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प्रशासन के रसूख पर 'कबाड़' भारी: कलेक्टरों के नोटिस रद्दी, खाकी भी नतमस्तक!

 
 

​रतलाम, 14 मई (इ खबर टुडे)। शहर का हाट रोड क्षेत्र इन दिनों एक अवैध कबाड़ साम्राज्य की गिरफ्त में है। सालों बीत गए, कई कलेक्टर आए और गए, दर्जनों नोटिस जारी हुए, लेकिन मजाल है कि प्रशासन इस 'कबाड़ के किले' की एक ईंट भी हिला सका हो। यह गोडाउन अब शहर के लिए सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि दहशत और अपराध का पर्याय बन चुका है।

​अभी कुछ माह पूर्व ही इस गोडाउन में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था। आग इतनी भीषण थी कि दमकल की सैकड़ों गाड़ियां चार दिन तक बुझाने में लगी थी। उस वक्त प्रशासन ने सख्त लहजे में 'अंतिम चेतावनी' देते हुए गोडाउन को आबादी क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था। लेकिन आज हकीकत यह है कि न गोडाउन शिफ्ट हुआ और न ही मालिक का रसूख कम हुआ। प्रशासन की फाइलें धूल फांक रही हैं और गोडाउन मालिक का साम्राज्य सीना ताने खड़ा है।

​गुंडे-बदमाशों का 'सेफ हाउस'
​यह कबाड़ गोडाउन केवल लोहे और रद्दी का ढेर नहीं है, बल्कि जुआरियों, सटोरियों और नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आसपास की नामी कॉलोनियों और प्रसिद्ध हॉस्पिटलों के लिए यही एकमात्र रास्ता है, लेकिन गुंडे-बदमाशों के जमावड़े के कारण लोग यहाँ से गुजरने में कतराते हैं।

​पुलिस की 'मेहमाननवाजी' आरोप है कि खाकी यहाँ कानून का डंडा चलाने नहीं, बल्कि मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाने आती है। रात होते ही गोडाउन परिसर में 'जाम' छलकने लगते हैं और पुलिस की मौजूदगी रक्षक के बजाय गोडाउन मालिक के 'दरबान' जैसी नजर आती है। आखिर संरक्षण किसका? ​जब नगर निगम और जिला प्रशासन दोनों नोटिस दे चुके हैं, तो फिर कार्रवाई की फाइल कहाँ अटक जाती है?​क्या यह गोडाउन मालिक प्रशासन से ऊपर है? ​क्या पुलिस विभाग पूरी तरह से इस अवैध कारोबार के आगे नतमस्तक हो चुका है? ​क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा कुंभकर्णी प्रशासन?

​रहवासियों हो रहे चिंतित
क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि कबाड़ गोदाम में रद्दीया और खोखे होने से आए दिन यहां पर आग लगती रहती है। आग लगने से निकलने वाले धुएं से स्वास्थ्य को भारी हानि पहुंचती है। यदि जल्द ही इस अवैध अड्डे को यहाँ से नहीं हटाया गया, तो एक दिन बड़ी जनहानि संभव है। अब देखना यह है कि वर्तमान प्रशासन इन पुराने कागजी नोटिसों को हकीकत में बदल पाता है या इस 'कबाड़ के बादशाह' का रुतबा यूं ही बरकरार रहेगा।