ‘नमक’ भी अत्यंत प्रभावशाली रही। कानपुर की मधु प्रधान की रचना ‘अगर हो प्रेम का बंधन’ तथा लखनऊ की मधु पाठक ‘मांझी’ की कविता ‘उड़ान’ को भी खूब सराहना मिली।

कार्यक्रम में गाजियाबाद की वरिष्ठ साहित्यकार अंजूषा सिंह की उपस्थिति भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। अंत में मधु पाठक ‘मांझी’ ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन स्पंदन मंच के संस्थापक प्रशांत महेश्वरी ने किया।

आभासी साहित्यिक संध्या ने एक बार फिर सिद्ध किया कि साहित्य भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।