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 Raag Ratlami Congress : बेअसर रही झुमरु की नौटंकी,फूल छाप भी ढीली पडी / नए साहब के स्वागत में भूखे मर गए ड्राइवर

 

 

-तुषार कोठारी

रतलाम। लम्बे अरसे बाद झुमरु दादा को नौटंकी करने का मौका मिला था। नौटंकी उन्होने जमकर की भी,लेकिन दुखडा ये है कि नौटंकी का कोई असर ही नहीं हुआ। उम्मीद थी कि इस नौटंकी पर फूलछाप वाले कुछ दम भरेंगे लेकिन आखिरकार फूलछाप वाले भी ढीले पड गए।

शहर वालों को भी लम्बे अरसे के बाद झुमरू दादा की नौटंकी देखने का मौका मिला था। इसलिए तमाम खबरची मौके पर मौके पर कैमरे लेकर तैयार खडे थे। ये वहीं की कहानी है। जावरा रोड पर बने सस्ते दरों वाले फ्लैट्स की,जिन्हे खाली कराने के लिए शहर सरकार पिछले कई दिनों से तैयारी में जुटी थी। शहर सरकार को सूबे की सरकार के आला अफसर दम दे रहे थे कि अगर उन्होने फ्लैट्स खाली नहीं करवाए तो अफसरों पर गाज गिरेगी।

अफसर अपने उपर गाज क्यो गिरने देते? इसलिए उन्होने दो दिन पहले आखरी चेतावनी देने का फैसला किया। आखरी चेतावनी देने गए शहर सरकार के अमले को ना सिर्फ विरोध झेलना पडा बल्कि रहवासियों का हमला और पथराव भी झेलना पडा। कुछ लोग घायल भी हुए और एक खबरची का तो बेचारे का हाथ ही टूट गया। कुल मिलाकर शहर सरकार के अफसरों को समझ में आ गया कि अगर फ्लैट्स खाली कराने है,तो पूरी ताकत लगानी पडेगी।

वर्दी वालों की भारी तादाद जुटाई गई,ताकि हमले जैसे किसी घटनाक्रम से निपटा जा सके। पूरे ताम झाम के साथ अमला मौके पर पंहुचा। फ्लैट्स में रहने वालों को भी पता था कि अब तो उन्हे फ्लैट्स खाली करना ही पडेंगे। लेकिन यहीं झुमरू दादा के लिए मौका था। पूरी पंजा पार्टी एक तरफ और  झुमरू दादा एक तरफ। झुमरू दादा अकेले ही डोसी गांव जा पंहुचे। 

झुमरू दादा पंहुचे और फिर शुरु हुई उनकी धुआंधार नौटंकी। शहर सरकार के बडे साहब ने उनकी नौटंकी को देख कर कहा कि अगर आपको इतना ही दर्द है तो इनके रुपए आप जमा करवा दो। बस फिर क्या था? झुमरु दादा भडक गए और साहब की ही नौकरी खा जाने की धमकी भी दे डाली। दादा की नौटंकी आगे बढी तो वर्दी वालों ने उन्हे पकड कर गाडी में डाल दिया। जैसे ही दादा गाडी में पंहुचे,नौटंकी का दूसरा पार्ट भी शुरु हो गया। झुमरू दादा की तबियत अचानक से बिगड गई और उन्हे फौरन अस्पताल पंहुचाना पड गया।

झुमरू दादा की नौकरी खा जाने वाली धमकी जमकर वायरल हो गई। जो वो चाहते थे,वो हो गया। मोबाइल पर उनकी नोटंकी देखने वालों में से कई सारों के मन में ये सवाल भी उठा कि पूरी पंजा पार्टी में झुमरू दादा अकेले ही ऐसे थे,जो वहां नौटंकी करने पंहुचे। पंजा पार्टी के दूसरे नेताओं में से एक भी वहां नजर नहीं आया। जब ये सवाल जोर मारने लगा तो अगले ही दिन झुमरू दादा ने पंजा पार्टी के पहलवान मुखिया के साथ प्रेस कान्फ्रेन्स कर डाली। ताकि ये दिखाया जा सके कि पंजा पार्टी के नेता भी उनके साथ है।

झुमरू दादा के जवाब में शहर सरकार के मुखिया ने प्रेस कान्फ्रेन्स कर दी। उन्होने तमाम खबरचियों को बताया कि शहर सरकार इन लोगों पर छ:सालों में लाखों का खर्चा कर चुकी है और करोडों का नुकसान भी उठा चुकी है। इसके बावजूद भी शहर सरकार उन्हे कष्ट नहीं दे रही थी,लेकिन अब सीधे सूबे की सरकार का फरमान आ गया है। यही वजह है कि फ्लैट खाली कराना जरुरी हो गया है। 

झुमरू दादा ने अपनी नौटंकी के दौरान सरकारी पंचनामे का कागज फाड दिया था। इतना ही नहीं उन्होने सरकारी काम में जमकर रोडे अटकाए थे। ऐसे में झुमरु दादा के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज होना बिलकुल लाजिमी था। मौके पर मौजूद सरकारी अफसरों ने मुकदमा दर्ज करने के लिए वर्दी वालों को चिट्ठी भी भेज दी थी। वर्दी वाली मैडम खुद भी मौके पर मौजूद थी और अपनी आंखों से ही उन्होने सबकुछ देखा भी था। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि झुमरू दादा पर मुकदमा दर्ज हो रहा है या नहीं? उनका जवाब था कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही तय होगा कि मुकदमा दर्ज होगा या नही?

जानने वाले मैडम जी के जवाब से फौरन समझ गए। पूरा मामला फूल छाप वालों पर टिका है। अगर फूल छाप के बडे नेता इशारा कर देते,तो जांच वांच फौरन हो जाती। जांच की तो जरुरत ही नहीं थी,मैडम जी को खुद ही मौके पर मौजूद थी। लेकिन चूंकि फूल छाप वालों का इशारा नहीं मिला,इसलिए कहानी जांच के नाम पर अटका दी गई। कहने वाले कह  कह रहे है कि फूल छाप वाले ढीले पड गए है,इसी वजह से दादा की नौटंकी को चलने दिया जा रहा है। वरना इतनी नौटंकी होने पर मुकदमा तो दर्ज होना ही था। फूल छाप वाले समन्वय की सियासत पर भरोसा करते है। शायद यही वजह है कि तमाम नौटंकी के बावजूद झुमरु दादा बिना मुकदमे के मजे ले रहे है।

साहब के स्वागत में भूखे मरे ड्राइवर

जिला इंतजामिया के नए साहब रतलाम आ गए। रतलाम में आकर जैसे ही उन्होने कामकाज सम्हाला,सबसे पहले खबरचियों को बुलाया। उन्होने खबरिचयों को परिचय करने के लिए बुलाया था,लेकिन परिचय के नाम पर उन्होने खबरचियों को खरी खरी भी सुना दी। नए साहब ने आते ही बता दिया कि वे ना तो अखबार पढते है और ना मोबाइल के मैसेज पढते है। खबरचियों क एकाध मैसेज का जवाब तो वे दे देते है,लेकिन अगर ज्यादा मैसेज आने लगे तो फिर जवाब देना बन्द कर देते है। नए साहब ने ये भी बता दिया कि वो पूरे हाईटेक साहब है और अब से उनका दफ्तर पूरी तरह इ आफिस बनने वाला है।

नए साहब के स्वागत में जिला इंतजामिया के अफसरों और कारिन्दों ने स्वागत समारोह भी आयोजित किया था। इसी में पुरानी मैडम जी को बिदाई भी दी जाना थी। स्वागत और बिदाई  के इस कार्यक्रम के लिए दफ्तर में अफसरों और कारिन्दों से अच्छा खासा चन्दा भी जमा किया गया था। शाम के वक्त सैलाना रोड के एक शानदार होटल में प्रोग्र्राम हुआ। भाषण बाजी हुई जाने वाले को बिदाई और आने वाले का स्वागत किया गया। 

समारोह का सबसे बडा आकर्षण भोजन ही था। सबने भोजन किया,लेकिन बेचारे अफसरों के ड्राइवर इसमें भूखों मर गए। आमतौर पर ऐसे आयोजनों में सभी के लिए समान भोजन की व्यवस्था की जाती है,लेकिन ये शायद पहला मौका था,जब ड्राइवरों के लिए नपा तुला भोजन पैकेटों में रखा गया था। ड्राइवरों को उम्मीद थी कि उन्हे भी भरपेट खाने का मौका मिलेगा। लेकिन उनके पैकेटों में गिनी हुई रोटियां थी। उसी से उन्हे पेट भरना था। कई सारे तो बेचारे भूखे ही रह गए। अब पूरे दफ्तर में इसी बात की चर्चा है कि बेचारे ड्राइवर भुखे रह गए।

कांवड यात्रा और सियासी शक्ति प्रदर्शन

सावन का महीना वैसे तो भोले की भक्ति का महीना है,लेकिन इस महीने में भोले के भक्त एक पंथ दो काज भी कर लेते है। अधिकांश भोले के भक्त कांवड यात्राएं निकाल कर भगवान भोलेनाथ का पवित्र जल से अभिषेक करते हैैं। लेकिन भोले की भक्ति के इस महीने में नेताओं को भी अपनी ताकत जांचने और दिखाने का मौका मिल जाता है। भोले की भक्ति के साथ ही राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन भी हो जाता है। 

शहर में आजकल लगातार अलग अलग कांवड यात्राएं निकाली जा रही हैैं। इनमें से कई नेताओं के नेतृत्व में निकाली जा रही है। नेताओं की इन कांवड यात्राओं में भोले की भक्ति का तत्व तो है ही लेकिन साथ ही नेताओं के सारे ताम झाम भी जुड जाते है। कांवड यात्राओं में बाग लेने वाले शिव भक्तों को बी इन कांवड यात्राओं में तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। जो भी हो, भोले की भक्ति का यह महीना सभी शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला हो।सावन में यही शुभकामनाएं सभी के लिए है। आने वाले दिनों में भी इसी तरह की कांवड यात्राएं देखने को मिलेगी। कांवड यात्राएं देखिए और अंदाजा लगाईए कि कौन नेता कितना आगे जाता है....?