Movie prime

Raag Ratlami Drug Factory : ड्रग की फैक्ट्री, एमडी का स्मगलर,चंदन की लकडी, नगदी और गहनों से जुडे है कई सवाल

 
 

-तुषार कोठारी

रतलाम। मामला तो करीब डेढ महीने पहले का है। नए साल के पहले महीने के बीच में वर्दी वालों ने एक गांव में ड्रग बनाने की फैक्ट्री का भण्डाफोड करके भारी मात्रा में एमडी ड्रग बरामद किया था। इतनी बडी कामयाबी पर वाहवाही होना भी लाजिमी था। लेकिन अब डेढ महीना बीतते बीतते इसमें नई कहानियां जुडने लगी है। कहा जा रहा है कि वर्दी वालों ने ड्रग तो बरामद कर लिया,लेकिन भारी भरकम नगदी और सोने के चक्कर में मामले के कई पहलुओं को नजर अंदाज भी कर डाला। 

ड्रग की फैक्ट्री में वर्दी वालों को भारी मात्रा में चंदन की लकडियां भी मिली थी। चंदन की लकडियां मिलने का सीधा सा मतलब था कि ड्रग का स्मगलर चंदन की स्मगलिंग से भी परहेज नहीं करता था और चंदन की भी स्मगलिंग करता था। इतना ही नहीं इस फैक्ट्री से वर्दी वालों ने मोर और तीतर से जैसे वन्य प्राणी भी बरामद किए थे। 

चूंकि ड्रग की फेक्ट्री में चंदन की लकडियां, मोर और तीतर बरामद हुए इसलिए ये मामला जंगल महकमे वालों का भी हो गया। वर्दी वालों के रिमाण्ड और स्मगलर को जेल भेजने के बाद बारी थी जंगल महकमे वालों की। जंगल महकमे वालों ने अदालत की इजाजत से स्मगलर का दोबारा से रिमाण्ड लिया और उसे जावरा के ही दफ्तर में रखकर पूछताछ की गई। बस यहीं से गडबड शुरु हो गई।

 स्मगलर जब तक वर्दी वालों के कब्जे में था,वर्दी वालों के अलावा कोई उससे मिल नहीं सकता था। इसीलिए कहानी का दूसरा पहलू भी देखा नहीं जा सकता था। लेकिन स्मगलर जैसे ही जंगल महकमे के कब्जे में पंहुचा मामले का दूसरा पहलू भी सामने आने लगा।

अब जंगल महकमे वाले बता रहे है कि स्मगलर को पकडने गए वर्दी वालों की तो जमकर चांदी हो गई थी। स्मगलर ने जंगल महकमे वालों को बताया कि उसके घर में भारी मात्रा में नगदी और सोने के जेवरात थे। उसने तो जंगल वालों को यह तक बताया कि नगदी 85 लाख की थी,जबकि जेवर करीब सौ ग्राम के थे। स्मगलर ने कुछ ही वक्त पहले अपनी उम्र से करीब 40 साल छोटी उम्र वाली लडकी से तीसरा या चौथा निकाह किया था। उसका कहना था कि ये जेवरात वो उसी के लिए लाया था। उसने ये भी बताया कि नई वाली बीबी वो महाराष्ट्र के अकोला से मोटी रकम खर्च करके लाया था। ये नई वाली बेगम भी ड्रग स्मगलिंग के मामले में आरोपी है।

स्मगलर ने जंगल वालों को और भी ना जाने क्या क्या बताया है। उसके मुताबिक उसकी फेक्ट्री के आसपास कई सारे सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। वर्दी वाले इन कैमरे के डीवीआर अपने साथ ले गए थे। फैक्ट््री के नजदीक एक मस्जिद में लगे कैमरे की डीवीआर भी वर्दी वाले ले गए थे। लेकिन वर्दी वालों ने इसका कोई जिक्र नहीं किया।  अब सवाल ये उठ रहे है कि क्या ड्रग फैक्ट्री में नगदी मौजूद थी और अगर थी तो कितनी थी? सवाल ये भी है कि ये नगदी आई कहां से थी? नगदी की बरामदगी की बात तो आई थी, लेकिन कितनी नगदी थी,ये स्पष्ट नहीं हुआ था।

ड्रग स्मगलर के खिलाफ वर्दी वालों की जांच फिलहाल जारी है। वर्दी वालों का कहना है कि कई पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है, और जांच के दौरान सामने आए तमाम तथ्य साझा नहीं किए जा सकते है। इससे जांच प्रभावित हो सकती है और स्मगलर को फायदा मिल सकता है। बात सही भी है। ड्रग की फैक्ट्री चलाने वाले किसी शख्स को कतई भरोसेमन्द नहीं माना जा सकता। उसके खिलाफ कार्रवाई हो रही है इसलिए वह जानबूझकर वर्दी वालों के खिलाफ बोल रहा होगा।  

लेकिन इससे अलग, वर्दी वालों के एक साहब का इस दबिश के बाद अचानक से तबादला हो गया था। ये साहब उस दबिश में मौजूद थे। उनके तबादले को ड्रग फैक्ट्री में बरामद हुई नगदी से जोडकर देखा जा रहा है। अब सारा दारोमदार कप्तान पर है कि इस मामले को लेकर खडे हो रहे सवालों पर वे ध्यान दें और अगर किसी तरह की कोई गडबडी हुई है,तो गडबडी करने वाले को सामने लाए।  

मन में लड्डू फूटा
 

फूल छाप के नेताओं के मन में इन दिनों लड्डू फूट रहे हैैं। अखबारों में खबरें छप रही है कि भोपाल वाले अब जल्दी ही निगम मण्डल और अन्य सरकारी नियुक्तियां करने वाले है। खबरों में दावेदारों के नाम और फोटो भी छापे जा रहे है। नेताओं के मन में लड्डू फूटना लाजिमी भी है। खबरों में जब वे अपना नाम देखते है तो उन्हे अपनी कोशिशें कामयाब होती नजर आने लगती है।

शहर में एक प्राधिकरण अध्यक्ष और छ: एल्डरमेन नियुक्त किए जाने है। इसके लिए दर्जनों नेता अपने आपको काबिल और जरुरी मान कर चल रहे है। फूल छाप में पदों की नियुक्ति की प्रक्रिया बडी ही टेडीमेढी और जटिल है। स्थानीय स्तर से लेकर राजधानी तक हर कोई राजी हो,तब कहीं जाकर कोई घोषणा हो पाती है। इस जटिल प्रक्रिया में कौन अपना नाम निकलवा पाता है,इसे जानने के लिए अभी और इंतजार करना होगा।