रतलाम पुलिस की बड़ी कामयाबी: साइबर ठगी के 68 पीड़ितों को वापस दिलाए 3.97 लाख रुपए
रतलाम, 30 जून (इ खबर टुडे)। साइबर ठगी के शिकार हुए लोगों को त्वरित राहत दिलाने के लिए रतलाम पुलिस ने एक बेहतरीन और अभिनव पहल की है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के कुशल निर्देशन में, जिला पुलिस ने न सिर्फ बड़ी ठगी बल्कि कम राशि वाले उन मामलों में भी विशेष सक्रियता दिखाई है, जहाँ पीड़ित अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं के डर से अपनी रकम वापस पाने की उम्मीद छोड़ देते थे।
रतलाम पुलिस ने गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा संचालित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) पोर्टल का प्रभावी उपयोग करते हुए अब तक साइबर ठगी के 68 पीड़ितों की पहचान की और उनके बैंक खातों में होल्ड (फ्रिज) पड़ी लगभग ₹3.97 लाख की राशि सफलतापूर्वक वापस कराई है।
छोटी रकम समझकर हार मान चुके पीड़ितों को मिला सहारा
अक्सर देखा जाता है कि 2,000 से 5,000 रुपए या इससे कुछ अधिक की ठगी होने पर लोग हेल्पलाइन पर शिकायत तो दर्ज करा देते हैं, लेकिन न्यायालयीन और अन्य औपचारिकताओं के कारण आगे की प्रक्रिया से पीछे हट जाते हैं। इसके चलते ठगों के खातों में होल्ड की गई राशि लंबे समय तक बैंकों में ही फंसी रह जाती है।
रतलाम पुलिस ने ऐसे सभी पेंडिंग मामलों की बारीकी से समीक्षा की। पुलिस टीम ने खुद आगे रहकर संबंधित पीड़ितों से संपर्क साधा और एमआरएम पोर्टल के माध्यम से बेहद आसान प्रक्रिया से उनकी राशि वापस कराई।
क्या है MRM पोर्टल?
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) का एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से साइबर ठगी के शिकार लोग अपनी होल्ड की गई राशि को वापस पाने के लिए ऑनलाइन दावा (Claim) पेश कर सकते हैं। इसके लिए दो शर्तें पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर समय रहते शिकायत दर्ज कराई हो और ठगी गई राशि संबंधित बैंक खातों में समय पर होल्ड (Freeze) हो चुकी हो।
इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका
इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने और पीड़ितों को उनकी गाढ़ी कमाई वापस दिलाने में उप निरीक्षक (SI) जीवन बारिया, प्रधान आरक्षक (Head Constable) हिम्मत सिंह और आरक्षक (Constable) राहुल पाटीदार की भूमिका बेहद सराहनीय रही।
एसपी अमित कुमार की आम जनता से अपील
"यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार होते हैं, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर दी गई सूचना से ठगी गई राशि को बैंक स्तर पर होल्ड कराना आसान हो जाता है, जिससे पैसे वापस मिलने की संभावना शत-प्रतिशत बढ़ जाती है।"
— अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक, रतलाम
रतलाम पुलिस ने एक बार फिर दोहराया है कि वे नागरिकों को डिजिटल अपराधियों से सुरक्षित रखने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

