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बेटियों को दहेज नहीं संस्कार का दहेज दीजिए

उत्सवमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का समापन 
 
अंतिम दिन उमड़ा आस्था और भक्ति का सेलाब 
 

रतलाम, 30 अप्रैल (इ खबर टुडे)। अमलेटा फंटे स्थित श्री नित्यानंद आश्रम गौशाला पर जन कल्याण निमित्त आयोजित सात दिवसीय उत्सवमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का भव्य समापन हुआ। अवधूत श्री राजानन्द बापजी के प्रिय कृपापात्र श्री विश्वानंद बापजी के सानिध्य में आयोजित इस ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन आस्था और भक्ति का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

​कथावाचक पंडित महेश जी पाण्डे ने अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बेटियों को दहेज के बजाय संस्कारों का दहेज देना चाहिए। उन्होंने मित्रता की मिसाल देते हुए कहा कि "दोस्त बनाओ तो भगवान श्री कृष्ण जैसा, जो या तो युद्ध जीता दे या फिर प्रेम में तीनों लोकों का सुख दे दे।"

संसार दुखों से भरा है क्योंकि हमें अपने कर्मों पर अपने भगवान पर अपनी माता पर विश्वास नहीं है हमारी तीन माताएं हैं पहले माता जगत जननी जो हमें जन्म देती है दूसरी माता पृथ्वी माता और तीसरी हमारी गौ माता तीनों माताओं को सम्मान देना चाहिए आपका सम्मान अपने आप हो जाएगा संसार में माता और भगवान ही हैं जो कभी आपसे नफरत नहीं करते हैं हमें दोनों की शरण में रहना चाहिए हमेशा प्रसन्नचित रहेंगे तत्पश्चा भगवान श्री कृष्ण की प्रिय मित्र सुदामा का चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया। जिसमें श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता के माध्यम से भक्ति और समर्पण का संदेश दिया गया तथा में राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के साथ सुखदेव जी की विदाई का वर्णन हुआ। 

कथा के समापन के पश्चात आरती में सम्मिलित हुए सांसद प्रतिनिधि कैलाश पटेल युवा भाजपा नेता धन्ना लाल डामर विधायक प्रतिनिधि रतलाम ग्रामीण, दिनदयाल पाटीदार धामेडी, समाजसेवी सुरेन्द्र वोरा, अनिल यादव, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु  शामिल हुए अवधूत श्री विश्वनन्द बापजी द्वारा सात दिवसीय कथा में गौसेवा करने वालें व कथा में सहयोगी बने कार्यकर्ताओं को साफा बांधकर सम्मान भी किया गया कथा में भोपाल, बेतूल ,उज्जैन, देवास , शाजापुर , धार, महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहें। 

अंतिम दिन महाप्रसाद में 7 से दस हजार भक्तों ने प्रसादी ग्रहण किया आश्रम पर प्रसादी रात्रि 10 बजे तक चलती रहीं श्रद्धालुओं ने अवधूत का आशिर्वाद प्राप्त किया 7 दिवसीय श्री मद् भागवत कथा में सुबह शाम भक्तों को प्रसादी वितरण की गई।