Raag Ratlami RDA : खींचतान खत्म करने के फार्मूले ने ही बढा दी फूल छाप की आपसी खींचतान / पंजा पार्टी में जारी है बवाल
-तुषार कोठारी
रतलाम। लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार शहर का विकास करने के लिए एक मुखिया और दो असिस्टेन्ट समेत कुल सात नेताओं को जिम्मेदारी दे दी गई। शहर का विकास करने वाली दुकान को अब यही सातों लोग मिलकर चलाएंगे। हांलाकि इन सात लोगों को खोजने में फूल छाप वालों ने साढे तीन साल का वक्त गुजार दिया और अब इन लोगों को पास विकास करने के लिए साल सवा साल ही बचा है। इसलिए यही माना जा रहा है कि शहर का विकास भले ही हो या ना हो लेकिन नेताओं का स्टेटस जरुर बढ गया है।
सियासय की खासियत यही होती है कि इसमे हर कहीं खींचतान मचने लगती है। शहर का विकास करने वाली इस दुकान पर कब्जा करने की दौड़ काफी पहले से चल रही थी.और कई सारे दावेदार इसमें लगे हुए थे। उपर वालों को इसी चक्कर में साढे तीन साल का वक्त लग गया कि ज्यादा खींचतान ना मचे और अधिक से अधिक लोग संतुष्ट हो जाए। इसी चक्कर मे फूल छाप वालों ने दावेदारों को ही असिस्टेण्ट बना दिया। खींचतान कम करने के लिए निकाले गए फार्मूले का उलटा असर देखने को मिला। खींचतान रोकने के लिए बनाए गए फार्मूले के कारण पहले ही दिन से खींचतान नजर आने लगी।
जैसे ही सरकार ने घोषणा की,पूरे शहर में जगह जगह बधाई और आभार वाले होर्डिंग और बोर्ड नजर आने लगे। इन्ही होर्डिंग्स और बोर्ड से खींचतान भी साफ दिखाई देने लगी। कई सारे होर्डिंग्स ऐसे थे,जिन पर एक असिस्टेण्ट के बडे बडे फोटो लगे हुए थे,और मुखिया के फोटो ही नदारद थे। कुछेक होर्डिंग्स ऐसे भी थे,जिन पर मुखिया के फोटो थे,लेकिन बहुत छोटे फोटो थे,जबकि असिस्टेण्ट के फोटो बडे थे। इन होर्डिंग्स को देखकर लोग हिसाब लगा रहे है कि शहर के विकास वाली इस दुकान का कामकाज शांति से चल भी पाएगा या नहीं?
कुल मिलाकर देर से ही सही,सरकार ने शहर का विकास करने वाली दुकान को चलाने वाले तैनात तो कर ही दिए है। बचे खुचे वक्त में ये सब लोग मिलकर शहर को विकास की कोई ठीक ठाक सौगात दे सके,तो यह शहर के बाशिन्दों के लिए अच्छा होगा,वरना जिन्हे जिम्मेदारी मिली है,उनका स्टेटस तो बढ ही चुका है। उनके लिए तो इतना ही काफी है।
पंजा पार्टी में बवाल
पंजा पार्टी की हालत इन दिनों सूत ना कपास जुलाहो में लट्ठम लट्ठा जैसी हो गई है। पंजा पार्टी में ना तो ज्यादा लोग बचे है और ना ही चुनावों में पंजा पार्टी कोई कमाल दिखा पाती है। इसके बावजूद पंजा पार्टी में पोस्ट जुगाडने के लिए मारामारी मची हुई है। पंजा पार्टी के मुखिया ने हाल ही में अपनी टीम बनाई। इस टीम में उन्होने अपने चहेतों को ही जगह दी। लेकिन इससे पंजा पार्टी के कई सारे लोग बुरी तरह खफा हो गए है।
बीते कुछ वक्त से पंजा पार्टी को वोट देने वालों में जालीदार गोल टोपी वालो की ही ज्यादा तादाद हो गई है। इसी वजह से पंजा पार्टी वाले गोल टोपी वालों की खुशामद में भी लगे रहते है। लेकिन अपनी नई टीम बनाने के दौरान पंजा पार्टी के मुखिया ने इस बात का भी ध्यान नहीं रखा। उन्होने जिन गोल टोपी वालों को अपनी टीम में लिया है उनकी अपनी कौम में पकड नहीं है। कौम पर पकड रखने वालों को टीम से दूर रखा गया है।
सियासत की समझ रखने वालों का कहना है कि पंजा पार्टी हमेशा से जालीदार गोल टोपी वाले लोगों को अपने साथ रखती आई है और इसके लिए पंजा पार्टी,मौलाना काजी जैसे रसूखदार लोगों को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिया करती थी। ये शायद पहला मौका है,जब काजी परिवार के किसी सदस्य को पंजा पार्टी में जगह नहीं दी गई है। इस बात का खामियाजा भी पंजा पार्टी को भुगतना पड सकता है।
अब भी बाकी है इंतजार
फूल छाप पार्टी के नेताओं का इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक इंतजार खत्म होता है,तो दूसरा इंतजार शुरु हो जाता है। विकास प्राधिकरण की नियुक्ति का इंतजार करीब साढे तीन साल में खत्म हुआ। लेकिन इसी के साथ अब दूसरा इंतजार शुरु हो चुका है। शहर सरकार में सूबे की सरकार को पांच या छ: एल्डर मेन नियुक्त करना है। फूल छाप वाले कई नेता इसके लिए अपनी गोटियां जमा कर बैठे है,लेकिन उनका इंतजार है कि खत्म ही नहीं हो रहा। फूल छाप वालों ने प्रदेश भर के छोटे शहरों के एल्डरमेन तो तैनात कर दिए लेकिन नगर निगमों में ये काम अब भी बाकी है। ये इंतजार कब खत्म होगा कोई नहीं जानता..।

