Raag Ratlami Transfers: अफसरों के बदलाव से क्या दफ्तरों में आ पाएगा बदलाव? तौर तरीके बदलेंगे या बढेंगे भाव?
-तुषार कोठारी
रतलाम। तबादलों के मौसम में जिला इंतजामिया के कई बडे अफसरों को इधर से उधर कर दिया गया है। शहर वाली मैडम जी को ग्र्रामीण में भेज दिया गया है,तो ग्र्रामीण वाले साहब को आलोट पंहुचा दिया गया है। शहर की जिम्मेदारी अब सैलाना वाले साहब सम्हालेंगे। यानी कि जिले का इंतजामिया सम्हालने वाले तमाम अफसर इधर से उधर हो चुके है। बडा सवाल अब यही है कि क्या अफसरों के बदलाव से दफ्तरों के तौर तरीकों में बदलाव आ पाएगा?
जिला इंतजामिया के दफ्तरों में जमीनों से जुडे तमाम मसले सुलझाए जाते है और इन्ही मसलों में आम लोगों की हालत खस्ता हो जाती है। तहसीलों में होने वाले नामांतरण,बंटवारे और जमीनों की नप्ती जैसे आम लोगों से जुडे तमाम कामों के रेट इन दिनों बहुत ज्यादा हो चुके है। खेती बाडी करने वाले किसानों को अपनी जमीनों के सीमांकन और नामांतरण जैसे कामों के लिए पटवारी से लगाकर तहसीलदार तक के सामने नतमस्तक होना पडता है और भारी चढावे के बगैर उनके काम हो नहीं पाते।
कहने को सरकार ने नक्शे और खसरे आनलाइन कर दिए है,लेकिन राजस्व महकमे के घिसे हुए लोगों ने इनमें भी भारी गडबडियां कर रखी है। किसानों को इन गडबडियों को ठीक करवाने के लिए इनके दफ्तरों के सामने एडिया घिसनी पडती है और जब तक चढावा पूरा नहीं चढा दिया जाता,किसानों का काम नहीं हो पाता।
जब अफसर बदलते है,तो उम्मीदें लगाई जाती है कि शायद दफ्तर के तौर तरीके बदलेंगे। कई बार तो सचमुच में स्थितियां ठीक हो जाती है,लेकिन कई बार दांव उलटा पड जाता है और नए साहब के आते ही काम करवाने के भाव पहले से ज्यादा बढ जाते है। अब जब कई सारे अफसर बदले है,तो लोगों की नजरें इसी बात पर टिकी है और यही सवाल सबके सामने है,कि दफ्तरों के तौर तरीके बदलेंगे या फिर भाव बढ जाएंगे। नजरें बनाए रखिए कुछ ही दिनों में इस सवाल का जवाब भी सामने आ जाएगा।
पंजा पार्टी और सीएम का पुतला
लम्बे अरसे के बाद पंजा पार्टी मैदान में नजर आई। वैसे तो पंजा पार्टी मैदान में नजर आती नही है,लेकिन पंजा पार्टी की खवातिनों की वजह से इस बार न सिर्फ मैदान में नजर आई बल्कि पंजा पार्टी की खवातिनों ने सीएम का पुतला भी फूंक डाला। दिल्ली में रहने वाली रतलामी दीदी को पंजा पार्टी राज्यसभा में लाना चाहती थी,लेकिन सूबे में बरसों से जमे बैठे बडे बुजुर्गों को यह पसन्द नहीं था,इसलिए रतलामी दीदी का परचा ही खारिज करवा दिया और पंजा पार्टी की इकलौती सीट पर भी फूल छाप का कब्जा हो गया।
रतलामी दीदी,पंजा पार्टी के पप्पू की चहेती है,इसलिए दीदी का परचा खारिज होने के खिलाफ पूरे सूबे में जोरदार हंगामा मचाने की घोषणाएं की गई थी। पूरे सूबे में तो पंजा पार्टी वालों ने खाली रस्म अदायगी के अंदाज से विरोध प्रदर्शन किया,लेकिन रतलाम में पंजा पार्टी की खवातिनों ने अपना जोर दिखाने की भरपूर कोशिश की। रतलाम वाली आपा इन दिनों पंजा पार्टी की प्रदेश की नेता है,इसलिए भी यहां प्रदर्शन ठीक ठाक करना जरुरी था।
बहरहाल इसी चक्कर में पंजा पार्टी की खवातिनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया,नारेबाजी की,ज्ञापन भी दिया और आखिर में सीएम का पुतला भी फूंक डाला। आमतौर पर वर्दी वाले इस बात पर खास नजर रखते है कि कोई भी सीएम का पुतला ना फूंक पाए,लेकिन पंजा पार्टी की खवातिनों ने बडी चतुराई से पुतला फूक दिया। सीएम का पुतला फूंक दिए जाने से एक तरफ तो पंजा पार्टी की हैसियत में थोडा इजाफा हो गया है,वहीं दूसरी तरफ ये सवाल भी पूछा जा रहा है कि सीएम का पुतला फूंकने के बावजूद सरकार और इंतजामिया के अफसरों ने अब इस पर कोई कार्रवाई क्यो नहीं की है? वरना तो ऐसे मामलों में नेताओं पर केस दर्ज कर दिए जाते है। जो भी हो,पंजा पार्टी की खवातिनों के प्रदर्शन से पंजा पार्टी में थोडी सी जान जरुर आ गई है।
प्रदर्शन का डर, अब भी बाकी है असर
कुछ महीनो पहले दरबारों की एक सेना ने जिला इंतजामिया के दफ्तर का घेराव करने की घोषणा की थी। शेरपुर दरबार की अगुवाई वाली इस सेना के प्रदर्शन से जिला इंतजामिया में घबराहट सी फैली हुई थी और इसी के चलते इंतजामिया ने सुरक्षा के तगडे इंतजाम भी किए थे। इन्ही तगडे इंतजामों में एक इंतजाम ये भी था कि जिला इंतजामिया के दफ्तर की इमारत के बाहरी परिसर को पूरी तरह बैरिकेटिंग लगा कर सील कर दिया गया था। ताकि कोई भी आदमी इमारत के मेनगेट पर सीधे ना पंहुच सके।
कमाल ये हुआ कि सुरक्षा के तगडे इंतजाम धरे के धरे रह गए। इंतजामिया के अफसरों और दरबारों के सेना के बीच हुई चर्चाओं के बाद प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया और सारा मामला शांति से निपट गया।
इस सारे वाकये को महीनों गुजर चुके है,लेकिन लगता है कि उसके डर का असर अब भी बाकी है। जिला इंतजामिया के दफ्तर की इमारत में लगाए गए बेरिकेटिंग अब भी उसी तरह लगे हुए है। इस इमारत में हर दिन हजारों लोग आते है। बेरिकेटिंग के कारण उन्हे दाहिनी ओर से गेट से प्रवेश करना पडता है। इतना ही नहीं,इमारत की बेसमेन्ट में बनाई गई पार्किंग भी इसके चक्कर में अनुपयोगी हो गई है। इमारत में आने वालों के मन में यही सवाल उठता है किक्या डर अब भी बाकी है?

