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रतलाम / नशा मुक्ति अभियान को ठेंगा: सेजावता बाईपास के ढाबों पर सज रहीं अवैध मयखानें, पुलिस और आबकारी मौन

 

 

रतलाम, 19 जुलाई (इ खबर टुडे)। जिले में एक ओर जहाँ प्रशासन नशा मुक्ति के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों का मखौल उड़ाती नजर आ रही है। जिले में जारी 15 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक लगातार जागरूकता सेमिनार आयोजित कर लोगों को नशे से दूर रहने की शपथ दिला रहे हैं। लेकिन इसके उलट, पुलिस और आबकारी विभाग की कथित 'सरपरस्ती' के चलते इस अभियान को ढाबा संचालकों द्वारा सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।

​औद्योगिक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेजावता बाईपास पर संचालित अवैध ढाबे इस वक्त अवैध शराब परोसने के बड़े गढ़ बन चुके हैं। इन ढाबों के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में 'फेमिली रेस्टोरेंट' और वेज-नॉनवेज खाने के बोर्ड टंगे हैं, लेकिन अंदर का नजारा किसी बार या मयखाने से कम नहीं है।

अहाते बंद, सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंध; फिर ढाबों पर छूट क्यों?
​उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा पूरे प्रदेश में शराब के अहाते पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं और सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित व गैर-कानूनी घोषित है। कानूनन ऐसा करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद, सेजावता बाईपास के ढाबा संचालक प्रदेश सरकार के इस सख्त कानून का सरेआम मजाक बना रहे हैं और बेधड़क होकर ढाबों के अंदर शराब पिलाकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

​पर्दे के पीछे का खेल
ग्राहकों की प्राइवेसी के लिए ढाबों के भीतर बाकायदा केबिन बनाए गए हैं, जहां 4 से 5 लोग आसानी से बैठकर शराबखोरी करते हैं। इतना ही नहीं, ढाबों के पिछले हिस्से में हरी कनात (परदा) लगाकर खुले आसमान के नीचे 8 से 10 टेबल-कुर्सियां सजाई गई हैं, जहाँ बेखौफ होकर जाम छलकाए जा रहे हैं।

​'द रॉयल ढाबा' में ग्राउंड जीरो से रियलिटी चेक
​जब इस काले कारोबार की हकीकत जानने टीम 'द रॉयल ढाबे' पर पहुँची, तो वहाँ का नजारा चौंकाने वाला था। ढाबे के मुख्य काउंटर पर बैठा मैनेजर/मालिक ग्राहकों को खाने के साथ-साथ शराब की सर्विस की जानकारी भी आसानी से दे रहा था।

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन ढाबों पर शराब पीने वालों को अपनी बोतल साथ लाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। ग्राहक जिस ब्रांड या वैरायटी की मांग करता है, ढाबा संचालक उसे वहीं काउंटर से ही उपलब्ध करा देते हैं।

​मिलीभगत के बिना यह 'रॉयल' खेल मुमकिन नहीं!
​नशा मुक्ति अभियान के बीच बाईपास पर सरेआम चल रहे इस अवैध कारोबार ने आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि बिना विभागीय सांठगांठ और संरक्षण के, मुख्य मार्ग पर इस तरह खुलेआम अवैध मदिरालय का संचालन मुमकिन ही नहीं है। एक तरफ जागरूकता के खोखले दावे और दूसरी तरफ धड़ल्ले से बिकती शराब ने प्रशासन के इस अभियान को महज एक 'कागजी खानापूर्ति' बनाकर रख दिया है। अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह अवैध धंधा यूं ही फलत-फूलता रहेगा।

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