सात करोड लागत के भवन तैयार,फिर भी किराये के भवन में तल रहे हैैं आजाक विभाग के बालक आश्रम
रतलाम,28 अगस्त (इ खबरटुडे)। अफसरों की हठधर्मिता के कारण सरकारी धन का किस तरह अपव्यय किया जाता है,इसका बेहतरीन उदाहरण इन दिनों आदिम जाति कल्याण विभाग में देखा जा सकता है। विभाग द्वारा आदिवासी बालकों के लिए चलाए जाने वाले बालक आश्रमों के दो भवन न सिर्फ बनकर तैयार हो चुके हैैं बल्कि विभाग को हस्तांतरित भी हो चुके है,लेकिन इसके बावजूद विभाग द्वारा हजारों रुपए प्रतिमाह का किराया चुकाकर किराये के भवनों में ही आश्रमों का संचालन किया जा रहा है।
आदिम जाति कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक विभाग द्वारा रतलाम और पीपलखूंटा में आदिवासी बालक बालिकाओ के लिए दो आश्रम भवन बनाए गए है। 50-50 बालकों की क्षमता वाले इन दोनो आश्रम भवनों पर कुल सात करोड की लागत आई है और उक्त दोनो भवन दो महीनों पहले ही विभाग को हस्तांतरित भी किए जा चुके हैैं।
रतलाम और पीपलखूंटा दोनो ही स्थानों पर भवनों के अभाव में बालक आश्रम किराये के भवनों में संचालित किए जा रहे थे। विभाग द्वारा इन दो किराये के भवनों के लिए प्रतिमाह तीस तीस हजार रु. की राशि किराये के रुप में अदा की जा रही है। नए भवन बन जाने के बाद उक्त आश्रमों को अविलम्ब नवनिर्मित भवनों में स्थानांतरित किए जाने चाहिए थे। लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही या हठधर्मिता के चलते अब भी दोनो आश्रम किराये के भवनों में ही चलाए जा रहे हैैं।
सात करोड की लागत से बने सर्वसुविधा युक्त भवन उपलब्ध होने के बावजूद आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा प्रतिमाह साठ हजार रु. महज किराये के नाम पर व्यय किए जा रहे हैैं और आदिवासी बच्चे भी किराए के भवनों में ही दिन गुजारने के लिए मजबूर है।

