सोशल मीडिया पर 'फ्रेंडशिप' और भारी मुनाफे का लालच दे रहे सायबर ठग, रतलाम पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
रतलाम, 14 मई (इ खबर टुडे)। डिजिटल युग में सायबर अपराधी मासूम लोगों को ठगने के लिए नित नए और लुभावने तरीके अपना रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर दोस्ती कर और फिर ऑनलाइन निवेश के नाम पर लाखों की चपत लगाने वाले गिरोह सक्रिय हैं। इसे देखते हुए पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार के मार्गदर्शन में सायबर सेल रतलाम ने आमजन के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।
सायबर सेल के अनुसार, ठग सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और डेटिंग ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करते हैं। ये खुद को अक्सर विदेशी नागरिक, सफल बिजनेसमैन या निवेश सलाहकार बताते हैं। हफ्तों तक बातचीत कर ये पीड़ितों के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित करते हैं और जब विश्वास पूरी तरह जम जाता है, तब शुरू होता है निवेश का खेल।
ऐसे होती है ठगी की शुरुआत
ठग पीड़ित को क्रिप्टोकरेंसी, शेयर मार्केट या गोल्ड ट्रेडिंग में कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देते हैं। इसके लिए वे आरोपियों द्वारा तैयार किए गए नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर पीड़ित को रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। शुरुआत में पीड़ित से छोटी राशि निवेश कराई जाती है और ऐप के डैशबोर्ड पर फर्जी मुनाफा दिखाया जाता है ताकि पीड़ित का भरोसा बढ़े। जब पीड़ित बड़े लाभ के चक्कर में अपनी जमा पूंजी लगा देता है, तो ठग संपर्क काट देते हैं या पैसा निकालने के लिए 'टैक्स' और 'सर्विस चार्ज' के नाम पर और पैसों की मांग करते हैं।
बचाव के लिए पुलिस की सलाह
सायबर विशेषज्ञों ने ठगी से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतने को कहा है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी साझा न करें। किसी भी निवेश से पहले उसकी वैधता और सेबी (SEBI) में पंजीकरण की जांच जरूर करें। व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आए किसी भी अनजान निवेश लिंक को न खोलें। निवेश से पहले परिवार या वित्तीय विशेषज्ञों से सलाह लें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि आप किसी भी प्रकार की सायबर ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय सायबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं और तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या सायबर सेल को सूचित करें।

