डोसी गांव फ्लैट बेदखली- कांग्रेस नेताओ ने नगर निगम पर लगाए गरीबो पर अत्याचार के गंभीर आरोप
रतलाम, 06 अगस्त (इ खबर टुडे)। डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैटों को लेकर नगर निगम और कांग्रेस के बीच विवाद गहरा गया है। शहर कांग्रेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता आयोजित कर नगर निगम पर गरीब परिवारों के साथ अमानवीय व्यवहार करने, वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन करने तथा धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतीलाल वर्मा और पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि नगर निगम ने वर्ष 2020-21 में शिवनगर, प्रकाश नगर और जावरा रोड झोपड़पट्टी में रहने वाले गरीब परिवारों को यह विश्वास दिलाकर उनके पुराने मकान खाली करवाए कि मात्र 20 हजार रुपये मार्जिन मनी जमा करने के बाद शेष लगभग 1.80 लाख रुपये का बैंक ऋण नगर निगम दिलवाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने आवंटन पत्र की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख किया था कि आवासीय ऋण 15 वर्षों में 180 मासिक किश्तों में उपलब्ध कराया जाएगा और बैंक तथा नगर निगम के बीच हुए अनुबंध का पालन हितग्राहियों को करना होगा। इसके बावजूद 396 में से केवल 166 हितग्राहियों को ऋण दिलाया गया, जबकि 208 परिवारों को ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया। इन परिवारों ने नगर निगम के निर्देश पर 20-20 हजार रुपये जमा कर दिए थे और उन्हें फ्लैट का आवंटन तथा कब्जा भी दे दिया गया था, जिनमें वे पिछले चार-पांच वर्षों से रह रहे थे।
सकलेचा ने कहा कि यदि अब नगर निगम यह तर्क दे रहा है कि संबंधित परिवारों का सिबिल (CIBIL) स्कोर कमजोर था, तो यह गरीब परिवारों की गलती नहीं है। पात्रता की जांच पहले की जानी चाहिए थी या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ऋण दिलाना संभव नहीं था, तो गरीबों से झुग्गियां क्यों तुड़वाई गईं और उन्हें बेघर करने की नौबत क्यों आई।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक के जोनल कार्यालय से विशेष अनुमति लेकर कमजोर सिबिल स्कोर वाले हितग्राहियों को ऋण दिलाने का प्रयास नहीं किया गया। नगर निगम ने अपनी वित्तीय क्षमता का उपयोग भी नहीं किया और न ही यह स्पष्ट किया कि स्थानीय बैंक शाखा ने शेष परिवारों के लिए जोनल कार्यालय को कोई अनुशंसा भेजी थी या नहीं।
नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 173, 174 और 175 का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि बेदखली की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है, लेकिन निगम ने अंतिम नोटिस के बाद 30 दिन का समय नहीं दिया, आवंटन निरस्तीकरण का विधिवत आदेश जारी नहीं किया और न ही कब्जा हटाने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया। इसके बावजूद 208 गरीब परिवारों का सामान बाहर फेंककर फ्लैटों पर ताले लगा दिए गए।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि जिन परिवारों के फ्लैट सील किए गए हैं, उनकी मार्जिन मनी की राशि आज भी बैंक और नगर निगम के पास जमा है। यदि आवंटन निरस्त किया गया था, तो जमा राशि वापस क्यों नहीं की गई? उनका कहना है कि 20 हजार रुपये जमा करने के बाद ही आवंटन और कब्जा दिया गया था, इसलिए बाद में उन्हें अतिक्रमणकारी बताना गलत है।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 4 अगस्त को प्रभावित फ्लैटधारी आयुक्त को आवेदन देने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे राशि जमा करने के लिए तैयार हैं और उन्हें ऋण दिलाया जाए, लेकिन आयुक्त ने आवेदन लेने से मना कर दिया, जिसके बाद आवेदन पंजीकृत डाक से भेजा गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने दलित और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को पहले वैध रूप से फ्लैट आवंटित किए और बाद में अंतिम सूचना पत्र में उन्हें बिना अनुमति अतिक्रमणकारी बता दिया। इसे कांग्रेस ने नगर निगम के षड्यंत्र का प्रतीक और गंभीर अपराध बताया है।
पारस सकलेचा और शांतीलाल वर्मा ने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक या प्रशासनिक जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए 208 परिवारों के घरों में प्रवेश कर सामान बाहर फेंकना और ताले लगाना भारतीय न्याय संहिता के तहत लोकसेवक द्वारा कानून की अवहेलना और अन्य संभावित दंडनीय अपराधों की श्रेणी में आता है।
डोसी फ्लैट विवाद में अब दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर नगर निगम इसे अवैध कब्जा हटाने और बकाया वसूली की कार्रवाई बता रहा है, वहीं कांग्रेस इसे गरीब परिवारों के साथ अन्याय और प्रशासनिक विफलता का मामला बताकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। प्रेस वार्ता में युवा नेता मयंक जाट समेत अन्य नेता भी उपस्थित थे। प्रेस वार्ता में युवा नेता मयंक जाट समेत अन्य नेता भी उपस्थित थे।

