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पटवारी सुसाइड कांड: नायब तहसीलदार सविता राठौर निलंबित, FIR की मांग को लेकर परिजनों और आदिवासी समाज का उग्र प्रदर्शनजारी

 

​रतलाम,22अप्रैल(इ खबर टुडे)। आलोट क्षेत्र के खजुरीदेवड़ा में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पटवारी के सुसाइड नोट और प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर कलेक्टर निशा सिंह ने तत्कालीन नायब तहसीलदार सविता राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इधर आदिवासी समाज और मृतक के परिजन नायब तहसीलदार पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर मेडिकल कॉलेज पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

​मृतक पटवारी रविशंकर खराड़ी ने अपने सुसाइड नोट में स्पष्ट आरोप लगाया था कि उन पर नक्शा बटांकन, मौका रिपोर्ट और पंचनामा जैसे सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने के लिए अनुचित प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा था। कलेक्टर द्वारा जब राजस्व प्रकरणों की मूल फाइलों की समीक्षा की गई, तो प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं और राजस्व संहिता के नियमों का उल्लंघन पाया गया।

​निलंबन और विभागीय कार्रवाई
​संभागायुक्त के निर्देश पर कलेक्टर मिशा सिंह ने आदेश जारी करते हुए श्रीमती सविता राठौर (तत्कालीन नायब तहसीलदार आलोट, वर्तमान पदस्थापना भू-संसाधन प्रबंधन कार्यालय) का कृत्य 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965' के विरुद्ध मानते हुए उन्हें 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966' के तहत निलंबित कर उनका मुख्यालय एसडीएम कार्यालय रतलाम शहर तय किया गया है।

​पोस्टमार्टम रोकने पर अड़े परिजन, विधायक भी मौके पर
​कार्रवाई के बावजूद मामले में आक्रोश कम नहीं हो रहा है। बुधवार सुबह से ही मृतक के परिजन और आदिवासी समाज के लोग पोस्टमार्टम नहीं होने देने पर अड़े रहे। मेडिकल कॉलेज पर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर सहित बड़ी संख्या में समाज के नेता मौजूद हैं। उनकी मांग है कि ​तत्कालीन नायब तहसीलदार सविता राठौर पर तत्काल पुलिस केस (FIR) दर्ज हो और मामले में एसआईटी जांच गठित कर दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।

​प्रशासन की अपील
​राजस्व विभाग में इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि मामले की सूक्ष्म जांच की जा रही है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ही निलंबन की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है, हालांकि समाज का नेतृत्व कर रहे नेता सख्त कार्रवाई से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।