स्पंदन मंच द्वारा आभासी साहित्यिक संध्या का भव्य आयोजन
उज्जैन , 13अप्रैल (इ खबर टुडे)। साहित्यिक संस्था 'स्पंदन मंच' के तत्वावधान में 12 अप्रैल रविवार को एक ऑनलाइन साहित्यिक संध्या का सफल आयोजन किया गया। इस आभासी गोष्ठी में देश के विभिन्न शहरों से जुड़े रचनाकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक विसंगतियों को स्वर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कानपुर की मधु प्रधान द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
काव्य प्रस्तुतियों के मुख्य अंश
साहित्यिक सत्र में विभिन्न विधाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। इंदौर की सोनम उपाध्याय ने अपनी रचना 'वीर सैनिक कैसी होली मनाते होंगे' के माध्यम से सीमा पर तैनात प्रहरियों के त्याग और समर्पण को रेखांकित किया। दुर्ग (छत्तीसगढ़) की दीक्षा चौबे ने 'मत मारो मुझे कोख में' कविता का पाठ किया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर विषय पर उपस्थित सभी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
दिल्ली की निशि अरोड़ा ने 'ख़ामोशी बोलती है' कविता से गहरा प्रभाव छोड़ा, वहीं इंदौर की दिव्या भट्ट की मनोहारी प्रस्तुति 'सांझ' ने संध्या के सौंदर्य को शब्दों में पिरोया। गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत संस्मरण कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा। साथ ही, मधु प्रधान की रचना 'मुझे मेरा क़स्बा बहुत याद आता है' ने स्मृतियों के गलियारों की सैर कराई।
उज्जैन के प्रशांत ने अपनी रचना 'हे! सृजनसहधर्मिणी' के माध्यम से एक रचनाकार के जीवन में 'कलम' की महत्ता और उसके साथ के अटूट रिश्ते को खूबसूरती से दर्शाया।
कार्यक्रम के अंत में मंच की संयोजक सुश्री दिव्या भट्ट ने सभी सहभागी रचनाकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही यह गरिमामयी साहित्यिक आयोजन आनंदपूर्वक संपन्न हुआ।

