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 रतलाम / रात 11 बजते ही खान-पान की दुकानें बंद, लेकिन हाट रोड पर देर रात तक सजती है कबाड़ और नशे की महफिल

 
 

​रतलाम, 12 मई (इ खबर टुडे)। शहर की कानून व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में स्पष्ट रूप से ‘दोहरा मापदंड’ देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां शहर के मुख्य बाजारों में परिवार के साथ घूम रहे आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों पर सख्ती दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर हाट रोड जैसे क्षेत्रों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

​रात के 11 बजते ही पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए दिलबहार चौराहा, स्टेशन रोड और न्यू रोड जैसे इलाकों में सक्रिय हो जाती हैं। यहां खान-पान की दुकानों को जबरन बंद करवा दिया जाता है। अपने परिवार के साथ बाहर निकले नागरिकों को पुलिसिया रौब का सामना करना पड़ता है। अनुशासन के नाम पर की जाने वाली यह सख्ती केवल सभ्य इलाकों तक ही सीमित नजर आती है।

अवैध गतिविधियों का सुरक्षित गढ़
​मुख्य सड़कों पर सख्ती दिखाने वाली पुलिस की नजर हाट रोड पर पड़ते ही जैसे धुंधली हो जाती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार ​देर रात तक यहां कबाड़ की दुकानें देर रात तक खुली रहती हैं, जो सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन को चुनौती दे रही हैं। हाट रोड पर देर रात तक असामाजिक तत्वों और नशेडियों का जमावड़ा लगा रहता है। 

आरोप है कि नशे के आदि गुंडे-बदमाश शहर भर में चोरियां करते हैं और बिना किसी डर के चोरी का माल इन कबाड़ की दुकानों पर खपा देते हैं। मोचीपुरा, शेरानीपुरा और हकीमवाड़ा जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग और सूचीबद्ध बदमाश देर रात तक चौराहों पर जमा रहते हैं। 

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​आखिर क्या कारण है कि पुलिस उन इलाकों में ज्यादा सक्रिय है जहां आम परिवार खाना खाने निकलते हैं, लेकिन उन इलाकों से आंखें मूंद ली गई हैं जो अपराध का केंद्र बन रहे हैं? क्या हाट रोड के दुकानदारों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है?