Movie prime

 सुप्रीम कोर्ट के स्थगन के चलते पदोन्नति मिले बगैर ही सेवानिवृत्त हो गए मप्र के  5 लाख से अधिक कर्मचारी 

 मप्र शिक्षक संघ ने जारी किया मांगपत्र 
 
 

रतलाम,02 अप्रैल (इ खबर टुडे)। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 से अब तक प्रदेश में पदोन्नति के पात्र होने के बावजूद लगभग 5 लाख से अधिक कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। संघ का कहना है कि शासन स्तर पर पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने से कर्मचारियों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है।

संघ के अनुसार, जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मध्य प्रदेश शासन ने शासकीय सेवा में आरक्षण देने, लेकिन पदोन्नति में आरक्षण नहीं देने संबंधी आदेश जारी किया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। शिक्षक संघ का कहना है कि वर्ष 2016 से 2026 तक इस मामले में न तो अंतिम निर्णय आया और न ही नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकी, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए।

मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन के नियमों के अनुसार रिक्त पद उपलब्ध होने पर निर्धारित अवधि में पदोन्नति दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि इस स्थिति के लिए प्रशासन जिम्मेदार है या न्यायिक प्रक्रिया में देरी, अथवा जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता।

संघ ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव तथा प्रधानमंत्री से शीघ्र निर्णय लेकर लंबित पदोन्नतियां करने की मांग की है, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को लाभ मिल सके।

इस संबंध में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष भोला उपाध्याय, जय संगठन मंत्री सर्वेश कुमार माथुर, संगठन मंत्री बद्रीलाल मडोतिया, सचिव जितेंद्र सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष बाबूलाल छावड़ा, आलोट तहसील अध्यक्ष दिलीप पोरवाल, जावरा तहसील अध्यक्ष दिनेश जायसवाल, सौरभ गुप्ता, राजनाथ तहसील अध्यक्ष संजय उपाध्याय, रावटी तहसील अध्यक्ष सत्यनारायण बैरागी, सचिन पन्नालाल चौहान, संगठन मंत्री लाल गांधी, रंजीत परमार, मोहन सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से मांग पत्र जारी किया है।

संघ के जय संगठन मंत्री सर्वेश कुमार माथुर ने बताया कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी हित में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।