रतलाम / धराड़ टोल प्लाजा की मनमानी: घंटों कतारों में फंसी जनता, नियमों की सरेआम अनदेखी और प्रशासन मौन
रतलाम, 31 अगस्त (इ खबर टुडे)। रतलाम जिले में टोल वसूलने वाली कंपनी की मनमानी से आम जनता त्रस्त हो चुकी है। टोल टैक्स चुकाने के बावजूद वाहन चालकों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। विशेषकर शहर के नजदीक स्थित धराड़ टोल प्लाजा पर अव्यवस्था और जाम अब आम बात हो गई है। टोल कंपनी द्वारा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जबकि जिला प्रशासन इस पूरी समस्या पर मूकदर्शक बना हुआ है।
फास्टैग (FASTag) जैसी सुविधा होने के बावजूद धराड़ टोल पर वाहन चालकों का समय बर्बाद हो रहा है। आम नागरिक टोल का पैसा देने के बाद भी अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि टोल प्रबंधन जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहा है, जिसका सीधा खामियाजा जनता को अपनी परेशानी और कीमती समय गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।
टोल प्लाजा पर इन प्रमुख नियमों का हो रहा है उल्लंघन
वाहन चालकों की सुविधा के लिए कई स्पष्ट नियम बनाए हैं, लेकिन धराड़ टोल पर इनमें से किसी का पालन नहीं हो रहा है। फास्टैग लेन पर यदि किसी वाहन को स्कैनिंग या अन्य तकनीकी कारणों से 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार कराया जाता है, तो उस वाहन को बिना टोल दिए जाने का अधिकार है। टोल बूथ से 100 मीटर की दूरी पर एक पीली लाइन खींची होती है। यदि वाहनों की कतार इस पीली लाइन को पार कर जाती है, तो पीछे के सभी वाहनों को बिना टोल दिए (मुफ्त में) जाने देने का नियम है, जब तक कि कतार खत्म न हो जाए।
व्यस्त समय के दौरान टोल लेन में एक कतार में 6 से अधिक वाहन नहीं होने चाहिए। यदि किसी वाहन को कतार में 3 मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़े, तो उसका टोल शुल्क माफ किए जाने का प्रावधान है। साथ ही यातायात सुचारू करने के लिए टोल प्रबंधन को तुरंत अतिरिक्त लेन खोलनी चाहिए। यदि आप टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, तो टोल टैक्स नहीं देना होता है। इसके लिए केवल एड्रेस प्रूफ या वाहन रजिस्ट्रेशन दस्तावेज दिखाना अनिवार्य है।
प्रशासनिक सुस्ती और हेल्पलाइन का विकल्प
नियमों के अनुसार, यदि टोल कर्मचारी मनमानी करते हैं या जबरदस्ती टोल वसूलते हैं, तो नागरिक NHAI की आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी धराड़ टोल की इस तानाशाही का पुरजोर विरोध किया जा रहा है। इसके बावजूद, टोल कंपनी के रवैये में कोई सुधार नहीं आया है। सबसे बड़ी चिंता का विषय जिला प्रशासन का सुस्त रवैया है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई न होने के कारण टोल कंपनी बेखौफ होकर अपनी मनमानी पर अड़ी हुई है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और आम जनता को इस रोज-रोज की परेशानी से निजात दिलाता है।

