रतलाम में बेघर हुआ परिवार सुलभ शौचालय में रहने को मजबूर: मजबूरी या सहानुभूति बटोरने का प्रयास?
रतलाम, 07 अगस्त (इ खबर टुडे)। क्या आपने कभी सोचा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की मल्टी में करीब 4-5 साल तक अपने आशियाने में रहने वाला परिवार अचानक इस कड़कड़ाती बारिश में किसी शासकीय सुलभ शौचालय में शरण लेने को मजबूर हो जाए? रतलाम के जावरा रोड स्थित एक बंद पड़े सुलभ शौचालय में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां असलम (अनवर हुसैन) अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों के साथ रहने को मजबूर है। बच्चे सड़क किनारे पढ़ाई कर रहे हैं और पूरा परिवार बदहाली के दिन काट रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह इस गरीब परिवार की असली लाचारी है या फिर यह नेताओं और जनता की सहानुभूति बटोरने का कोई तरीका?
दरअसल, रतलाम के डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की मल्टी में रह रहे कई परिवारों ने पिछले 4-5 सालों से अपने अंशदान या बैंक लोन की बकाया राशि जमा नहीं की थी। प्रति परिवार लगभग 1,80,000 की राशि बकाया होने पर राज्य शासन ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इस आदेश के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और 150 से अधिक बकायेदार परिवारों को मल्टी से बाहर कर फ्लैटों को सील कर दिया। बेदखल किए गए लोगों का सामान नगर निगम ने सुरक्षित रखवा दिया गया है।
कार्रवाई के बाद सुलभ शौचालय बना आशियाना
बेदखली की इस कार्रवाई के बाद मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले असलम के पास जब सिर छिपाने की जगह नहीं बची, तो उसने जावरा रोड स्थित एक बंद पड़े शासकीय सुलभ शौचालय को अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया। असलम का कहना है कि मजदूरी से इतनी कमाई नहीं होती कि वह एकमुश्त इतनी बड़ी बकाया राशि जमा कर सके।
इस पूरी कार्रवाई के बाद शहर में सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और महापौर व क्षेत्रीय विधायक पर बारिश के मौसम में गरीबों को बेघर करने का आरोप लगाया। वहीं, दूसरी ओर महापौर का कहना है कि नगर निगम प्रशासन की ओर से बेघर हुए परिवारों के लिए 4 वैकल्पिक स्थानों पर रहने की समुचित व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बकायेदारों को राहत देने के संबंध में राज्य शासन से भी चर्चा की जा रही है।
प्रशासन द्वारा रहने की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने के बावजूद असलम के परिवार का सुलभ शौचालय में ही टिके रहना अब चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।

