Raag Ratlami Conversion : फैलते जा रहे है गलों में क्रास लटकाने वाले,रोकने के लिए कानून है,लेकिन पता नहीं क्यों डरते हैैं वर्दी वाले ?
-तुषार कोठारी
रतलाम। हफ्ते के आखरी दिन जिले के आदिवासी अंचल रावटी में फिर से उन लोगों को पकडा गया,जो भोले भाले आदिवासियों को भ्रमित करके या प्रलोभन देकर उनके गलों में क्रास लटकवा देते हैैं। प्रदेश में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कडा कानून भी बना दिया गया है,लेकिन वर्दी वाले इस कानून का उपयोग करने में पता नहीं क्यों डरते है?
ताजा मामला रावटी का सामने आया है। रावटी में एक कमरे में बडी तादाद में महिला पुरुष और बच्चों को इकट्ठा करके उन्हे गले में क्रास लटकाने की सीख दी जा रही थी। जब सनातनी कार्यकर्ताओं को इसकी खबर लगी तो वे मौके पर पंहुचे और सारे षडयंत्र का भण्डाफोड किया। खबर मिलने पर वर्दी वाले भी मौके पर पंहुचे। कमरे से वो तमाम चीजें बरामद हो गई जो साबित करती थी कि भोले भोले महिला पुरुष और यहां तक कि बच्चों का भी मतांतरण करने की कोशिशें की जा रही थी। वर्दी वालों ने कमरे में मिले जमावडे को तो तितर बितर कर दिया और तमाम लोगों को थाने पर ले जाया गया। लेकिन जब मामला दर्ज करने की बात आई तो वर्दी वालों ने मामले की जांच करने का अपना रटा रटाया जवाब दोहरा दिया। मतांतरण का षडयंत्र करने वालों के खिलाफ मौजूद कानून का प्रयोग करने की कोशिश तक नहीं की गई।
लोगों को लालच देकर उनका मतांतरण कराने वाले ये लोग पहले तो आदिवासी इलाकों में ही नजर आते थे,लेकिन अब शहरों पर भी इनकी नजरें लग गई हैैं। जिले के कई आदिवासी गांवों की झोपडियों को पर क्रास लगवाए जा चुके हैैं। कई गावों में कान्वेन्ट स्कूल चलाए जा रहे हैैं। स्कूलों में जाने वाले बच्चे और उनके जरिये से उनके माता पिताओं का धर्म बदलने का खेल इन इलाकों में लम्बे समय से चल रहा है।
हांलाकि बीते कई सालों से इनका विरोध करने वाले भी सक्रिय है और इसकी वजह से इनकी गति थोडी धीमी जरुर हुई है,लेकिन फिर भी विदेशी फन्डिंग से आदिवासियों को मतांतरित करने का षडयंत्र लगातार जारी है।
कमाल की बात ये है कि आदिवासियों को प्रलोभन देकर उन्हे मतांतरित करने के षडयंत्रों को जब भी उजागर किया जाता है,तब वर्दी वाले और इंतजामिया के अफसर इन मामलों की जांच करने के नाम पर मामलों को रफा दफा करते आए है। कहने को तो मध्यप्रदेश में वर्ष
1967 से मतांतरण रोकने के लिए कानून बना हुआ है,लेकिन आम तौर पर इस कानून के तहत कभी भी किसी के खिलाफ कार्रवाई होते हुए नजर नहीं आती है।
1967 के बाद वर्ष 2021 में इस कानून को और भी कडा कर दिया गया है। नए कानून में सामूहिक धर्म परिवर्तन करने वालों के खिलाफ 5 से 10 साल की सजा और एक लाख रु.के जुर्माने की व्यवस्था की गई है। लेकिन इसके बावजूद इस कानून के तहत वर्दी वाले कभी कार्रवाई करते नजर नहीं आते।
जब भी रावटी जैसे काण्ड उजागर होते है,वर्दी वाले जांच की खानापूर्ति कर देते है। बडा सवाल यही है कि जब कानून मौजूद है तो वर्दी वालों को इसका उपयोग करने में डर क्यो लगता है? किसी जमाने में कहा जाता था कि गले में क्रास लटकाने वालों की लाबी बहुत ताकतवर होती है। रतलाम से लगाकार दिल्ली तक उनकी लाबी मजबूत हुआ करती थी। जब भी कहीं कोई मामला सामने आता था,सीधे दिल्ली से फोन आने लगते थे और वर्दी वाले और इंतजामिया के अफसर इसके सामने बेबस हो जाया करते थे। लेकिन आजकल ऐसे मामलों में दिल्ली या भोपाल से कोई फोन नहीं आता। इसके बावजूद वर्दी वालों की आदत है कि बदल ही नहीं रही है। मतांतरण के सारे मामले जांच के नाम पर टालने की आदत पहले की तरह ही बरकरार है।
जारी है लव जेहाद
शहर में जेहादी जाहिलों के कारनामे लगातार सामने आते रहते है। ताजा मामला सैलाना रोड के होटल में सामने आया है। वैसे तो ये होटल ऐसे ही मामलों के लिए चर्चित है,लेकिन इस बार यहां लव जेहाद का मामला सामने आ गया। एमडी जैसे खतरनाक ड्रग की तस्करी करने वाला जेहादी नाम बदलकर होटल में पंहुचा। लव जेहाद के इस खेल के लिए जेहादी ने दिन भी करवाचौथ का चुना था। ये तो गनीमत थी कि ऐसे मामलों पर निगाहबीनी करने वालों ने मामले को ताड लिया और वर्दी वालों को इसकी खबर कर दी। खबर मिली तो वर्दी वाले होटल पंहुचे और लव जेहाद का पूरा षडयंत्र उजागर हो गया।
वर्दी वालों ने जेहादी के साथ साथ होटल चलाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। कुल मिलाकर जेहादियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई होती रहने के बावजूद भी जेहादी जाहिल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। जरुरी है कि जेहादियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार होती रहे ताकि इन्हे नियंत्रण में रखा जा सके।

