रतलाम: डोसीगांव पीएम आवास में बकाया राशि न देने पर नगर निगम का एक्शन, बेदखली की कार्रवाई के बीच उग्र विरोध और धरना-प्रदर्शन
बकाया राशि जमा न करने पर 200 से अधिक फ्लैट खाली कराने पहुंचा नगर निगम और भारी पुलिस बल
नए कलेक्टर से मिलने निकले रहवासियों को पुलिस ने रोका, कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे
रतलाम, 05 अगस्त(इ खबर टुडे)। डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की मल्टी में रहने वाले 200 से अधिक परिवारों द्वारा बकाया राशि जमा न करने पर नगर निगम द्वारा दी गई 4 अगस्त की समय-सीमा समाप्त होते ही प्रशासन का बुलडोजर और अमला एक्शन में आ गया।
बुधवार सुबह भारी महिला पुलिस बल, जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमों ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से रह रहे कब्जाधारियों से फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। किसी भी अप्रिय स्थिति और विवाद से निपटने के लिए कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया है।
कलेक्टर कार्यालय का घेराव और विरोध प्रदर्शन
नगर निगम की बेदखली कार्रवाई के विरोध में डोसीगांव मल्टी के रहवासी अपने घरों पर ताले लगाकर नए कलेक्टर से गुहार लगाने निकले। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद आक्रोशित रहवासी कलेक्टर कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए और कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग करने लगे। मौके पर नगर पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र घनघोरिया और औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी गायत्री सोनी सहित भारी बल स्थिति को संभालने में जुटा रहा।
कांग्रेस नेता सकलेचा और कमिश्नर के बीच नोकझोंक
कार्रवाई की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता पारस सकलेचा डोसीगांव मल्टी पहुंचे और रहवासियों का पक्ष जाना। बारिश के मौसम में गरीब परिवारों को बेघर करने की कार्रवाई को उन्होंने अमानवीय बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की। इस दौरान उनकी नगर निगम आयुक्त से तीखी कहासुनी हो गई। बहस के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि सकलेचा द्वारा कमिश्नर को नौकरी से हटवाने संबंधी बयान देने पर अधिकारी भड़क गए, वहीं उपस्थित रहवासियों ने भी निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
2020-21 में हुआ था विस्थापितों का पुनर्वास
उल्लेखनीय है कि जावरा रोड स्थित शिवशंकर कॉलोनी और प्रकाश नगर स्लम बस्ती रेलवे भूमि पर बसी थी, जिसे हटाकर डोसीगांव में पुनर्वासित किया गया था। तत्कालीन प्रशासन और विधायक चेतन्य काश्यप के प्रयासों से 396 हितग्राहियों की सूची स्वीकृत की गई थी। प्रत्येक हितग्राही से 20 हजार रुपये मार्जिन मनी (जिसमें 10 हजार रुपये विधायक फाउंडेशन द्वारा दिए गए) जमा कराई गई थी, जबकि शेष 1.80 लाख रुपये पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेकर जमा कराने थे।
आधे से अधिक लोगों ने नहीं जमा की राशि
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, कुल 396 हितग्राहियों में से 166 ने बैंक लोन लिया और 20 ने एकमुश्त राशि जमा की। वहीं 208 हितग्राहियों ने पिछले छह वर्षों में छह बार नोटिस मिलने के बाद भी न तो लोन लिया और न ही राशि जमा की। जिन लोगों ने लोन लिया था, उनमें से भी कई की किस्तें पेंडिंग होने से खाते NPA हो गए। इसके अलावा, अवैध बिजली और पानी कनेक्शन से निगम को लाखों का नुकसान हुआ है। 31 जुलाई को नोटिस देने पहुंची टीम पर पथराव भी हुआ था।
रहवासियों के आरोप और वर्तमान स्थिति
दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि आवंटन के समय बुनियादी सुविधाओं का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने निगम कर्मियों पर मारपीट और अभद्रता के गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फिलहाल, लगभग 8 रहवासियों द्वारा पूरा भुगतान करने पर उन्हें राहत दी गई है और 7 लोगों ने कुछ घंटों का समय मांगा है। कई परिवार स्वयं अपना सामान खाली कर रहे हैं। निगम प्रशासन ने साफ किया है कि बकाया न चुकाने वालों से फ्लैट खाली कराने के साथ अमानत में खयानत की एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

