मजदूरों के अधिकारों का समाप्त करने का काम किया है सरकार ने,कांग्रेस करेगी आंदोलन
* इंदौर से ख़राब है पेयजल
* संविधान विरोधी मानसिकता
पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष हर्षविजय गेहलोत ने कहा कि मनरेगा गरीबों का हक है और इसका नाम बदलकर संघ की विचारधारा थोपने की साजिश की जा रही है। श्री गेहलोत ने कहा योजना में सौ दिन के काम की गारंटी को 125 दिन देने की बात कही है लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार अभी ही सिर्फ एक परिवार को इसमें 24 दिन का रोजगार दे पा रही है। उन्हाने कहा कि राज्यो को इसमें अपना अंश मिलाने पड़ेगा, इससे मध्यप्रदेश जैसे राज्य में ही प्रतिवर्ष 3 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार पडेगा। प्रदेश पर पहले से ही 2 लाख करोड़ का कर्ज है ऐसे में राज्य की हालत और बिगड़ जाएगी।
संविधान विरोधी मानसिकता का प्रमाण
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि वह गांधी जी के नाम और विचारों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी। नाम बदलना केवल एक शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला और संविधान विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पहले रोजगार खत्म करती है, फिर रोजगार की गारंटी देने वाली योजना का नाम बदलकर अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष गेहलोत ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में इस योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले बीते वर्षो में सामने आए है। योजना में जी राम जी नाम डाल कर भगवान राम के नाम को भी बदनाम करने का प्रयास किया है। गेहलोत ने कहा कांग्रेस पार्टी गांव-गांव में ग्राम सभाओ में इस नई योजना के खिलाफ प्रस्ताव लाकर उसे पास कराएगी। इसका उद्देश्य भाजपा की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब करना होगा।
रतलाम में पेयजल की स्थिति इंदौर से भी खराब
प्रेस वार्ता में इंदौर के भागीरथपूरा में दुषित पेयजल में नागरिको की मौत पर आंदोलन की जानकारी देते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा ने बताया ये सरकार की नाकामी है। पीड़ितो को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस सड़क पर उतरेगी। रतलाम शहर से सौ पहिया वाहन से सैंकड़ो लोग इंदौर पहुंचेगे। इसके अलावा जिले से भी करीब तीन हजार कांग्रेसी इंदौर आंदोलन में पह्रुचेगें।
पूर्व महापौर पारस सकलेचान ने कहा शहर के 18 मोहल्लों में गंदगी मिला हुआ पानी आ रहा है। इनमें से कुछ मोहल्ले वो भी शामिल है, जहां गुजरात की कंपनी ने सीवरेज लाइन और पेयजल लाइन को करीब कर दिया। सीवरेज लाइन टूट गई, मल मिला हुआ पानी नल में पेयजल के रूप में आ रहा है, मामला कलेक्टर कर जनसुनवाई, मानव अधिकार आयोग, मप्र विधानसभा, एनजीटी तक पहुंच गया, लेकिन बेशर्मी इतनी की हर जगह एक ही असत्य परोस दिया, सब ठीक कर दिया है। पेयलज की जो रिपोर्ट आई, वो चौकाने वाली है, उसके अनुसार लगातार इस प्रकार के पेयजल के उपयोग से कैंसर , किडनी और लीवर की बीमारी होने का खतरा है। जल प्रयोगशाला द्वारा दी गई रिपोर्ट में कई पैरामीटर में दूषित मात्रा से काफी ज्यादा मात्रा पाई गई। टोटल कोलिफार्म तथा फिकलकोलिफार्म निर्धारित लिमीट शून्य की तुलना में क्रमश: 760 तथा 690 पाया गया। पीने के पानी के 100 एमएल नमूने में ई-कोली बेक्टेरिया का 760 तथा 690 की मात्रा में आया। नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित अधिकतम लिमिट 45 एमजी प्रति लीटर के स्थान पर 53.4 एमजी प्रति लीटर आई।

