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रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में 30 किलोवाट सौर ऊर्जा संयंत्र का सोलर कारपोर्ट के रूप में पुनर्स्थापन

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हरित उर्जा के क्षेत्र में रतलाम मंडल पर यह पहला अभिनव प्रयोग

 

रतलाम, 10 जुलाई(इ खबर टुडे ) । पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में स्थापित 30 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का पुनर्स्थापन कर उसे सोलर कारपोर्ट के रूप में विकसित किया है।

 इस परियोजना का लोकार्पण मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।  यह सौर ऊर्जा संयंत्र पहले विद्यालय भवन की छत पर स्थापित था।

 विद्यालय के नवीनीकरण एवं पुनर्विकास कार्य के कारण छत खाली करना आवश्यक होने से संयंत्र को हटाना पड़ा। ऐसे में रतलाम मंडल के विद्युत विभाग ने इसे हटाने के बजाय नए स्वरूप में विकसित करने का निर्णय लिया और संयंत्र को सोलर कारपोर्ट के रूप में पुनः स्थापित किया।

सोलर कारपोर्ट ऐसी संरचना होती है, जिसमें वाहन पार्किंग के ऊपर सौर पैनल लगाए जाते हैं। इससे एक ओर बिजली का उत्पादन होता है, वहीं दूसरी ओर वाहनों को छाया भी मिलती है। इस व्यवस्था से उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग हुआ है, पहले से स्थापित सौर संयंत्र का पुनः उपयोग संभव हुआ है तथा अतिरिक्त पार्किंग सुविधा भी विकसित हुई है।

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यह रतलाम मंडल की अपनी तरह की पहली (पायलट) परियोजना है। इस मॉडल के सफल होने के बाद भविष्य में ऐसे रेलवे परिसरों में भी इसे अपनाया जा सकेगा, जहां भवनों के पुनर्विकास या सीमित छत उपलब्ध होने के कारण पारंपरिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करना संभव नहीं होता।

लोकार्पण के अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन और पार्किंग सुविधा को एक साथ जोड़ने की यह अवधारणा संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर  लेफ्टिनेंट  डी.के. प्रजापति सहित इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी इसे भारतीय रेल में नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। 30 किलोवाट क्षमता का यह सोलर कारपोर्ट पश्चिम रेलवे की हरित ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा सतत रेलवे अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। साथ ही यह परियोजना भविष्य में अन्य रेलवे मंडलों एवं सरकारी संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है।