रतलाम / खेत के सेड़े की रंजिश में हत्या, तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा, वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों ने खोली साजिश
रतलाम, 31 जुलाई (इ खबर टुडे)। खेत के सेड़े (मेड़) की रंजिश को लेकर किए गए एक सनसनीखेज हत्याकांड में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम, श्री राजेश नामदेव ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय पारित किया है। न्यायालय ने वैज्ञानिक, फोरेंसिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
प्रकरण की पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिकारी समरथ पाटीदार ने जानकारी दी कि दिनांक 09 नवंबर 2024 को थाना सैलाना क्षेत्र के अंतर्गत धामनोद चौकी के ग्राम दिवेल में मृतक हिम्मतसिंह पिता करणसिंह राजपूत, उम्र 48 वर्ष, निवासी ग्राम खेड़ी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की सूचना उनके भाई चंद्रसिंह द्वारा दी गई थी।
सूचना मिलते ही धामनोद चौकी प्रभारी आनंद बागवान तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। मृतक हिम्मतसिंह का शव उसके खेत पर चारपाई के पास जमीन पर मृत अवस्था में मिला था। उसके दोनों हाथ और बायां पैर टूटा हुआ था, शरीर पर गंभीर चोटें थीं और कपड़ों पर खून लगा हुआ था। मृतक के भाई कमलसिंह की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मौके से खून लगा पत्थर, खून लगी गोदड़ी, आम के पेड़ के नीचे बीड़ी के अधजले टुकड़े और हरे रंग की बीर की बोतल के टुकड़े जप्त किए थे। मृतक सात भाइयों में से चौथे नंबर का था और गांव दिवेल में ही खेत पर सोकर रखवाली करता था।
इस तरह खुला हत्याकांड का राज
जांच के दौरान धामनोद चौकी प्रभारी आनंद बागवान को मृतक के चचेरे भाई विजयसिंह पिता चत्तरसिंह देवड़ा, उम्र 36 वर्ष, निवासी ग्राम दिवेल के मोबाइल में एक महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग मिली। इसी संदेह के आधार पर जब विजयसिंह से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो यह बात सामने आई कि खेत के सेड़े के विवाद को लेकर विजयसिंह ने अपने साथियों दीपक उर्फ दीपु पिता गिरधारी सोनेर, उम्र 38 वर्ष, निवासी 38 रेल नगर और जस्सु उर्फ जसवंत पिता सोहनसिंह सोलंकी, उम्र 40 वर्ष, निवासी थावरिया बाजार, वर्तमान पता- आरोग्यम् हॉस्पिटल के पास हनुमान मंदिर, नाहरपुरा के साथ मिलकर इस सनसनीखेज हत्याकांड की योजना बनाई थी।
मुख्य आरोपी विजयसिंह की निशानदेही पर मोबाइल जप्त किया गया। इसके बाद आरोपी दीपक ने सैलाना न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद पुलिस ने दीपक और जसवंत को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त लकड़ी और मोटरसाइकिल भी जप्त कर ली। पुलिस अधीक्षक रतलाम द्वारा इस संवेदनशील और चर्चित प्रकरण को चिन्हित एवं सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखा गया था।
इन मजबूत साक्ष्यों के आधार पर हुई सजा
शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि डीएनए, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट और मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने इस हत्याकांड के हर एक राज को बेनकाब किया। आरोपी विजयसिंह और दीपक के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और वॉइस सैंपल का मिलान भोपाल स्थित वॉइस लैब में करवाया गया, जिसमें दोनों की आवाजों में पूर्ण समानता पाई गई। मोबाइल कंपनियों से प्राप्त डेटा विश्लेषण से यह प्रमाणित हुआ कि घटना से पहले और बाद में तीनों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे।
मृतक के शव के पास से जप्त गोदड़ी और आरोपी दीपक से जप्त लकड़ी पर मृतक हिम्मतसिंह का ही रक्त (ब्लड) होना पाया गया। घटनास्थल से जप्त बियर की बोतल के कांच के टुकड़ों और बीड़ी के अधजले टुकड़ों पर मिली लार (Saliva) की जांच में उसकी पुष्टि आरोपी जसवंत से जुड़ी पाई गई, जिससे उसकी घटनास्थल पर मौजूदगी सिद्ध हुई।
न्यायालय ने इस बात को गंभीरता से लिया कि आरोपी जसवंत मूल रूप से रतलाम के थावरिया बाजार का रहने वाला है, ऐसे में घटनास्थल पर उसके द्वारा उपयोग की गई बीड़ी के टुकड़े कैसे पहुंचे। इन सभी अकाट्य वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी गिरफ्तारी दिनांक से ही लगातार जेल में बंद हैं।

