Raag Ratlami Congress : लम्बे समय के बाद चर्चाओं में आई पंजा पार्टी,कहीं खींचतान तो कहीं सडक़ों पर घमासान / नए साहब के इंतजार में जुटा है दफ्तर
-तुषार कोठारी
रतलाम। बीते लम्बे समय से पंजा पार्टी खबरों से नदारद थी। ऐसा लगने लगा था कि जैसे राजनीति में अब पंजा पार्टी की कोई भूमिका बची ही नहीं है। लेकिन बीते कुछ समय से पंजा पार्टी धीरे धीरे खबरों में नजर आने लगी है। फिर भले ही खबरें पंजा पार्टी के किसी प्रदर्शन की हो या पंजा पार्टी में चल रही आपसी खींचतान और सिर फुटौव्वल की हो।
कहा जाता है कि बदनाम हुए तो क्या नाम तो हुआ। बस इसी तर्ज पर पंजा पार्टी खबरों में आ रही है। ताजा खबर एक आडियो क्लिप के कारण बनी है। देहात वाली पंजा पार्टी के मुखिया गुड्डु भैया को किसी कार्यकर्ता ने पद पाने के लिए फोन मिलाया। गुड्ड्ू भैया बन्दे से पहले से नाराज चल रहे थे। बस फिर क्या था,भैया ने बन्दे को ना सिर्फ जमकर लताड लगाई बल्कि सीधे सीधे यह भी समझा दिया कि अगर कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। भैया ने कह दिया कि अगर ऐसे ही चलते रहे तो उन्हे पंजा पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाएगा।
भैया की लताड से जले भुने बन्दे ने भैया की आडियो क्लिप को वायरल कर दिया। हांलाकि इस पूरी आडियो क्लिप में भैया ने पूरी तरह से शालीन भाषा का ही उपयोग किया है,लेकिन पंजा पार्टी की आपसी खींचतान इससे साफ जाहिर हो रही है। यही वजह है कि आडियो क्लिप जमकर वायरल हो रही है। इस आडियो क्लिप की खबरें भी बन रही है।
वैसे पंजा पार्टी की हालत सूत ना कपास जुलाहो में लट्ठम लट्ठा जैसी हो रखी है। पल्ले कुछ है नहीं लेकिन खींचतान बिलकुल उसी तरह की है जैसी कि सरकार के दिनों में हुआ करती थी। पंजा पार्टी के बचे खुचे लोग भी बर्दाश्त करने को राजी नहीं है। पंजा पार्टी के युवराज की ही तरह उन्हे भी लगता है कि एक ना एक दिन तो अचानक से किस्मत पलटा खाएगी और उनके पास पावर आएगी। जिस दिन पावर आएगी उस दिन इसमें हिस्सा बटाई करने के लिए कोई दूसरा नहीं होना चाहिए। शायद यही वजह है कि बचे खुचे लोग भी आपसी खींचतान में लगे रहते हैैं।
वैसे इधर शहर में पंजा पार्टी ने बीते दिनों दो बडे नेताओं के पुतले जला कर अपने होने का एहसास भी करवाया था। नीट पेपर लीक पर हुए तिलचïट्टों के आन्दोलन के बाद पंजा पार्टी ने इस मुद्दे पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए देश भर में प्रदर्शन करने के निर्देश दिए थे। इसी के चलते शहर की पंजा पार्टी ने एक नन्हा मुन्ना सा प्रदर्शन करके पुतले जलाने की कार्रवाई को अंजाम दिया था।
इस प्रदर्शन में शामिल लोगों की तादाद भले ही बेहद कम थी,लेकिन बडे लम्बे समय के बाद शहर में ऐसे दृश्य देखने को मिले थे,जब वर्दी वालों ने प्रदर्शन करने वालों पर पानी की बौछारे और आंसू गैस का उपयोग किया हो। लोगों को पंजा पार्टी से इस बात की भारी उम्मीदे है कि पंजा पार्टी आम लोगों के मुद्दे इस तरह जोर शोर से उठाएगी। अभी तक तो लोगों को इसमें निराशा ही हाथ लगी है,लेकिन हाल का प्रदर्शन देखकर फिर उम्मीद जगी है कि शायद आने वाले दिनों में पंजा पार्टी अपना काम ठीक से करके दिखाएगी।
मुफ्त की सुविधाएं और दादागिरी
सरकार हितग्र्राहियों के लिए कई सारी योजनाएं चलाती है,लेकिन इस तरह की योजनाओं के चलते चलते कई हितग्र्राही ये मान लेते है कि उन्हे प्रत्येक सुविधा मुफ्त में पाने का हक है। नाममात्र की कीमत पर दी जाने वाली सुविधा भी वे मुफ्त में चाहने लगते है और जब उनसे सुविधा का शुल्क मांगा जाता है,तो वे शुल्क देने की बजाय दादागिरी पर उतर आते है। ठीक यही मामला डोसीगांव में कमजोर आय वर्ग के लिए बनाए गए मकानों के मामले में हुआ।
शहर को झुग्गी मुक्त बनाने का संकल्प भैया जी ने लिया था। इसके लिए झुग्गियों में रहने वाले आïवासहीनों को बेहद कम दरों में सस्ते आवास उपलब्ध कराने की योजनाएं बनाई गई और इसी के तहत शिवनगर झुग्गी बस्ती के निवासियों को डोसीगांव में पक्के आवास बनाकर नाममात्र की कीमत पर उपलब्ध कराए गए थे। इन आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने के लिए कई तरह की कोशिशें की गई थी। बैैंक के कर्ज दिलवाया गया,ताकि वे आसान किश्तों पर अपने घर का सपना साकार कर सके।
लेकिन हर सुविधा मुफ्त में पाने के आदी हो चुके इन लोगों ने ना तो बैैंक के कर्ज की एक भी किश्त जमा करवाई और ना ही अन्य दूसरे शुल्क अदा किए। उन्हे लगा कि उन्हे दी जा रही प्रत्येक सुविधा बिलकुल निशुल्क है। कई बरस गुजर गए। उन्हे लगने लगा कि अब तो इन घरों पर उनकी पूरी मालकियत स्थापित हो चुकी है। लेकिन जब नगर निगम ने बकाया शुल्क की वसूली करने की कोशिश की तो ये लोग भडक गए।
नगर निगम ने उन्हे राशि जमा कराने के लिए पर्याप्त समय दिया और यह भी बता दिया कि अगर राशि जमा नहीं कराई गई तो उन्हे मकान खाली करना पडेंगे। लेकिन इस चेतावनी को भी उन्होने गंभीरता से नहीं लिया और जब निगम का अमला मकान खाली करवाने गया,तो निगम के अमले पर हमला कर दिया गया। इस हमले में एक खबरची भी बुरी तरह घायल हो गया। निगमकर्मियों को तो चोटें आई ही थी।
अब सवाल ये है कि इस तरह के लोगों के साथ क्या किया जाना चाहिए। राजनीति और निहित स्वार्थों के चलते कुछ लोग निगमकर्मियों पर हुए हमले को भी सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैैं। यह झूठ भी फैलाया जा रहा है कि निगम कर्मियों ने निवासियों के साथ बदतमीजी की,जिसकी वजह से विवाद की नौबत आई। लेकिन वास्तविकता यही है कि प्रत्येक सरकारी सुविधा मुफ्त में लेने के आदी हो चुके लोगों को अब सभी सुविधाएं मुफ्त में ही चाहिए। मुफ्तखोरी की इस आदत को सख्ती से ही रोका जा सकता है। जरुरी है कि इस मामले में हमला करने वालो पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि अन्य लोगों को भी इससे सबक मिल सके।
बडे साहब का इंतजार.....
जिला इंतजामिया की बडी मैडम जी का तबादला सूबे की राजधानी में हो चुका है। उनकी जगह अब नए साहब आने वाले है। आमतौर पर तबादले का फरमान जारी होते ही अफसर एक दो दिन में अपने नए स्थान पर पंहुच जाते है,लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। तबादले का फरमान जारी हुए एक हफ्ता गुजर चुका है,लेकिन अब तक नए साहब के आने की पक्की खबर नहीं मिली है।
जिला इंतजामिया के दफ्तर में काम करने वाले चाहते है कि नए साहब का स्वागत और जाने वाली मैडम जी की बिदाई एक ही दिन में कर दी जाए,ताकि एक पंथ दो काज हो जाते। अंदाजा यह लगाया जा रहा था कि नए साहब मंगलवार को आ जाएंगे,लेकिन ये भी पूरी तरह पक्का नहीं हो पाया है। कुछ लोगों का कहना है कि नए साहब बुधवार या गुरुवार को आएंगे। हांलाकि नए साहब के आने की तैयारी दफ्तर वालों ने शुरु कर दी है। चंदा जुटाया जा रहा है,ताकि जैसे ही नए साहब के आने की पक्की खबर मिलेगी,फौरन नए साहब के स्वागत और पुरानी मैडम जी की बिदाई का बडा प्रोग्र्राम किया जा सके।

