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 इंदौर–दाहोद नई रेल परियोजना के तहत रेलवे स्टेशनों की दीवारों पर उकेरी जा रही स्थानीय कला और संस्कृति की झलक

 धार क्षेत्र  की समृद्ध विरासत को रेलवे स्टेशनों की दीवारों पर मिलेगा नया मंच
 
 *** स्थानीय कलाकारों को सौंपी गई पेंटिंग की जिम्मेदारी
*** चार रेलवे स्टेशनों पर बनाई जा रही हैं आकर्षक पेंटिंग
 *** यात्रियों को मिलेगी क्षेत्र की कला और परंपराओं की जानकारी
*** रेलवे स्टेशनों को सुंदर और यादगार बनाने की पहल

 

रतलाम, 14 अक्टूबर(इ खबर टुडे)। इंदौर–दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत टीही से धार के बीच रेल लाइन सहित विद्युतीकरण, सिग्नलिंग प्रणाली तथा रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज के निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके साथ ही रेलवे द्वारा इस रेलखंड के स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने और आकर्षक स्वरूप देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में रेलवे स्टेशनों की दीवारों पर स्थानीय कला, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को दर्शाने वाली आकर्षक पेंटिंग बनाई जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य स्टेशनों को सुंदर बनाने के साथ-साथ यहां आने वाले यात्रियों को क्षेत्र की समृद्ध विरासत से परिचित कराना है।

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क विभाग  द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्‍टेशनों पर पेंटिंग करने का निर्णय लिया गया है तथा इस कार्य के लिए स्थानीय कलाकारों को अवसर दिया गया है। इससे एक ओर स्थानीय कला और कलाकारों को प्रोत्साहन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर रेलवे स्टेशनों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाया जा रहा है। इन पेंटिंग के जरिए धार और आसपास के क्षेत्रों की ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विशेषताओं को रोचक और सरल तरीके से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।

चार रेलवे स्टेशनों पर बनाई जा रही हैं आकर्षक पेंटिंग

टीही से धार के बीच स्थित पीथमपुर, सागोर, गुनावद और धार रेलवे स्टेशनों पर इस प्रकार की पेंटिंग बनाई जा रही हैं। स्टेशन की बाहरी दीवारों के साथ-साथ प्रतीक्षालय और प्लेटफॉर्म की दीवारों को भी स्थानीय कला एवं संस्कृति से जुड़े चित्रों के माध्यम से आकर्षक बनाया जा रहा है। इन चित्रों के माध्यम से स्टेशन परिसर को एक नया स्वरूप देने के साथ यात्रियों के लिए इसे क्षेत्र की पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

रेलवे स्टेशनों पर बनाई जा रही ये पेंटिंग केवल सजावट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से यात्रियों को उस क्षेत्र के इतिहास, जीवनशैली, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने का अवसर भी मिलेगा। ट्रेन से आने-जाने वाले यात्रियों को स्टेशन परिसर में ही स्थानीय विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

धार की समृद्ध विरासत को मिलेगा नया मंच

धार जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक पहचान, धार्मिक परंपराओं, आदिवासी लोककला और समृद्ध सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही पीथमपुर क्षेत्र अपनी औद्योगिक पहचान के कारण भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों की दीवारों पर स्थानीय विशेषताओं को दर्शाने वाली पेंटिंग के माध्यम से क्षेत्र की अलग-अलग पहचान को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय कला और परंपराओं को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित करने से यात्रियों को क्षेत्र के बारे में जानकारी मिलेगी। साथ ही, यह पहल स्थानीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक हो सकती है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले यात्री इन चित्रों के माध्यम से धार और आसपास के क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता, लोकजीवन तथा औद्योगिक विकास की झलक देख सकेंगे।

रेलवे स्टेशनों को सुंदर और यादगार बनाने की पहल

रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के विकास के साथ उनके सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। दीवारों पर रंग-रोगन और आकर्षक चित्रकारी से स्टेशन परिसर का वातावरण बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय विषयों पर आधारित पेंटिंग स्टेशनों को एक अलग पहचान देंगी और यात्रियों के लिए स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का माध्यम बनेंगी।

इंदौर–दाहोद नई रेल परियोजना के अंतर्गत टीही से धार के बीच किए जा रहे विकास कार्यों के साथ इस तरह की पहल क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों को अधिक आकर्षक और विशिष्ट स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। स्थानीय कलाकारों की भागीदारी से तैयार हो रही यह चित्रकारी रेलवे स्टेशन की दीवारों को क्षेत्र की कला, संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करने वाले माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।