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जनसुनवाई में शिकायत: पटवारी पर सांठगांठ कर तहसीलदार के आदेश की अवहेलना करने और पीड़ित को धमकाने का आरोप

 

 

रतलाम,23 जून (इ खबर टुडे)। जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में मंगलवार को जमीन विवाद और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। जावरा तहसील के ग्राम रिछाचांदा निवासी किसान शांतिलाल पिता शंकरलाल सुतार ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर हलका पटवारी गोपाल रावत और कुछ स्थानीय दबंगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित का आरोप है कि पटवारी ने दूसरे पक्ष से सांठगांठ कर तहसीलदार के आदेश को ठेंगा दिखा दिया और उसे उसकी ही जमीन का कब्जा नहीं सौंप रहे हैं।

कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, प्रार्थी शांतिलाल की ग्राम रिछाचांदा में सर्वे नंबर 286 पर 0.7300 हेक्टेयर कृषि भूमि स्थित है। इस भूमि के सीमा चिन्हों को नष्ट कर गांव के ही ईश्वरलाल, बालू/राजू और मोहनलाल ने अवैध कब्जा कर लिया था। इस पर पीड़ित ने जावरा तहसील न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी, जहाँ प्रकरण क्रमांक 20/अ.70/2024-25 में सुनवाई करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने गत 28 अप्रैल 2026 को शांतिलाल के पक्ष में कब्जा दिलवाने का आदेश पारित किया था।

पटवारी पर सांठगांठ और फर्जी पंचनामा बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब 13 जून 2026 को राजस्व निरीक्षक (RI) डोडिया और मोझा पटवारी गोपाल रावत मौके पर कब्जा दिलवाने पहुंचे, तो पटवारी ने विपक्षियों के साथ मिलीभगत कर ली। पीड़ित के अनुसार, पटवारी ने उसकी सहमति या बिना पढ़े ही एक पंचनामे पर हस्ताक्षर करवा लिए। बाद में उस पंचनामे में मनमर्जी से यह लाइन जोड़ दी गई कि "मौके पर कोई भी रास्ता नहीं है और प्रार्थी को रास्ते के लिए जमीन छोड़नी होगी", जो कि पूरी तरह गलत और नियम विरुद्ध है।

फोन पर दी जा रही धमकियां
शांतिलाल ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि तहसीलदार के आदेश के बावजूद पटवारी द्वारा उसे मौके पर कब्जा सुपुर्दगी की रसीद नहीं दी गई। इसके विपरीत, विरोध करने पर पटवारी द्वारा उसे फोन पर डराया-धमकाया जा रहा है। पीड़ित ने जनसुनवाई में अधिकारियों को बताया कि वह और उसका परिवार इस समय गहरे भय में हैं और उन्हें आर्थिक व शारीरिक नुकसान पहुंचने की आशंका है।

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पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार
आज मंगलवार को हुई जनसुनवाई में जिला प्रशासन (अपर कलेक्टर) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवेदन स्वीकार किया है और इस पर त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं। पीड़ित किसान ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पटवारी और अन्य प्रतिप्रार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, तथा तहसीलदार जावरा के आदेशानुसार उसे अपनी पैतृक भूमि का वास्तविक कब्जा दिलाया जाए।