रतलाम: गोवंश को वध के लिए ले जाने और अवैध शराब परिवहन के मामले में चार आरोपियों को एक-एक साल का कारावास
रतलाम, 27 अक्टूबर (इ खबर टुडे)। गोवंश को क्रूरतापूर्वक भरकर वध के लिए महाराष्ट्र ले जाने और अवैध हाथ भट्टी की शराब के परिवहन के मामले में रतलाम न्यायालय ने चार आरोपियों को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सपना भारती करतोलिया की अदालत ने 27 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया।
जिला अभियोजन संचालनालय की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, मामले में दंडित आरोपियों में मुकेश पिता रामचंद्र पाटीदार और शिवा उर्फ शिवनारायण पिता भगवान माली, दोनों निवासी ग्राम कानवन, जिला धार; रसीद पिता मंसूर खां कुरैशी, निवासी ग्राम उटखला, जावरा तथा यूनुस पिता भूरू उर्फ भुरा बेण्डा, निवासी जेल रोड, जुना कबाड़ा, जावरा शामिल हैं। आरोपियों को मध्यप्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम एवं मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत दंडित किया गया।
मुखबिर की सूचना पर की गई थी नाकाबंदी
प्रकरण के अनुसार, 7 अप्रैल 2014 को जावरा शहर थाने में पदस्थ एएसआई जीएस सोलंकी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो ट्रकों में गोवंश को क्रूरतापूर्वक भरकर वध के लिए धुलिया, महाराष्ट्र ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने चोपाटी चौराहे पर नाकाबंदी की योजना बनाई और पुलिस बल के साथ रतलाम रोड स्थित वादी होटल के पास पहुंची। यहां एसआई पीएन गिरवार, आरक्षक राजसिंह और आरक्षक राहुल राठौर को नाकाबंदी के लिए रवाना किया गया।
नाकाबंदी के दौरान दोनों ट्रक आते दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने रोककर जांच की। ट्रकों में गोवंश भरा हुआ था। जांच के दौरान एक ट्रक में 15 बैल पाए गए, जिनके मुंह और पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। उनके लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। इसके अलावा ट्रक में 30-30 लीटर की प्लास्टिक केनों में हाथ भट्टी की शराब भी रखी हुई मिली।
वध के लिए महाराष्ट्र ले जाने की बात सामने आई
पुलिस की पूछताछ में गोवंश को धुलिया, महाराष्ट्र ले जाने की बात सामने आई। प्रेस नोट के अनुसार, गोवंश को रसीद और शिवा द्वारा भरवाया जाना बताया गया था। वैध दस्तावेज एवं लाइसेंस नहीं मिलने पर पुलिस ने संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की।
अभियोजन के तर्कों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी एवं लिखित साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा प्रत्येक पर 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह सागर ने पैरवी की। मामले की जानकारी सहायक निदेशक अभियोजन, जिला रतलाम, योगेश तिवारी ने दी।

