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Raag Ratlami Food Safety :  भगवान के भरोसे पर है शहर के लोगों की खाद्य सुरक्षा,निरीक्षक सिर्फ वसूली में व्यस्त/वर्दी वालो को मिली तारीफें,अच्छा रहा बीता  हफ्ता 

 

 

-तुषार कोठारी

रतलाम। जब सरकारों को समझ में आया कि मोटी कमाई के लालच में खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले व्यापारी जमकर मिलावटखोरी करते है और घटिया क्वालिटी की चीजें आम लोगों को बेचकर मोटा मुनाफा कमाते है,तभी से सरकारों ने खाद्य पदार्थों की सुरक्षा के लिए अलग से एक महकमा बना दिया। इस महकमे में निरीक्षक नाम के कर्मचारी भर्ती किए गए ,जिन्हे खाद्य पदार्थों की क्वालिटी और मिलावटखोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई,ताकि आम लोगों के साथ धोखाधडी ना हो सके।

लेकिन सारी गडबडी की शुरुआत भी यहीं से हो गई। जिन निरीक्षकों को खाद्य पदार्थों की मिलावट पर नजर रखने और अच्छी क्वालिटी के खाद्य पदार्थों को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी,उनमें से ज्यादातर ने इस जिम्मेदारी के एवज में मोटी वसूली शुरु कर डाली और मिलावट और घटिया क्वालिटी जस की तस बनी रही। निरीक्षकों को मालूम था कि उन्हे खाद्य पदार्थोँ की जांच की जिम्मेदारी दी गई है,इसलिए उन्होने वार त्यौहार के मौके पर जांच की नौटंकी भी बदस्तूर जारी रखी,ताकि लोगों को ऐसा लगता रहे कि महकमा अपना काम करता रहता है।

जब जब त्यौहारों का मौसम आता है,ये महकमा अचानक से नजर आने लगता है। कभी मिठाई की दुकानों पर तो कभी नमकीन बनाने वालों की दुकान पर ये निरीक्षक पंहुचते है और सैम्पल लेने की औपचारिकता पूरी करते है। सैम्पल देने वाले दुकानदार को भी अच्छे से पता होता है कि सैम्पल की रिपोर्ट को ठीक बनाए रखने के लिए निरीक्षकों को उनकी अतिरिक्त फीस देना जरुरी है। दुकानदार सैम्पल के साथ ही निरीक्षकों की अतिरिक्त फीस जमा कर देता है और आखिरकार उसका सैम्पल पास हो जाता है।

बाजार की हकीकत इन सबसे पूरी तरह अलग है। सेव और नमकीन के लिए देश विदेश में प्रसिद्ध रतलाम में कई सारे नमकीन बनाने वाले,बेसन की जगह अन्य पदार्थों और घटिया बेसन का उपयोग तो करते ही है,मूंगफली तेल के दावे के उलट तेल भी घटिया वापरते है। इसके बावजूद खाद्य पदार्थोँ की सुरक्षा करने वाला महकमा आज तक ऐसी एक भी दुकान पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। मिठाईयों की कहानी भी इससे अलग नहीं है। कई दुकानों पर खराब हो चुके मावे को मिठाई बनाने में उपयोग कर लिया जाता है। लेकिन किसी निरीक्षक को इससे कोई मतलब नहीं होता।

मामला सिर्फ मिठाई और नमकीन का नहीं है। मिलावटी और सिंथेटिक दूध,नकली और एनालाग पनीर,सोयाबीन तेल,होटलों पर बिकने वाला भोजन यानी कि हर कहीं लोगों के साथ धोखा हो रहा है,लेकिन निरीक्षकों को कभी इन मामलों की जांच करते हुए नहीं देखा गया है। शहर में दर्जनों ब्रान्ड नेम से सोयाबीन तेल की बिक्री हो रही है। जिन ब्रान्ड के नामों से बिक्री हो रही है,उन नामों की कोई फैक्ट्री मौजूद ही नहीं है। तेल के व्यापारी,खुला तेल खरीद कर अपने स्तर पर पैकेजिंग कर के पैकेट पर कोई भी नाम चढा कर तेल बेच रहे हैैं। तेल का क्वालिटी कैसी है? कोई नहीं जानता? शहर मे तेल की पैकेजिंग करने के कई सारे अवैध प्लान्ट काम कर रहे है। लेकिन महकमे को इससे कोई मतलब नहीं। उन्हे उनकी बन्दी नियमित रुप से मिल रही है।

पानी का गोरखधन्धा सबसे बडा है। पानी की बाटलों का खेल तो कल्पनाओं से भी परे हैैं। साफ शुद्ध पानी पीने का इच्छुक व्यक्ति बीस रुपए खर्च करके एक लीटर पानी की बाटल खरीदता है। उसे लगता है कि बिस्लेरी या किनले जैसे बडे ब्रान्ड का पानी तो निश्चित रुप से मिनरल वाटर ही होगा। लेकिन जिले भर में और छोटे छोटे गांवों तक बडे ब्रान्ड से मिलते जुलते नामों की नकली बाटलें हजारों की तादाद में बेची जा रही है। ये बाटलें कहां पैक हो रही है और पानी की क्वालिटी कैसी है,कोई नहीं जानता?  जानने वालों का कहना है कि उपयोग के बाद फेंकी गई बाटलों को फिर से एकत्रित करके,उन्ही पर नए लेवल चिपका कर नलकूप का पानी भर कर धडल्ले से बेचा जा रहा है। इन बाटलों में दूषित पानी भी जमकर बिक रहा है। लेकिन जिन्हे सुरक्षा देने की जिम्मेदारी दी गई है,वे सिर्फ वसूली में व्यस्त है।

महकमे को जानने वालों का कहना है कि पहले तो जिले में सिर्फ एक निरीक्षक होता था,अब तीन है। लेकिन ये सभी जिले भर में नियमित तौर पर वसूली ही करते हैैं। अब त्यौहार आने वाले है,तो ऐसा लगेगा,जैसे ये काम कर रहे हो। लेकिन असलियत ये है कि ये काम भी त्यौहारी वसूली के लिए ही किया जाएगा।

खबरों में छाए हैैं सर्राफा व्यापारी

बीते हफ्ते की खबरों में सर्राफा व्यापारी छाए हुए रहे। पहले तो एक सर्राफा व्यापारी की खुदकुशी में खबरों के बाजार पर कब्जा किया हुआ था। ये खबरें अभी चल ही रही थी कि एक सर्राफा व्यापारी के साथ जबर्दस्त लूट की वारदात सामने आ गई। बडनगर से रतलाम आ रहे सर्राफा व्यवसायी से भारी मात्रा में सोना लूट लिया गया। वर्दी वालों के लिए जितनी बडी चुनौती खुदकुशी की खबर थी,उससे कहीं ज्यादा बडी चुनौती लूट की ये वारदात थी।

वर्दी वालों ने लूट की इस वारदात पर जबर्दस्त परफार्मेंस दिखाते हुए,महज तीन दिनों में लुटेरों का पता लगा लिया और सारे षडयंत्र का पर्दाफाश कर डाला। वर्दी वालों ने अपने कप्तान की अगुवाई में जांच करते हुए लूटे गए सोने को बरामद भी कर डाला और वारदात को अंजान देने वालों को भी धर दबोचा। इस कामयाबी पर वर्दी वालों की हर ओर से तारीफें की जा रही है।

वर्दी वाले महकमे में भीतर तक पैठ रखने वालों का कहना है कि सर्राफे से जुडे मामले वर्दी वालों के लिए हमेशा फायदेमन्द साबित होते आए है। सर्राफा व्यापारी की लूट वाले मामले का खुलासा करने पर जहां वर्दी वालों की तारीफें की जा रही हैैं,वहीं खुदकुशी वाला मामला जांच करने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

जानकारों का कहना है कि खुदकुशी करने वाले ने अपने आखरी खत में वैसे तो किसी पर जिम्मेदारी नहीं डाली है,लेकिन कहा ये जा रहा है कि रकम की वसूली के लिए कुछ व्यापारियों ने उसे जमकर धमकाया था और इसी धमकी के डर का असर था कि उसने खुदकुशी ही कर डालने का फैसला कर लिया था। बस यही पेंच वर्दी वालों के लिए फायदे का है। मरने वाले को उधार देने वालों में से कुछ या कईयों पर वर्दी वालों की मेहरबानी होना तय है। कुछ पर हो चुकी है,और कुछ पर होने वाली है। कुल मिलाकर बीता हफ्ता वाकई वर्दी वालों  के लिए अच्छा साबित हुआ है।