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डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर 55 लाख की साइबर ठगी: रतलाम पुलिस ने बचाए 35 लाख रुपये

साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से 15 लाख फ्रीज, 20 लाख की अतिरिक्त ठगी रोकी
 
फर्जी पुलिस अफसर और ATS बनकर कुवैत के कारोबारी को बनाया था शिकार

 

 

​रतलाम,19 सितंबर (इ खबर टुडे)। रतलाम में साइबर ठगों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करने वाले एक व्यक्ति से लगभग 55 लाख रुपये ऐंठने का गंभीर मामला सामने आया है। हालांकि, रतलाम पुलिस और परिजनों की तत्परता एवं सूझबूझ से पीड़ित को 20 लाख रुपये और गंवाने से बचा लिया गया, वहीं ठगी गई राशि में से 15 लाख रुपये तत्काल फ्रीज करवा दिए गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित आसिफ हुसैन अमृत सागर कॉलोनी निवासी 66 वर्षीय कारोबारी 15 सितंबर को रतलाम आया हुआ था, तभी उसके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताया। इसके बाद साइबर ठगों ने पीड़ित पर उसके नाम से जारी सिम के जरिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) से संपर्क में होने का झूठा आरोप लगाया।

​ठगों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस व ATS अधिकारी बताकर पुलिस वर्दी में व्हाट्सएप वीडियो कॉल किए और बंदूकों के फोटो भेजकर पहचान करने के लिए कहा। पीड़ित को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड जैसे फर्जी दस्तावेज भेजे गए और खाता सत्यापन के नाम पर रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।

​दो दिनों में RTGS के जरिए ऐंठ लिए 55 लाख
ठगों के खौफ और दबाव में आकर पीड़ित ने 17 सितंबर को 35 लाख रुपये और 18 सितंबर को 20 लाख रुपये (कुल 55 लाख रुपये) ठगों के बताए बैंक खातों में RTGS के जरिए ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने झांसा दिया था कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही यह राशि वापस कर दी जाएगी।

​परिजनों की सजगता से बची 20 लाख की और रकम
पीड़ित जब घर पर अकेला था, तब ठग उससे 20 लाख रुपये और ट्रांसफर करवाने की तैयारी में थे। फोन न उठाने पर पीड़ित की पत्नी ने रतलाम स्थित रिश्तेदारों से संपर्क किया। परिजनों को जब पीड़ित की घबराहट और बड़ी रकम ट्रांसफर करने की बात पता चली, तो उन्होंने तुरंत रतलाम साइबर सेल को सूचित किया। साइबर सेल के कर्मचारियों और परिजनों ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित की काउंसलिंग की और उसे अतिरिक्त रकम भेजने से रोका।

​NCRP पोर्टल के जरिए 15 लाख रुपये कराए फ्रीज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में साइबर सेल एवं थाना माणकचौक पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों के सहयोग से 15 लाख रुपये फ्रीज करवा दिए। पुलिस ने इस मामले में ई-एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की तलाश तथा शेष राशि की रिकवरी के लिए विशेष टीम गठित की है।

​रतलाम पुलिस की आमजन से अपील
कोई भी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, ATS या सुप्रीम कोर्ट फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से कभी भी किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति फोन पर गिरफ्तारी या एफआईआर का भय दिखाकर पैसे की मांग करे, तो तुरंत समझ जाएं कि यह साइबर ठगी है। घबराएं नहीं, पैसे ट्रांसफर न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।