पानी और भोजन को तरसते बाजना एकलव्य छात्रावास के सैकड़ों विद्यार्थी, 70 किमी पैदल मार्च का किया प्रयास
रतलाम, 14 अक्टूबर (इ खबर टुडे)। रतलाम जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र बाजना स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय छात्रावास एवं विद्यालय में सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर सैकड़ों विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रावास में पानी की भारी किल्लत और घटिया भोजन से परेशान छात्र-छात्राएं अपनी आवाज बुलंद करने के लिए बाजना से रतलाम कलेक्ट्रेट की ओर लगभग 70 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च करने निकल पड़े।
सैकड़ों स्कूली बच्चों के पैदल मार्च पर निकलने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। तहसीलदार कुलभूषण शर्मा ने आनन-फानन में रास्ते में ही बच्चों को रोककर उनकी समस्याओं को सुना और त्वरित व स्थायी समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद विद्यार्थी छात्रावास लौटने को सहमत हुए।
पानी की भारी किल्लत, बंद पड़े हैं वैकल्पिक स्रोत
विद्यार्थियों ने तहसीलदार को बताया कि छात्रावास में पेयजल और निस्तार के पानी की स्थिति अत्यंत दयनीय है। पानी की कमी से नित्यकर्म और दैनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। परिसर स्थित पानी के अन्य स्रोत लंबे समय से बंद पड़े हैं और जिम्मेदार विभाग उन्हें दुरुस्त कराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा। फिलहाल टैंकरों के भरोसे ही काम चलाया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने मेस में मिलने वाले भोजन की घटिया गुणवत्ता को लेकर भी गहरा असंतोष जताया।
130 से 150 टैंकर का खर्चा, फिर भी बच्चे परेशान
मामले पर एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य अविनाश साहू ने माना कि पानी की समस्या गंभीर है। उन्होंने बताया कि जब से छात्रावास बना है, तब से ही पानी की यह समस्या बनी हुई है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर महीने लगभग 130 से 150 पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं, जिस पर प्रतिमाह करीब 70 हजार रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है। प्राचार्य ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को स्थिति से अवगत कराया गया है। वहीं भोजन की गुणवत्ता के संबंध में संबंधित ठेकेदार/कर्मचारी को नोटिस जारी किया जा रहा है, सुधार न होने पर उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
व्यवस्थाओं पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल
जब शासन-प्रशासन आदिवासी अंचल में शिक्षा और छात्रावासों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है, तब सैकड़ों बच्चों का मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना कई सवाल खड़े करता है। जब सैकड़ों विद्यार्थी छात्रावास में रहते हैं, तो अब तक पानी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?पानी के वैकल्पिक स्रोतों को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी किसकी थी और अब तक लापरवाही क्यों बरती गई? प्रतिमाह 70 हजार रुपये टैंकरों पर फुंकने के बावजूद बच्चों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना क्यों पड़ रहा है?
"विद्यार्थियों के पैदल मार्च की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर उनसे चर्चा की गई। उनकी पानी और भोजन से जुड़ी शिकायतों को सुना गया है। समस्याओं का शीघ्र अति शीघ्र निराकरण कराया जाएगा।"
— कुलभूषण शर्मा, तहसीलदार, बाजना
"पानी की समस्या छात्रावास निर्माण के समय से ही बनी हुई है। हर महीने 130-150 टैंकरों के जरिए पूर्ति की जाती है, जिस पर 70 हजार रुपये खर्च होते हैं। उच्च अधिकारियों से चर्चा कर समाधान का प्रयास किया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता में सुधार के लिए संबंधित को नोटिस जारी किया जाएगा।"
— अविनाश साहू, प्राचार्य, एकलव्य विद्यालय, बाजना

