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 धन तेरस विशेष : एक करोड से ज्यादा के नोटों से सजा है महालक्ष्मी नारायण मन्दिर

 नोटों के झूमर और नोटों का केक है बडा आकर्षण 
 

 

रतलाम,6 नवंबर (इ खबरटुडे)। बीते कुछ सालों से जहां रतलाम का लक्ष्मी मन्दिर स्वर्णाभूषणों और नोटों से की जाने वाली सजावट को लेकर देश विदेश में चर्चित था,वहीं अब कालिका माता मन्दिर के समीप स्थित महालक्ष्मी नारायण मन्दिर नोटों से की गई अद्भुत सजावट के लिए सुर्खियां बटोर रहा है। महालक्ष्मी नारायण मन्दिर में की गई एक करोड रु. से अधिक के नोटों की सजावट इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।

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कालिका माता मन्दिर के समीप स्थित महालक्ष्मी मन्दिर पर नोटों की साज सज्जा की शुरुआत पिछले वर्ष से की गई थी। पिछले वर्ष यह मन्दिर अधिक चर्चा में नहीं आया था,लेकिन इस बार श्रद्धालुओं ने यहां जमकर नए नोट भेंट किए जिससे कि मन्दिर की सजावट अत्यन्त आकर्षक स्वरुप में हो पाई है। मन्दिर में नोटों के झूमर बनाकर लगाए गए हैैं,मन्दिर की पूरी छत को नोटों की आाकर्षकक लडियां बनाकर सजाया गया है। इतना ही नहीं मन्दिर में नोटों से एक केक बनाया भी बनाया गया है जो विशेष आकर्ष्र का केन्द्र है।

चार सौ से अधिक लोगों का सहयोग

महालक्ष्मी माता के मन्दिर को नोटों से सजाने के लिए लगभग चार सौ से अधिक लोगों ने सहयोग किया है। इन श्रद्धालुओं ने अपनी क्षमता के अनुसार नोट प्रदान किए हैैं जिससे कि नोटों से मन्दिर को सजाया जा सके। मन्दिर संचालकों ने साज सज्जा के लिए सिर्फ नोट ही लिए हैैं। कुछ श्रद्धालु स्वर्ण आभूषण भीदेने के इच्छुक थे,परन्तु मन्दिर संचालकों ने सिर्फ नोटों से सजावट करने का लक्ष्य रखा है,इसलिए किसी भी श्रघ्दालू से आभूषण नहीं लिए गए।

नौ देशों की करेंसी भी शामिल है सजावट में

महालक्ष्मी मन्दिर में नोटों की साज सज्जा में विदेशी मुद्राओं का भी उपयोग किया गया है। विदेशों में आने जाने वाले श्रद्धालुओं ने अलग अलग देशों की मुद्राएं सजावट के लिए प्रदान की है। मन्दिर में फिलिपिंस,अफगानिस्तान,इण्डोनेशिया,जापान,अमेरिका जैसे नौ अलग अलग देशों के नोट भी सजाए गए हैैं।

छ: दिनों तक जुटे रहे दो दर्जन भक्त

मन्दिर के पुजारी पं.असीम व्यास ने बताया कि मन्दिर को नोटों से सजाने के लिए नोट लेने का शुभारंभ शरद पूर्णिमा से कर दिया गया था। श्रद्धालुओं से एकादशी अर्थात गुरुवार तक नोट स्वीकार किए जाते रहे। नोटों की साज सज्जा के लिए लडियां और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए दो दर्जन से अधिक भक्त छ: दिनों तक लगातार काम करते रहे,तब जाकर मन्दिर की सजावट के लिए नोटों की लडियां और अन्य डिजाइन तैयार किए जा सके। पं.व्यास के मुताबिक मन्दिर की इस ïिवशेष साज-सज्जा में पुष्पेन्द्र कुमावत,राजेश माहेश्वरी अंजली जोशी,राजेश्वरी जोशी इत्यादि अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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उमड रही है भारी भीड

एक करोड रु. से अधिक राशि के नोटों से की गई मन्दिर की सजावट को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड उमड रही है। श्रद्धालु मानते है कि महालक्ष्मी जी की सजावट के लिए प्रदान किए गए नोट उनके लिए बरकती नोट साबित होते है और महालक्ष्मी माता उन्हे दिए गए नोटों को कई गुना करके लौटाती है। यही कारण है कि अधिक से अधिक भक्त नोटों से होने वाली साज सज्जा में योगदान देना चाहते है। उन्हे लगता है कि यदि उनके नोट महालक्ष्मी माता के श्रृंगार में काम आएंगे तो उन पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा बरसेगी। दर्शनार्थियों का तांता देर रात तक लगता रहता। मन्दिर की यह साज सज्जा दीपावली के बाद तक बनी रहेगी। उसके बाद श्रद्धालुओं को उनके नोट लौटाए जाएंगे।