Raag Ratlami MIladunnabi : जन्मदिन की खुशी नहीं,बेवजह का शक्ति प्रदर्शन,कान फोडू साउण्ड ने ले ली जान / नदारद है नाप तौल महकमे वाले
-तुषार कोठारी
रतलाम। मौका तो पैगम्बर के जन्मदिन की खुशी मनाने का होता है,लेकिन जालीदार गोलटोपी वाले इसे अपने शक्ति प्रदर्शन का मौका समझते हैैं। इसी का नतीजा है कि दम घोंटू और कान फोडू साउण्ड बजाने में होड मची रहती है और इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पडता है। इस बार के जुलूस में तो कानफोडू साउण्ड का खामियाजा एक जनप्रतिनिधि को अपनी जान देकर चुकाना पडा। हांलाकि बाद में बढते दबाव के चलते वर्दी वालों ने कोनफोडू साउण्ड बजाने वालों पर मुकदमें भी बनाए और जुर्माने भी थोपे।
जन्मदिन के मौके पर खुशियां मनाना और जन्मदिन को त्यौहार की तरह मनाना भारतीय संस्कृति है,जबकि दुनिया के रेगिस्तानी इलाकों में इस तरह का कोई रिवाज नहीं होता। रेगिस्तान इलाकों से निकले मजहब में भी जन्मदिन मनाने का कोई रिवाज नहीं है,इसलिए हिन्दूस्तानी इलाकों के अलावा और कहीं भी पैगम्बर का जन्मदिन इस तरह नहीं मनाया जाता,जैसे भारत में मनाया जाता है। गोलटोपी वाले इस खास दिन पर जुलूस निकालते और अपनी खुशियां जताते हैैं।
लेकिन बीते कुछ वक्त से जन्मदिन मनाने का यह मौका खुशियां मनाने से ज्यादा शक्ति प्रदर्शन का मौका बन कर रह गया है। इस बात की होड लगी रहती है कि इस मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोग बडे बूढे और यहां तक कि नन्हे बच्चे भी सडक़ पर निकले ताकि ये दिखाया जा सके कि तादाद कितनी है। इतना ही नहीं,अभी हाल के बरसों में तो अब खवातीनों को भी जुलूस में लाया जाने लगा है। जिस समुदाय में खवातिनों को परदे बुरके में रखे जाने का रिवाज है,वो समुदाय शक्ति प्रदर्शन के चक्कर में अपनी खवातिनों को परदों में रखते हुए सडक़ों पर लाने लगा है,ताकि दूसरों को ये दिखाया जा सके कि हमारी ताकत में हमारी खवातिनें भी शामिल है।
ताकत का दिखावा तादाद से ही कर लें तो भी पर्याप्त है। लेकिन जाहिलों की समझ का कुछ नहीं किया जा सकता। ज्यादा से ज्यादा तेज आवाज में गाने बजाने को भी वे अपनी ताकत मानने लगते है।असल में जब इस तरह का कोई आयोजन होता है,तो उसमें जिला इंतजामिया से परमिशन लेना पडती है और प्रत्येक परमिशन में साफ लिखा होता है कि डीजे किसी कीमत पर नहीं बजाया जाएगा,लेकिन बात जब शक्ति प्रदर्शन की हो तो कोई क्यों पीछे रहे? तेज आवाज को भी वे शक्ति प्रदर्शन के लिए जरुरी मानने लगते हैैं भले ही इससे उन्ही के एक आदमी को अपनी जान गंवाना पडी हो।
जुलूस का इंतजाम सम्हालने के लिए वर्दी वाले वैसे तो पूरे वक्त साथ चल रहे थे और कानफोडू साउण्ड से उनके कान भी फट रहे थे। लेकिन गोल टोपीवालों की भारी भीड वर्दी वालों को शायद डरा रही थी। इसी वजह से चलते जुलूस में कानफोडू साउण्ड को रोकने की कोशिश करता कोई नजर नहीं आ रहा था। बाद में जब कुछ खबरचियों ने इस मामले को उठाया तो जुलूस खत्म होने के बाद वर्दी वालों ने अपना डण्डा चलाया। चार डीजे जब्त कर लिए। दस मुकदमे भी दर्ज किए। यह भी कहा जा रहा है कि जिन आयोजकों ने इन डीजे वालों को बुलाया था,वे भी नहीं बख्शे जाएंगे,उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन अब एक नया सवाल पूछा जा रहा है। सवाल ये है कि जिन्हे जन्मदिन की खुशियां मनाना है,वो जोर शोर से मनाए। लेकिन जिन्हे इस जन्मदिन से कोई लेना देना नहीं है,वो क्यों परेशानी झेले। जुलूस की वजह से पूरा शहर जैसे पांच छ: घण्टों के लिए नजरबन्द हो गया था। शहर की हर खास सडक़ और बाजार पर जुलूस का असर दिखाई दे रहा था। बाजारों में धन्धा नहीं हो सकता था,सडक़ें चलने लायक नहीं थी। सवाल ये है कि इन बाजारों और सडक़ों पर रहने वाले क्यो मुसीबत झेलने को मजबूर है?
ये सवाल आने वाले दिनों में जोर शोर से पूछा जाएगा। जन्मदिन की खुशियां मनाने वाले अपने इलाकों में जोर शोर से खुशियां मनाएं। इसमें किसी को कोई हर्ज नहीं,लेकिन दूसरे इलाकों पर इसका असर नहीं पडना चाहिए। कोई बीमार अगर अस्पताल जाना चाहता,तो वह अस्पताल नहीं जा सकता था,क्योकिं सारी सडक़ें ही जाम पडी थी। इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए जुलूस खत्म होने के बाद आधी रात को हजारों लोग त्रिवेणी मुक्तिधाम पर इकट्ठा हो गए थे। ये सारे लोग अब अगले हफ्ते मिलकर इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे। इसके बाद पता चलेगा कि आगे क्या होगा?
नदारद है नाप-तौल महकमे वाले
पूरे सूबे में नकली पनीर और मिलावटी खाद्य सामग्र्रियो के खिलाफ अभियान चल रहे थे,लेकिन उस वक्त खाद्य सुरक्षा वाला महकमा सोया पडा था। बाद में जिला इंतजामिया के नए आए बडे साहब ने जब महकमे वालों को फटकार लगाई तो महकमे वालों की नींद टूटी और वो थोडा थोडा काम करते नजर आए। एक दो बडे हाटलों में छापामारी हुई तो पता चला कि लोगों को कितनी घटिया और खराब खाद्य सामग्र्री खिलाई जा रही थी। कुछ मिठाई वालों की भी जांच हुई।
खाद्य सुरक्षा वाला महकमा तो फटकार खाने के बाद सक्रिय हो गए,लेकिन लोगों को नाप तौल की धोखाधडी से बचाने के लिए बनाया गया नाप तौल वाला महकमा फिर भी कहीं नजर नहीं आया। मिठाई नमकीन की दुकान हो,सब्जी तरकारी बेचने वाले या फिर किराने का सामान बेचने वाले। हर कहीं जो भी माल बेचा जाता है,तौल कर बेचा जाता है।
माल बेचने वालों में से कई कम वजन का माल बेच कर मोटी कमाई करने में लगे हुए हैँ। बाजारों में दो तरह के बांट मिलते है। बांट पर जो वजन लिखा होता है,असल में उसका वजन उतना नहीं होता। एक किलो के बांट का वजन कभी नौ सौ ग्र्राम या साढे आठ सौ ग्र्राम ही होता है। इस तरह के बांट जब वापरे जाते है तो माल खरीदने वाला बुरी तरह ठगा जाता है। इसी तरह की धोखाधडी पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी नाप तौल महकमे की है।
लेकिन इस महकमे के लोग भी कभी काम करते दिखाई नहीं देते। बांटों का या नापतौल के उपकरणों का उपयोग करने वाले प्रत्येक विक्रेता की लगातार चैकिंग की जाना चाहिए। लेकिन महकमे के लोग प्रत्येक विक्रेता से महीने की बन्धी बन्धाई उजरत प्राप्त करते है और इसके एवज में उन्हे कम वजन वाले बांटों के उपयोग की छूट मिल जाती है। त्यौहारों के मौकों पर इस तरह की धोखाधडी अक्सर बढ जाती है। लेकिन बीतें कई सालों में भूले से भी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है,जब नाप तौल वाले महकमे ने किसी धोखाधडी करने वाले को पकडा हो।
जिला इंतजामिया के बडे साहब को अब इस महकमे की ओर भी ध्यान देने की जरुरत है। जब तक उनकी फटकार नहीं मिलेगी,ये महकमा भी काम करता नजर नहीं आएगा।
धून खा रही नई इमारत,हजारों का किराया दे रहा आजाक विभाग
आदिवासियों के कल्याण के लिए सरकार ने पूरा एक महकमा बना रखा है,जिसे करोडों रुपए का बजट दिया जाता है,ताकि आदिवासियों का ज्यादा से ज्यादा कल्याण किया जा सके। आदिवासी बालकों के रहने के लिए सरकार ने करोडों की लागत के दो आश्रम भवन बनवाए ताकि नन्हे बच्चों को उच्चस्तरीय सुविधाएं मिल सके।
जब भवन नहीं थे,तब ये आश्रम किराये के भवनों में चल रहे थे। नइ इमारतें बन गई तो आश्रमों को फौरन इन नई इमारतों में पंहुचा दिया जाना चाहिए था। लेकिन पता नहीं हजारों रु.माहाना किराये के भुगतान में कमीशन का मसला था या किसी अफसर की अडीबाजी का मामला था। महकमे वालों ने नइ इमारतें होने के बावजूद आश्रमों को वहां नहीं पंहुचाया और महकमा हजारों रुपए का किराया भुगतता रहा। महकमा अभी भी किराये का भुगतान कर रहा है और नई इमारतें धूल खा रही है।

