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 अकेले सफर पर निकले 85 वर्षीय बुजुर्ग को अपनों से मिलाया: समाजसेवी और रेल प्रशासन की तत्परता आई काम

 
 

​रतलाम, 05 मई(इ खबर टुडे)। मुंबई के मलाड निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग शंकर लाल शर्मा, जो बिना बताए घर से निकलकर ट्रेन में सवार हो गए थे, उन्हें रतलाम रेलवे स्टेशन पर सुरक्षित उतारकर परिजनों से संपर्क कराया गया। समाजसेवी गोविंद काकानी, जीआरपी और आरपीएफ की सजगता से एक बड़ी अनहोनी टल गई और दादाजी सकुशल अपने परिवार के पास पहुँच गए।

​पेशे से भौतिक शास्त्र के सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर लाल शर्मा मंगलवार प्रातः 4:30 बजे परिजनों को बिना बताए मलाड (मुंबई) स्थित अपने घर से निकल गए थे। वह बांद्रा-गोरखपुर ट्रेन में सवार होकर अनजान सफर पर निकल पड़े। सुबह जब परिजनों ने उन्हें घर पर नहीं पाया, तो हड़कंप मच गया। परिजनों ने उनकी तलाश में शहर के परिचितों और पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

​सह-यात्री की जागरूकता से मिली लोकेशन
​सफर के दौरान ट्रेन में सामने बैठे एक यात्री को जब बुजुर्ग के अकेले होने पर संदेह हुआ, तो उन्होंने चर्चा की। बातचीत में उनके परिजनों का नंबर लेकर यात्री ने सूचना दी कि दादाजी ट्रेन में सफर कर रहे हैं। लोकेशन मिलते ही परिजनों ने तुरंत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य और काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी से संपर्क साधा और उन्हें रतलाम स्टेशन पर उतारने का अनुरोध किया।

​रतलाम स्टेशन पर चला 'रेस्क्यू' अभियान
​सूचना मिलते ही समाजसेवी गोविंद काकानी तत्काल रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने रेलवे विभाग, जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारियों से समन्वय किया। जैसे ही ट्रेन रतलाम पहुंची, टीम ने तत्परता दिखाते हुए शंकर लाल जी को सुरक्षित ट्रेन से उतारा और जीआरपी थाने ले आए।

​"बातचीत में दादाजी ने बताया कि वह शिक्षक रहे हैं और सेवानिवृत्ति के बाद परिवार के साथ समय बिताते हैं। बस अचानक ही बाहर निकलने का मन हुआ और वह स्टेशन आ गए।" — गोविंद काकानी, समाजसेवी

​परिजनों ने व्यक्त किया आभार
​परिजनों की सहमति पर उन्हें जावरा निवासी अरुण शर्मा के सुपुर्द कर वहां भिजवाया गया। दादाजी के पौत्र अभिषेक शर्मा उन्हें लेने के लिए मुंबई से कार द्वारा जावरा पहुंचे। बुजुर्ग के सकुशल घर लौटने पर परिवार ने समाजसेवी गोविंद काकानी, जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे स्टाफ का हृदय से आभार व्यक्त किया।